वन एवं वन्य जीव संरक्षण भाग-1 (Van or Vany Jeev Sanrakshan Part-1)

 वन एवं वन्य जीव संरक्षण भाग-1
(Forest and Wildlife Conservation)

https://haabujigk.in/2020/09/peyajal-pariyojana.html
वन-संरक्षण-क्षेत्र

✔️ प्रशासनिक आधार पर राज्य के वनों को तीन भागों में विभाजित किया गया है-

1.आरक्षित वन (Reserved forest)➡️ उदयपुर (37.33%)
2. रक्षित वन (Protected forest) ➡️ बारां (54.17%)
3.अवर्गीकृत वन (Unclassified forest)➡️ बीकानेर (8.48%)
✔️ वनों का छायाक्षेत्र वनावरण कहलाता है ।
✔️ वनावरण के आधार पर राज्य के वनों को तीन भागो में विभाजित किया है
1.अति सघन वन (Very dense forest):- जिन वनों का छाया क्षेत्र 80% से कम होता है, अति सघन वन की श्रेणी में आते है। राज्य में अति सघन वन केवल अलवर (Alwar) जिले में ही पाये जाते है । अलवर जिले का 14 किलोमीटर क्षेत्र अति सघन वन की श्रेणी में आता है ।
2.सघन वन (Dense forest):- जिन वनों का छाया क्षेत्र 40% से 80% होता है, राज्य में सर्वाधिक सघन वन उदयपुर (Udaipur) जिले में जबकि न्यूनतम सघन वन जोधपुर (Jodhapur) जिले में पाये जाते है ।
3.खुले वन (Open forest):- इस प्रकार के वनों का छाया क्षेत्र 10% से 40% होता है, राज्य में सर्वाधिक खुले वन उदयपुर जिले में जबकि न्यूनतम खुले वन चुरू (Churu) जिले में पाये जाते है ।
✔️ राज्य में 12 वन मण्डल है ।

वन्य जीव संरक्षण
(Wildlife Reserve)

✔️ राज्य में वृक्षों की रक्षा हेतु प्राणोत्सर्ग की प्रथम घटना जोधपुर जिले के रामसडी गाँव (Ramsadi Village) में सन् 1661 में घटी, यहां कर्मा एव गोरा नामक दो महिलाओं ने वृक्षों की रक्षा हेतु अपने प्राणों की बलि दी।

✔️ वृक्षों की रक्षा हेतु प्राणोत्सर्ग की प्रथम घटना नागौर जिले के मेड़ता (Medata) तहसील के पोलावास गाँव (Polavas Village) में सन् 1700 इस्वी में घटी, यहां बूचोजी ने वृक्षों की रक्षा हेतु अपनी गर्दन कटवा ली ।

✔️ वृक्षों की रक्षा हेतु प्राणोत्सर्ग की सबसे बड़ी एव महत्वपूर्ण (राज्य की तीसरी घटना) घटना 28 अगस्त 1730 को (भाद्रपद शुक्ल दशमी) जोधपुर जिले के खेजडली गाँव (Khejadli Village) में घटी ।

✔️ इस समय जोधपुर के महाराजा अभय सिंह थे । उन्होने लकड़ी के महल निर्माण हेतु वृक्षों को काटने का आदेश दिया। इसके विरोध में रामा विश्नोई की पत्नी अमृता देवी विश्नोई (Amrita Devi Vishnoi) तथा उसकी दो पुत्रियाँ शहीद हो गई इस घटना में वृक्षों की रक्षार्थ हेतु 363 लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी ।

✔️ देश का चिपको आन्दोलन (Chipko Movement) इसी घटना से प्रेरित माना जाता है ।

नोट :- वर्तमान में शहीद अमृता देवी की स्मृति में जोधपुर जिले के खेजड़ली नामक स्थान पर “शहीद अमृता देवी के स्मारक’ का निर्माण किया जा रहा है ।

✔️ शहीद अमृता देवी की स्मृति को अक्षुण्ण बनाये रखने हेतु प्रथम खेजड़ली दिवस 12 सितम्बर 1978 को मनाया गया ।

✔️ विश्व का एकमात्र वृक्ष मेला शहीद अमृता देवी की स्मृति में प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्ल दशमी को जोधपुर जिले के खेजडली गाँव में आयोजित किया जाता है ।

✔️ देश में सर्वप्रथम 1894 में वन नीति घोषित की गई ।

✔️ राजस्थान में सर्वप्रथम 1910 में जोधपुर रियासत में सर्वप्रथम वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम कानून बनाया गया

नोट :- विश्नोई जाती द्वारा वृक्षों को बचाने के लिये प्राणोत्सर्ग करने की परम्परा को “खड़ाना साका’ कहा जाता है ।

✔️ 1935 में अलवर रियासत में तत्कालीन शासक जयसिंह के समय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम कानून बनाया गया।

✔️ जयसिंह ने सरिस्का क्षेत्र (Sariska Region) के वन्य जीवों की रिपोर्ट हेतु एक समिति गठित की । इस समिति ने तेजसिंह के रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसे Yellow Paggeses (पीली किताब) के नाम से जाना जाता है ।

✔️ राजस्थान में 1950 में वन विभाग की स्थापना की ।

✔️ स्वतन्त्र भारत की प्रथम वन नीति (First forest policy) 1952 में घोषित की गई थी, इसके तहत राज्य के कुल क्षेत्रफल के लगभग एक तिहाई भाग पर वन होना निश्चित किया गया । जबकि राजस्थान में वर्तमान में राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के 9.56 % भाग पर ही वन है ।
✔️ राष्ट्रीय वन नीति 1952 की अनुपालना में राजस्थान सरकार ने वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1953 पारित किया ।
✔️ 1968 में राज्य में ठेकेदारी प्रथा के तहत वनों के दोहन को पूरी तरह प्रतिबन्धित किया । 1984 में लकड़ी से कोयला निर्माण को प्रतिबन्धित किया गया ।
✔️ 1988 में संशोधित वन नीति घोषित की गई । इसके तहत मैदानी भाग में 20 प्रतिशत तथा पहाड़ी भागों में 60 प्रतिशत वनों का लक्ष्य निर्धारित किया गया ।
✔️ 1991 में खैर वृक्ष से कत्था तैयार करने पर प्रतिबन्ध लगाया गया ।
✔️ राज्य में भारत के कल क्षेत्रफल के 0.99 प्रतिशत भाग पर वन पाये जाते है । राज्य में प्रतिव्यक्ति 0.06 हेक्टेयर वन उपलब्ध है ।
✔️ राज्य में सर्वाधिक वन उदयपुर जिले में (36.62प्रतिशत) तथा न्यूनतम वन चुरू जिले में (0.42 प्रतिशत) पाये जाते है।
✔️ राज्य के सर्वाधिक वन वाले चार जिले इस प्रकार है – उदयपुर, बारां, चित्तौड़गढ़, करौली
✔️ राज्य में न्यूनतम चार जिले इस प्रकार है – चुरू, हनुमानगढ़, नागौर, जोधपुर |

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