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तात्या टोपे और राजस्थान (Tatya Tope and Rajasthan) - gk website
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तात्या टोपे और राजस्थान (Tatya Tope and Rajasthan)

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 तात्या टोपे और राजस्थान
(Tatya Tope and Rajasthan)

तात्या-टोपे-और-राजस्थान
तात्या-टोपे-और-राजस्थान

✔️ तात्या टोपे का वास्तविक नाम रामचन्द्र पाण्डुरंग था ।
✔️ ग्वालियर में पराजित होने के उपरान्त 5000 सैनिकों के साथ ताँत्या टोपे ने राजस्थान में प्रवेश किया ।
✔️ तात्या टोपे सर्वप्रथम हिण्डोन (Hindon) होते हुए लालसोट (Lalsot) पहुचें । यहां से दौलतपुरा (लालसोट) होते हुए टोंक पहुंचे। फिर टोंक से नाथद्वारा पहुंचे । यहां से सन्त गिरधर तिलायक जी ने इन्हे श्रीनाथ जी के दर्शन कराये ।
✔️ तात्या टोपे जैसलमेर रियासत के अलावा राजस्थान की सभी रियासतों में घुमें, इनके साथी मानसिंह नरूका (नरवर के जागीरदार) के विश्वासघात के चलते 7 अप्रेल 1859 को इन्हे कोटा के पास नरवर के जंगलों से गिरफ्तार कर लिया गया तथा 18 अप्रेल 1859 को शिप्री नामक स्थान पर फांसी दे दी गई । (यह स्थान मध्यप्रदेश में स्थित है)

1857 की क्रान्ति से सम्बन्धित महत्वपूर्ण तथ्य-

(Important facts related to the revolution of 1857)-
✔️ इतिहासकार पिचार्ड का कथन है “यदि राजाओं के स्थान पर क्रान्ति का नेतृत्व क्रान्तिकारी देशभक्तों के हाथों में होता तो क्रान्ति का परिणाम ही कुछ ओर होता”
✔️ राजस्थान में 1857 की क्रान्ति के आधारभूत ढांचे का निर्माण श्याम जी कृष्ण वर्मा द्वारा किया गया था ।
✔️ सशस्त्र क्रान्ति का जनक गोपाल सिंह खरवा को माना जाता है ।

✔️ इतिहासकार कविराज श्यामलदास तथा सूर्यमल मिश्रण ने 1857 की क्रान्ति का प्रत्यक्ष आँखों देखा हाल प्रस्तुत किया
✔️ बीकानेर के शासक सरदार सिंह एकमात्र शासक थे जिन्होने अंग्रेजों की सहायता हेतु अपनी सेनाएँ राज्य से बाहर हिंसार (हरियाणा) (Hinsar (Haryana)) तक भेजी ।
✔️ 1857 की क्रान्ति का भामाशाह अमरचन्द भाठिया को कहा जाता है, ये बीकानेर निवासी थे ।
✔️ अमरचन्द भाठिया को 1857 की क्रान्ति का प्रथम शहीद, राजस्थान का मंगलपांड़े भी कहा जाता है । A U . अमरचन्द भाठिया ने झांसी की रानी लक्ष्मी बाई की आर्थिक सहायता की थी । इन्हे ग्वालियर में फाँसी दी गई थी।
✔️ मेवाड़ के शासक स्वरूप सिंह ने सर्वप्रथम एवं सर्वाधिक सहायता अंग्रेजों को प्रदान की गई थी।
✔️ ताँत्या टोपे को सहायता देने के कारण अंग्रेजों ने सीकर को बाबोसरगढ़ दुर्ग को ध्वस्त कर दिया गया था
✔️ कोठारी नदी के किनारे हुए युद्ध में ताँत्या टोपे राबर्टस की सेना से पाराजित हुए थे ।
✔️ यदि क्रान्तिकारियों ने दिल्ली की ओर कूच न करके अजमेर को घेरा होता तो शायद क्रान्तिकारियों को असफलता हाथ न लगती ।
✔️ मेवाड़ शासक स्वरूप सिंह अंग्रेजों की अपने सामने फोटो रखकर पूजा किया करते थे ।
✔️ 9 अगस्त 1857 को अजमेर केन्द्रीय कारागृह में विद्रोह हुआ जहाँ से 50 कैदी फरार हो गये ।
✔️ सलूम्बर के रावत केसरी सिंह ने कुशाल सिंह को संरक्षण प्रदान किया था |
✔️ अलवर महाराजा विनय सिंह ने आगरा के किले में घिरे हुये अंग्रेजों की स्त्रियाँ एवं बच्चों की सहायता हेतु अपनी सेना और तोपखाना भेजा था ।
✔️ कोठारिया के रावत जोधसिंह ने नाना साहब के बिठुर से भागने के बाद शरण प्रदान की थी ।
✔️ सन् 1857 के विद्रोह सम्बन्धित आहुवा, बिथौड़ा एवं चेलावास तीनों स्थल वर्तमान में पाली जिले में स्थित है ।
✔️ एरिनपुरा में शीतलाप्रसाद, तिलकराम एवं मोती खाँ के नेतृत्व में विद्रोह हआ था ।
✔️ सन् 1857 की क्रान्ति की कुलदेवी सुगाली माता की प्रतिमा को अंग्रेज पाली से अजमेर ले आये थे । वर्तमान में यह प्रतिमा अजमेर के संग्रहालय में रखी हुई है ।
✔️ बूंदी के महाराव रामसिंह के अतिरिक्त राजपुताना के अन्य सभी नरेशों ने विप्लव को दबाने में अंग्रेजों का पूर्ण सहयोग प्रदान किया था ।
नोट :- मेवाड़ का पोलिटिकल एजेन्ट माइल्स का कथन है कि “भविष्य में यदि भारतवासी अंग्रेजों के विरूद्ध संगठित हुए तो संगठन की धुरी दिल्ली न होकर उदयपुर होगा”
✔️ 1857 की क्रान्ति का प्रतीक चिह्न कमल का फूल और चपाती थे ।
✔️ 1857 की क्रान्ति के समय गवर्नर जनरल लार्ड कैनिंग था ।
नोट :- भारत का अन्तिम वायसराय व प्रथम गवर्नर जनरल लार्ड कैनिंग को नियुक्त किया

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