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राव चन्द्रसेन,रायसिंह,राजसिंह प्रथम (Rao Chandrasen, Raisingh, Raj singh first) - gk website
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राव चन्द्रसेन,रायसिंह,राजसिंह प्रथम (Rao Chandrasen, Raisingh, Raj singh first)

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 मारवाड़ का राव चन्द्रसेन (1562-1581)
(Rao Chandrasen of Marwar)

Rao Chandrasen, Raisingh, Raj singh first
Rao Chandrasen, Raisingh, Raj singh first

✔️ मालदेव (Maladev) की मृत्यु के उपरान्त मालदेव ने अपने पुत्र राव चन्द्रसेन को मारवाड़ का उत्तराधिकारी घोषित किया

✔️ राव चन्द्रसेन को उत्तराधिकारी घोषित कर दिये जाने से मालदेव के पुत्र राम तथा मोटाराजा उदय सिंह (Mota Raja Uday Singh) अपने भाई चन्द्रसेन से नाराज हो गये। अतः राम अकबर की शरण में चला गया तथा मोटाराजा उदय सिंह ने भी 1570 में नागौर दरबार के समय अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली ।

नोट :- अकबर ने अजमेर यात्रा के समय 1570 में नागौर में एक तालाब का निर्माण करवाया जिसे शुक्र तालाब (Shukr Talab) कहा जाता है

✔️ 1564 में अकबर ने हुसैन कुली (Husain Kuli) के नेतृत्व में मारवाड़ में सेनाएँ भेजी राव चन्द्र सेन जोधपुर से भद्राजुण की तरफ चले गये

नोट :- 1570 मे नागौर दरबार में राव चन्द्रसेन भी उपस्थित हुए थे किन्तु इन्होने अकबर की अधीनता स्वीकार नही की ।

नोट :- अकबर ने इस समय मारवाड़ का गवर्नर बीकानेर शासक रायसिंह को नियुक्त किया ।

✔️ सन् 1574 में राव चन्द्रसेन ने अकबर के सेनापति जलाल खाँ (Jalal Khan) की हत्या कर दी । अतः अकबर ने शहाबाज खाँ को राव चन्द्रसेन के विरूद्ध भेजा। राव चन्द्रसेन सिवाना (Sivana) की ओर चले गये।

✔️ 11 जनवरी 1581 को सारण की पहाडियों (Saran Hills) में राव चन्द्रसेन की मृत्यु हो गई ।

नोट :- राव चन्द्रसेन की छतरी (Rao Chandrasen’s chhatree) वर्तमान में पाली (Pali) जिले के सारण (Saran) नामक स्थान पर स्थित है |

नोट :- मारवाड़ का शासक राव चन्द्रसेन राजपूताने का प्रथम शासक था जिसने अकबर की अधीनता स्वीकार नही की व विरोध किया इसी कारण इसे प्रताप का अग्रगामी भी कहा जाता है ।

नोट :- राव चन्द्रसेन को मारवाड़ का प्रताप तथा भूला बिसरा राजा भी कहा जाता है ।


बीकानेर का रायसिंह (1574-1612)
(Raisingh of Bikaner)

✔️ अपने पिता राव कल्याणमल (Rao Kalyanmal) की मृत्यु के बाद राय सिंह 1574 में बीकानेर का शासक बना ।
✔️ सन् 1570 में नागौर दरबार के समय राय सिंह के पिता राव कल्याणमल ने भी अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली।
✔️ प्रारम्भ में राय सिंह को अकबर द्वारा 4000 का मनसब प्रदान किया गया किन्तु आगे चलकर इसे बढ़ाकर 5000 कर दिया गया ।
✔️ राय सिंह ने महाराज तथा महाराजधिराज की उपाधियां धारण की, ऐसी उपाधियां धारण करने वाला वह बीकानेर के राठौड़ों का प्रथम शासक था ।
✔️ बीकानेर शासक राय सिंह के भाई पृथ्वीराज राठौड़ (Prithviraj Rathore) अकबर के नवरत्नों में से एक थे।
नोट :- पथ्वीराज राठौड ने गंगालहरी तथा बेली कृष्ण रूकमणी री नामक ग्रन्थ लिखा है जिसमें भगवान कृष्ण तथा रूकमणी के विवाह का वर्णन है, इस ग्रन्थ को कवि दूरसा आड़ा ने “पाँचवा वेद तथा उन्नीसवा पुराण’ कहा है ।
नोट :- एल.पी. तैस्सीतोरी ने पृथ्वीराज राठौड़ को “डिगल का हैरोस” कहा है ।
✔️ बीकानेर शासक राय सिंह ने सन् 1589 में करम चन्द पंवार (Karam Chand Panwar) की देखरेख में जुनागढ़ दुर्ग (Junagadh fort) का निर्माण कार्य प्रारम्भ करवाया। जिसका निर्माण कार्य वर्ष 1594 में पूरा हुआ ।
नोट :- जुनागढ़ दुर्ग को “जमीन का जेवर” (Jameen ka jewar) भी कहा जाता है ।
✔️ बीकानेर शासक राय सिंह ने बाल बोधनी तथा राय सिंह महोत्सव नामक ग्रन्थों की रचना की है।
नोट :- मुन्शी देवी प्रसाद (Munshi Devi Prasad) ने अपनी दानशीलता के कारण बीकानेर शासक राय सिंह को राजपूताने का कर्ण कहकर संबोधित किया है ।
✔️ सन् 1612 में दक्षिण के बुरहानपुर (Burhanpur) नामक स्थान पर राय सिंह की मृत्यु हो गई ।
✔️ राय सिंह ने दक्षिण में फोग झाड़ी को देखकर एक दोहे की रचना की है ।
“तु संदेशी रूखड़ा, म्हे परदेस्या लोग ।।
म्हाने अकबर तेडियो, तू क्यों आई फोग” ।।

मेवाड़ के राजसिंह प्रथम (सन् 1652 से 1680)
(Raj Singh first of Mewar)

✔️ अपने पिता जगत सिंह प्रथम की मृत्यु के बाद भी मेवाड़ के शासक राजसिंह ने चित्तौड़ दुर्ग का मरम्मत कार्य जारी रखा । जिससे ओरंगजेब (Aurangzeb) नाराज हो गया अत: औरंगजेब ने सादुल्ला खाँ के नेतृत्व में राजसिंह प्रथम के विरूद्ध सेनाएँ भेजी ।
✔️ किशनगढ़ (Kishangarh) के शासक रूप सिंह की पुत्री चारुमति का विवाह औरगजेब से होना तय हुआ था किन्तु 1660 में मेवाड़ के शासक राजसिंह प्रथम ने चारूमति से विवाह करके औरंगजेब को नाराज कर दिया ।
✔️ सन् 1679 में औरंगजेब ने हिन्दुओं पर जजिया कर पुनः लगा दिया ।
✔️ औरंगजेब कट्टर सुन्नी मुसलमान तथा प्रबल हिन्दू विरोधी शासक था । उसने हिन्दू मूर्तियों व हिन्दू मन्दिरों को नष्ट करना जारी रखा।
नोट :- मेवाड़ का शासक राजसिंह प्रथम इसी समय वृन्दावन (Vrindavan) से श्रीनाथ जी की मूर्ति को लाकर सिहाड़ (नाथद्वारा) (Sihad (Nathdwara)) नामक स्थान पर स्थापित करवाई। वर्तमान में सिहाड़ को नाथद्वारा के नाम से जाना जाता है |
नोट :- राजसिंह प्रथम ने सन् 1662 से 1676 के मध्य राजसमन्द झील (Rajsamand Lake) का निर्माण करवाया यह एकमात्र झील है, जिसके नाम पर इसी जिले का नामकरण हुआ है । इस झील में गोमती, ताल तथा केलवा नदी (Gomti, Tal and Kelwa River) का जल आता है । इस झील की आकृति धनुषाकार है ।
✔️ राजसिंह प्रथम ने राजसमन्द झील के तट पर कांकरौली (Kankaruli) नामक स्थान पर द्वारिकाधीश मन्दिर (Dwarkadhish Temple) का निर्माण करवाया ।
नोट :- कांकरौली में एशिया का सबसे बड़ा जे.के. टायर-ट्यूब कारखाना स्थित है ।
✔️ राजसिंह प्रथम के काल में राजसमन्द झील के तट पर रणछोड़ भट्ट तेलंग द्वारा लिखित 25 बडे शिलालेखों पर मेवाड़ का इतिहास वर्णित है, जिसे राजप्रशस्ति कहा जाता है । यह भारत का सबसे बड़ा शिलालेख है |
✔️ राजसिंह प्रथम ने प्रजा में सैनिक अभिव्यक्ति के लिये विजय कट कातु की उपाधि धारण की ।
✔️ राजसिंह प्रथम ने उदयपुर (Udaipur) में स्थित अम्बा या अम्बिका माता मन्दिर (Ambika Mata Temple) का निर्माण करवाया ।



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