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बंगाल की खाड़ी की ओर जाने वाली नदीयाँ (Rajasthan se Bangal ki khadi ki or jane wali nadiya) - gk website
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बंगाल की खाड़ी की ओर जाने वाली नदीयाँ (Rajasthan se Bangal ki khadi ki or jane wali nadiya)

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 राजस्थान से बंगाल की खाड़ी की ओर जाने वाली नदीयाँ
(Rivers from Rajasthan to Bay of Bengal)

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चम्बल नदी

➡️ चम्बल नदी राजस्थान की एकमात्र नदी है जो प्राकृतिक अन्तर्राज्यीय सीमा निर्धारित करती है। इस नदी को चर्मणवती, कामधेनु, बारहमासी, नित्यवाहिनी आदि उपनामों से जाना जाता है । इस नदी की कुल लम्बाई 966 किलोमीटर है। यह नदी मध्यप्रदेश, राजस्थान व उत्तरप्रदेश 3 राज्यों में बहती है।

➡️ यह नदी मध्यप्रदेश में 335 किलोमीटर, राजस्थान में 135 किलोमीटर, उत्तरप्रदेश में 275 किलोमीटर बहती है यह नदी राजस्थान, मध्यप्रदेश तथा उत्तरप्रदेश के मध्य 241 किलोमीटर की अन्तर्राज्यीय सीमा निर्धारित करती है।

➡️ इस नदी का उद्गम मध्यप्रदेश राज्य के इन्दोर जिले के महु क्षेत्र के विन्ध्याचल पर्वतमाला के 616 मीटर ऊची जनापाव की पहाड़ियों से होता है। मध्यप्रदेश में मन्दसौर जिले में स्थित रामपूरा, भानपूरा के पठारों में स्थित इस नदी का सबसे बड़ा बाँध गाँधीसागर बाँध बना हुआ है । यह नदी राजस्थान में सर्वप्रथम चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित चौरासीगढ़ नामक स्थान पर प्रवेश करती है।

➡️ भैसरोड़गढ़ के समीप चम्बल की सहायक नदी ब्राह्मणी इसमें आकर मिलती है। इस नदी पर राज्य का सबसे ऊँचा जल प्रपात चुलिया जलप्रपात बना हुआ है, जिसकी ऊँचाई 18 मीटर है ।

➡️ चम्बल नदी पर चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा नामक स्थान पर राणाप्रताप सागर बाँध बना हुआ है। जो कि भराव क्षमता की दृष्टि से राज्य का सबसे बड़ा बाँध है। यह बाँध 113 वर्ग किलोमीटर भराव क्षमता में फैला हुआ है।

➡️ चम्बल नदी चित्तौड़गढ़ जिले में बहने के उपरान्त यह नदी कोटा जिले में प्रवेश करती है । कोटा जिले में इस नदी पर जवाहर सागर व कोटा बैराज बाँध बने हुए है ।

नोट :- चम्बल नदी पर निर्मित कोटा बेराज बाँध से जलविद्युत उत्पादन कार्य नही होता है ।

➡️ कोटा जिले के नानोरा नामक स्थान पर कालीसिंध नदी चम्बल में आकर मिलती है । यह स्थान प्राचीन काल में कपिल मुनि की तपस्या स्थली रहा था

➡️ कोटा तथा बूंदी जिले की सीमा निर्धारित करती हुई यह नदी बूंदी जिले में प्रवेश करती है ।

➡️ बूंदी जिले के केशोरायपाटन नामक स्थान पर इस नदी का सर्वाधिक गहरा पाट है जो 113 मीटर की गहराई तक है।

➡️ बूंदी जिले से आगे चलकर यह नदी कोटा तथा सवाईमाधोपुर जिले की सीमा निर्धारित करती है ।

➡️ सवाई माधोपुर जिले के खण्डार तहसील के रामेश्वर नामक स्थान पर बनास तथा सीप नदी चम्बल में आकर मिलती है, तथा यहां त्रिवेणी संगम बनाती है ।

नोट :- चम्बल, बनास तथा सीप नदी के त्रिवेणी संगम को “मीणा जाती का प्रयागराज” कहा जाता है ।

➡️ सवाईमाधोपुर जिले के पालिया नामक स्थान पर चम्बल की सहायक नदी पार्वती नदी इसमें आकर मिलती है ।

➡️ सवाईमाधोपूर जिले के पालिया नामक स्थान से लेकर धौलपुर जिले के पीलहाट नामक स्थान तक 241 मिलोमीटर की अन्तर्राज्यीय सीमा निर्धारित करती है ।

➡️ धौलपुर जिले के पीलहाट होते हुए यह नदी राजस्थान से बाहर निकलती है और उत्तरप्रदेश राज्य में प्रवेश करती है।

➡️ अन्त में यह नदी उत्तरप्रदेश राज्य में 275 किलोमीटर बहने के उपरान्त इटावा जिले के मुरादगंज कस्बे के समीप यमुना नदी में मिल जाती है और यमुना नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी बन जाती है

चम्बल नदी से सम्बन्धित महत्वपूर्ण तथ्य:-

➡️ राज्य के कुल अपवाह क्षेत्र का 20.90% भाग चम्बल नदी का है ।

➡️ “गांगेय सूस” नामक स्तनपायी जीव इस नदी की विशेष विशेषता है ।

➡️ चम्बल नदी युनेस्कों की विश्व धरोहर के लिये नामित राज्य की एकमात्र नदी है ।

➡️ चम्बल नदी बहाव क्षमता की दृष्टि से राज्य की सबसे लम्बी नदी है । सर्वाधिक सतही जल चम्बल नदी में उपलब्ध है, चम्बल नदी को वाटर सफारी नदी भी कहा जाता है। सर्वाधिक अवनालिका अपरदन चम्बल नदी द्वारा होता है ।

➡️ राज्य में चम्बल नदी का अपवाह तंत्र चित्तौड़गढ़, कोटा, बूंदी, सवाईमाधोपुर, करौली तथा धौलपुर जिले में है।

➡️ चम्बल नदी से सर्वाधिक अवनलिका अपरदन कोटा जिले में होता है ।

➡️ चम्बल नदी विश्व की एकमात्र ऐसी नदी है, जिस पर प्रत्येक 100 किलोमीटर की दूरी पर तीन बड़े बाँध बने हुए है और तीनों बाँधों से ही जलविद्यत उत्पादन होता है ।

➡️ चम्बल नदी पर निर्मित सबसे बड़ा बाँध मध्यप्रदेश राज्य के मन्दसौर जिले में स्थित गाँधी सागर बाँध है ।

➡️ कोटा बैराज चम्बल नदी पर निर्मित एकमात्र ऐसा बाँध है जिससे जल विद्युत उत्पादन नही होता है।

➡️ चम्बल नदी मध्यप्रदेश, राजस्थान व उत्तरप्रदेश राज्य में बहती है । इस नदी में घडियाल सर्वाधिक पाये जाते है । इस कारण चम्बल नदी को घडियालों की प्रजनन स्थली या शरण स्थली कहा जाता है ।

➡️ राजस्थान, मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश की संयुक्त परियोजना के द्वारा एकमात्र नदी अभ्यारण्य व नदी सैन्चुरी विकसित किया जा रहा है । तीनों राज्यों में फैला हुआ राष्ट्रीय चम्बल घडियाल अभ्यारण्य क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा अभ्यारण्य है । इस अभ्यारण्य का क्षेत्रफल 5400 वर्ग किलोमीटर है |

बनास नदी

➡️ इस नदी का उद्गम राजसमन्द जिले में स्थित खमनोर की पहाडियों से होता है ।

➡️ पूर्णतः बहाव के आधार पर यह राजस्थान की सबसे लम्बी नदी है। इसकी कुल लम्बाई 480 किलोमीटर है।

➡️ इस नदी को वन की आशा, वर्णाशा, वनाशा, वशिष्टि नदी आदि उपनामों से जाना जाता है ।

➡️ इस नदी का प्रवाह क्षेत्र राज्य के छ: जिलो में है । यह नदी क्रमशः राज्य के राजसमन्द, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, अजमेर, टोंक, सवाई माधोपुर जिलों में बहती है ।

➡️ इस नदी के प्रवाह क्षेत्र में भूरी मिट्टी का प्रसार क्षेत्र पाया जाता है ।

➡️ भीलवाड़ा जिले के बीगोद कस्बे के समीप बनास, बेड़च और मेनाल का त्रिवेणी संगम स्थित है ।

नोट :- बनास नदी टोंक जिले के चारों ओर सर्पिलाकार में बहती है । ठोंक जिले के राजमहल नामक स्थान पर बनास, डाई एवं खारी नदी का त्रिवेणी संगम स्थित है ।

नोट :- राज्य की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना इन्दिरा गाँधी नहर सिंचाई परियोजना है, जबकि राज्य की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना टोंक जिले में बनास नदी पर निर्मित बीसलपुर बाँध परियोजना है

➡️ बनास नदी पर निर्मित बीसलपुर बाँध से जयपुर शहर को जलापूर्ति की जा रही है ।

नोट :- बीसलपुर बाँध का निर्माण अजमेर के चौहान शासक विग्रहराज चतर्थ (बीसलदेव) ने करवाया था ।

➡️ बनास नदी अपने प्रवाह के अन्त में सवाई माधोपुर जिले के खण्डार तहसील के रामेश्वर नामक स्थान पर जाकर चम्बल में मिल जाती है।

नोट :- रामेश्वर नामक स्थान पर चम्बल, बनास तथा सीप का त्रिवेणी संगम स्थित है, जिसे मीणाओं का प्रयागराज कहा जाता है ।

➡️ बनास नदी चम्बल की सबसे बड़ी सहायक नदी है ।

➡️ इस नदी पर नाथद्वारा के पास नन्दसमन्द बाँध का निर्माण किया गया है इसको राजसमन्द की लाइफ लाईन भी कहते है ।

बेड़च नदी

➡️ इस नदी का उद्गम उदयपुर जिले में स्थित गोगुन्दा की पहाडियो से होता है ।

➡️ उदयपुर में 13 किलोमीटर बहने के पश्चात यह नदी उदयसागर झील में गिरती है ।

नोट :- उदयसागर झील में गिरने से पूर्व इस नदी को आयड़ नाम से जाना जाता है । तथा उदयसागर झील के बाद इसे बेडच नाम से जाना जाता है । ➡️ चित्तौड़गढ़ जिले में इस नदी में गम्भीरी नदी आकर मिलती है ।

नोट :- मेसा के पठार पर स्थित प्रसिद्ध चित्तौड़गढ़ दुर्ग गम्भीरी तथा बेडच नदी के संगम पर स्थित है।

➡️ यह नदी भीलवाड़ा जिले में बीगोद कस्बे में बनास नदी में जाकर मिल जाती है । इस स्थान पर बनास, बेड़च एवं मेनाल का त्रिवेणी संगम स्थित है ।

नोट :- उदयपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध आहड़ सभ्यता इसी नदी के तट पर विकसित हुई है ।

गम्भीरी नदी :- इस नदी का उद्गम मध्यप्रदेश राज्य के रतलाम जिले के जावरा की पहाडियो से होता है ।

➡️ यह नदी चितौड़गढ़ जिले में बेड़च में जाकर विलीन हो जाती है । इसे चित्तौड़गढ़ की गंगा कहते है ।

खारी नदी :- इस नदी का उद्गम राजसमन्द जिले में स्थित बिजराल ग्राम की पहाडियो से होता है ।

➡️ यह नदी मेरवाड़ा (अजमेर) तथा उदयपुर की सीमा निर्धारित करती है । यहाँ ओजीयाना सभ्यता विकसीत हुई है।

➡️ आगे चलकर यह नदी टोक जिले के राजमहल नामक स्थान पर बनास नदी में मिल जाती है ।

नोट :- राजमहल (टोंक) नामक स्थान पर बनास, डाई और खारी नदी का त्रिवेणी संगम स्थित है । यहां शिव एवं सूर्य की संयुक्त प्रतिमा स्थित है जो मार्तण्ड भैरव मन्दिर या देवनारायण मन्दिर के नाम से जाना जाता है। यहाँ नारायण सागर बाँध स्थित है ।

कोठारी नदी :- इस नदी का उद्गम राजसमन्द जिले के देवगढ़ ग्राम के समीप दिवेर की पहाडियो से होता है । इस नदी पर भीलवाड़ा जिले में मेजा बाँध स्थित है, इससे भीलवाड़ा कस्बे को जलापूर्ति की जाती है ।

➡️यह नदी भीलवाड़ा जिले में बनास नदी में मिल जाती है ।

नोट :- भीलवाड़ा जिले में स्थित प्रसिद्ध बागौर सभ्यता कोठारी नदी के तट पर विकसित हुई है ।

माषी नदी :- इस नदी का उद्गम अजमेर जिले से होता है, तथा यह नदी टोंक जिले में बीसलपुर के समीप बनास नदी में विलिन हो जाती है ।

डाई नदी :- इस नदी का उद्गम अजमेर जिले के किशनगढ़ नसीराबाद के मध्य स्थित पहाडियो से होता है। यह नदी टोंक जिले में राजमहल कस्बे के समीप बनास में मिल जाती है ।

मानसी नदी :- इस नदी का उद्गम भीलवाड़ा जिले में करणगढ़ की पहाडियो से होता है । यह नदी भीलवाड़ा जिले में ही बनास में मिल जाती है।

मोरेल नदी :- इस नदी का उद्गम जयपुर जिले में चाकसु के समीप दूनी गाँव से होता है । यह नदी सवाई माधोपुर तथा जयपुर जिले की सीमा निर्धारित करती है । आगे चलकर यह नदी सवाई माधोपुर तथा दौसा जिले की सीमा निर्धारित करती है । अन्त में यह नदी सवाई माधोपुर के खण्डार कस्बे में त्रिवेणी संगम से लगभग 1 किलोमीटर पहले बनास में मिल जाती है।

ढूंढ़ नदी :- इस नदी का उद्गम जयपुर जिले में स्थित अचरोल की पहाडियो से होता है । यह नदी जयपुर तथा दौसा जिले में बहती हुई दौसा जिले की लालसोट तहसील के समीप मोरेल में मिल जाती है ।

बांड़ी नदी :- इस नदी का उद्गम जयपुर जिले में स्थित सामोद की पहाडियो से होता है । यह नदी माशी में विलीन हो जाती है ।

बाणगंगा नदी

➡️ बाणगंगा नदी का उद्गम जयपुर जिले में स्थित बैराठ की पहाड़ियों से होता है । इसकी कुल लम्बाई 380 किलोमीटर है ।

➡️ बाणगंगा नदी को अर्जुन की गंगा, ताला नदी, रूण्डित नदी के नाम से जाना जाता है ।

नोट :- यह एकमात्र ऐसी नदी है जिसके उद्गम स्थल से समापन स्थल तक कोई सहायक नदी नही है ।

➡️ प्राचीन बैराठ सभ्यता बाणगंगा नदी के तट पर स्थित है । जयपुर जिले में बाणगंगा नदी पर रामगढ़ बाँध बना हुआ है जिससे जयपुर शहर को जलापूर्ति की जा रही है । जयपुर तथा दौसा जिले में बहती हुई यह नदी भरतपुर के वैर नामक स्थान पर प्रवेश करती है।

नोट :- भरतपुर में इस नदी पर अजान बाँध बना हुआ है, जिससे घना पक्षी अभ्यारण्य को जलापूर्ति की जा रही है ।

➡️ अपने प्रवाह के अन्त में यह नदी आगरा के समीप फतेहबाद नामक स्थान पर जाकर यमुना में विलीन हो जाती है

नोट :- वर्तमान में इस नदी में जल की आवक कम होने से यह नदी भरतपुर के मैदान में ही विलीन हो जाती है । इसका जल अब यमुना तक नही पहुच पाता है इसलिये इस नदी को आन्तरिक प्रवाह प्रणाली वाली नदीयों की श्रेणी में शामिल किया गया है।

नोट :- बाणगंगा, चम्बल तथा गम्भीर राज्य की ऐसी नदीयाँ है जो सीधे अपना जल यमुना नदी को लेकर जाती है

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