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राजस्थान में पशु संसाधन (Rajasthan me Pashu Sansadhan) - gk website
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राजस्थान में पशु संसाधन (Rajasthan me Pashu Sansadhan)

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 राजस्थान में पशु संसाधन
(Animal Resources in Rajasthan)

https://haabuji.blogspot.com/2020/09/rajasthan-me-krashi-or-pashupalan.html
राजस्थान-में-पशु-संसाधन

राजस्थान में पशु गणना राजस्व मंडल, अजमेर द्वारा करवाई जाती है। यह प्रत्येक 5 वर्ष के अन्तराल पर होती है।
पहली पशुगणना 1919-20 में हुई थी।
18वीं पशुगणना 2007 के अनुसार राज्य का पशु घनत्व 169 पशुप्रति वर्ग किलोमीटर है ।
सर्वाधिक पशु घनत्व डूगरपुर (309) एवं न्यूनतम पशु घनत्व जैसलमेर (74) पशु प्रति किलोमीटर है ।
भेड़ की चोकला/छापर/ शेखावाटी (Chokla / Chhapar / Shekhawati) नस्ल को भारत की मेरीनों (Marine) कहते है । जबकि मगरा (Magara) नस्ल को बीकानेरी चोकला कहा जाता है ।
केन्द्रीय भेड़ एवं अन्य अनुसंधान केन्द्र की स्थापना भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा 1962 में अविकानगर (टोंक) में की गई ।
भेड़ व ऊन प्रशिक्षण संस्थान जयपुर में है । जबकि केन्द्रीय ऊन विकास बोर्ड की स्थापना 1967 में जोधपुर में की गई ।
सन् 1981-82 में स्विटरजर लैण्ड के सहयोग से बकरी विकास एवं चारा उत्पादन परियोजना शुरू की गई । इसके तहत अजमेर जिले के रामसर में बकरी फार्म स्थापित किया गया ।
कडकनाथ परियोजना 2008 में बांसवाड़ा में शुरू की गई, इस कार्यक्रम के तहत चयनित परिवार को 50 कडकनाथ प्रजाती के मुर्गे प्रदान किये गये।
राज्य के प्रथम पशु चिकित्सा एवं पशुविज्ञान महाविद्यालय की स्थापना 16 अगस्त 1954 को बीकानेर में की गई । इस प्रकार का दुसरा महाविद्यालय 2010-11 में जोधपुर में खोला गया ।
डॉ. वर्गीज कुरियन को भारत में श्वेत क्रान्ति का जनक माना जाता है ।
ऑपरेशन फ्लड़ (Operation flood) कार्यक्रम 5 वी. पंचवर्षीय योजना में लागु किया गया था।
राजस्थान राज्य डेयरी फेडरेशन की स्थापना 1977 में की गई ।
राज्य का प्रथम एवं एकमात्र दुग्ध विज्ञान महाविद्यालय 1978 में उदयपुर में स्थापित किया गया ।
हेल्प इन सफरिंग संस्था द्वारा राज्य का प्रथम ऊट अस्पताल बस्सी (जयपुर) में स्थापित किया गया ।
2003 की अपेक्षा 2007 में जिन पशुओं की कमी हुई – ऊँट, सुअर व घोड़ा तथा कुल पशुओं में वृद्धि हुई।
विश्व में पशुओं के आधार पर पहला स्थान – भारत
विश्व में पशुओं के आधार पर दूसरा स्थान – सं. रा. अमेरिका
भारत में ➡️1st – उत्तरप्रदेश, 2nd – राजस्थान
राजस्थान में ➡️1st – बाड़मेर, 2nd – उदयपुर
दुग्ध उत्पादन➡️1st – भारत, 2nd – डेनमाक्र
राजस्थान में ➡️1st – जयपुर, 2nd- अलवर
देशी मुर्गियां सर्वाधिक बांसवाड़ा में है।
गाय कृत्रिम गर्भाधान केन्द्र, बस्सी (जयपुर)
भैंस कृत्रिम गर्भाधान केन्द्र, बल्लभनगर (उदयपुर)
सूअर कृषि फार्म, अलवर
बतख चूजा केन्द्र, बांसवाड़ा
अश्व प्रजनन केन्द्र, बीकानेर
राजस्थान का एकमात्र दूग्ध विज्ञान महाविद्यालय
पक्षी विज्ञान महाविद्यालय, जयपुर
पशुविज्ञान महाविद्यालय, बीकानेर
1. गाय :- (Cow)
(A) गिर (Gir)उत्पत्ति स्थान – गिरिवन (गुजरात)
इसके बैल अजमेरा या रैण्डा कहलाते हैं।
राजस्थान में अजमेर, भीलवाड़ा किशनगढ़, चित्तौड़गढ़
दूग्ध के लिए प्रसिद्ध है।
(B) राठी (Rathi) – सर्वाधिक दुग्ध देने वाली नस्ल
साहीवाल व सिन्धी का मिश्रण है।
“राजस्थान की कामधेनू‘ । (Kamdhenu of Rajasthan)
(C) थारपारकर/मालाणी (Tharparkar / Malani)  मारवाड़ की राठी
विषम जलवायु को सहन करने वाली
जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, सांचोर
(D) नागौरी (Nagauri) –  सुहालक
उत्पत्ति स्थान – सुहालक क्षेत्र
मजबूत बैल, भारवाहक व चुस्त
कृषि हेतु उपयुक्त
नागौर व झुंझुनू
(E) सांचोरी/कॉकरेज (Sanchori / Cokerage) द्विप्रयोजन शील – सिरोही व जालौर (नेहड़ क्षेत्र)। 

लूणी नदी के किनारे वाला क्षेत्र (लवणीय)
(F) हरियाणवी (Haryanvi) हरियाणा के आसपास के क्षेत्र (7 जिले) दूग्ध उत्पादन हेतु प्रसिद्ध
(G) मालवी (Malvi) – कोठा, झालावाड़, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा (चन्द्रभागा पषुमेला) 
(H) मेवाती (Mevati)  मेवात क्षेत्र (अलवर)
विदेशी नस्ल
(1) जर्सी (Jersey) – सं. रा. अमेरिका
(2) हॉलिस्टन (Halliston) – हॉलेण्ड
(3) रेड डेन (Red den) – डेनमाक्र
2. भैंस :- (Buffalo)
(A) मुर्रा/खुण्डी (Murra / Khundi) सर्वाधिक दूग्ध

राजस्थान के अधिकांश क्षेत्रों में

(B) जाफराबादी (Jaffarabadi) सर्वाधिक वसा

अन्य नस्लें – भादवरी, नागपुरी, सुरती  

3. ऊँट :- (Camel)

सर्रा रोग 5th KAZARI केन्द्र लेह लद्दाख – ऊँटों हेतु

(A) नांचना (Nachana) जैसलमेर के नांचना गाँव में।

दिखने में सुन्दर व सवारी हेतु उपयुक्त

(B) गोमठ (Gomath) (बीकानेर) भारवाहक

2003 की अपेक्षा 2007 में ऊँटों की संख्या में कमी
अन्य नस्ले :- जैसलमेरी, फलौदी, बीकानेरी
4. भेड़ :- (Sheep)
मालपूरी (Malpuri) – टोंक (ऊन गलीचे के लिए प्रसिद्ध)
➥ अविकानगर (टोंक) 
➥ चोकला – भारतीय मेरिनो/शेखावटी 
➥ सर्वाधिक ऊन देने वाली 
➥ (शेखावटी क्षेत्र – सीकर, झुन्झुनू, चूरू) 
 नाली – श्री गंगानगर, हनुमानगढ़ (घग्घर नदी)
➥ लम्बी रेशे वाली ऊन 
➥ मगरा/चकरी – मांस हेतु प्रसिद्ध (जैसलमेर, बाड़मेर)
➥ सोनाड़ी/चनोथर – कान चरते समय जमीन को स्पर्श करते है । 
 डूंगरपूर, बांसवाड़ा, उदयपुर 
 मोटी ऊन प्राप्त होती है।

पूंगल – बीकानेर

मारवाड़ी – जोधपुर

➥ खेरी – जैसलमेर

5. बकरी :- (Goat)
नागौर के वरूण गांव की बकरियाँ विश्व प्रसिद्ध है।
➥ बकरी के मांस को चेवणी कहते हैं।
1. जमनापूरी (Jamnapuri) सर्वाधिक दूग्ध व मांस के लिये जानी जाती है । यह सर्वाधिक कोटा, बूंदी, झालावाड़ में पायी जाती है ।
2. लोही/मारवाड़ी (Lohi / Marwari) मांस के लिए जानी जाती है । यह दिखने में सुन्दर दिखती है । यह अत्यधिक मारवाड़ क्षेत्र में व सवाई माधोपुर, अलवर, करौली, टोंक आदि जिलों में पायी जाती है ।
3. जखराना/अलवरी (Jakharana / Alvaree) दूग्ध हेतु (अलवर)
4. सिरोही – मांस के लिए पाली जाती है। ऑस्ट्रेलिया से टोशन नस्ल के बकरे मंगा कर सिरोही नस्ल से Cross किया जाता है।

5. परबतसरी (Parbatsari) नागौर

राजस्थान में खरगोश (rabbit) प्रजनन केन्द्र – ऊंचा (चित्तौड़गढ़), मरमी के पास (राशमी)

(1) गोपाल योजना :- इस योजना की शुरूआत 2 अक्टूबर 1990 से दक्षिणी-पूर्वी राजस्थान के 10 जिलों से हुई। पशुओं की देखभाल हेतु प्रशिक्षित गोपालक तैयार करना इसका उद्देश्य था ।
(2) हिपर योजना :- बागड़ी में दूग्ध देने वाली गाय को हिपर कहते हैं। यह योजना Dungarpur जिले की है। प्रत्येक BPL परिवार को 2 हिपर गाय देना।
(3) एडमास योजना :- यह योजना भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, पूसा (New Delhi) के सहयोग से चलाई जा रही है। इसे पशुओं में रोग निदान हेतु चलाई गई ।
(4) अविका क्रेडिट कार्ड योजना :- भेड़ पालकों को क्रेडिट कार्ड/लोन देना, चारे और दवाइयों के लिए।

(5) अविका कवच योजना :- यह योजना भेड़ों का बीमा करना तथा जो भेड़ पालक रेवड़ चराते हैं उनके बच्चों हेतु। विद्यालय खोलना।

नोट :- आइबोमिक्स – इस औषधि से पशुओं के दुग्ध में आश्चर्यजनक वृद्धि होती है।

पशुआहार संयंत्र :- (पशुआहार – बांटा)

(1) जोधपुर

(2) लालगढ़ (बीकानेर)

(3) नन्दबई (भरतपुर)

(4) तबीजी (अजमेर)

(5) झोटवाड़ा (जयपुर)

राजस्थान की पहली दूग्ध डेयरी = पदमा डेयरी (अजमेर) (वर्तमान में सरस में विलय कर लिया गया है)

राजस्थान की सबसे बड़ी = रानीवाड़ा (जालौर)

दुग्ध उत्पादन में प्रथम जिला = (1) जयपुर (2) अलवर

सबसे कम – धौलपुर

राजस्थान की पहली दुग्ध उत्पादक समिति = इंदोरा, गंगरार (चित्तौड़गढ़)

भारत का विश्व में मछली (fish) उत्पादन में तीसरा स्थान है।

➥ भारतीय पश्चिमी तट छिछला होने से वहां मछली उत्पादन अधिक होता है।

प्रथम – USA, द्वितीय – JAPAN

मछली उत्पादन क्षेत्र

Grant Bank = USA

Dagar Bank = Europe

राजस्थान में मछली पालन क्षेत्र

(1) बड़ी तालाब – उदयपुर

(2) कानोता बांध – जयपुर

(3) बांसवाड़ा

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