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राजस्थान की वनस्पति (Rajasthan ki Vanaspati) - gk website
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राजस्थान की वनस्पति (Rajasthan ki Vanaspati)

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 राजस्थान की वनस्पति
(Flora of rajasthan)

https://haabujigk.in/2020/09/van-or-vany-jeev-sanrakshan.html
Rajasthan-ki-Vanspati

राज्य में पायी जाने वाली प्रमुख घास एवं वनस्पति
(Major grass and vegetation found in the state)

1.खेजड़ी (Khejadi) :- 31 अक्टूम्बर 1983 को खेजड़ी को राज्य वृक्ष घोषित किया गया ।
👉 उपनाम :- राजस्थान का गौरव तथा राजस्थान का कल्पवृक्ष ।
👉 खेजड़ी को पौराणिक ग्रन्थों में शमी, राजस्थानी में शिमलों, सिन्धी में छोकड़ो, तमिल में पेयमेंय, तथा कन्नड़ में बत्री कहा जाता है ।
👉 खेजड़ी की पत्तियों को लूम तथा इसकी फलियों को सांगरी कहा जाता है ।
👉 विजयदशमी के दिन खेजड़ी की पूजा की जाती है । खेजड़ी को शीतला माता का प्रतीक भी माना जाता है
👉 खेजड़ी वृक्ष को बचाने हेतु ऑपरेशन खेजड़ा (Operation Khejda) नामक कार्यक्रम 1991 में प्रारम्भ किया गया ।
👉 12 सितम्बर 1978 को प्रथम खेजड़ली दिवस मनाया गया । इसका वैज्ञानिक नाम प्रोसेसिस सिनेरेरिया (Processis cinerea) है ।
2. रतनजोत/जेट्रोफा (Ratanjot / Jatropha) :- रतनजोत से बायोडिजल का निर्माण किया जाता है । देश में सर्वप्रथम आन्ध्रप्रदेश प्रान्त के नाल गोड़ा क्षेत्र में जेट्रोफा सयन्त्र स्थापित किया गया ।
👉 राजस्थान में प्रथम बायोडिजल बायोफ्यूअल संयंत्र उदयपुर जिल के कडमवल क्षेत्र में स्थापित किया गया ।
3. होहोबा/जोजोबा (Hohoba / Jojoba) :- यह मूल रूप से अमेरिका के एरिजोना मरूस्थल (Arizona desert) का पौधा है । इसे 1956 में इजराईल से राजस्थान में लाया गया ।
👉 राजस्थान में सर्वप्रथम इसे काजरी (Kajari) परिसर में स्थापित किया गया ।
👉 इसका प्रयोग हवाईजहाजों के ईंधन के रूप में किया जाता है । साथ ही सौन्दर्य प्रसाधन में भी इसका प्रयोग किया जाता है ।
4. बाँस (Bamboo/Baans) :- यह विश्व की सबसे बड़ी घास है, जो कि राज्य में 80 सेमी. से अधिक वर्षा वाले क्षेत्र में पाई जाती है । वर्ष 2006-2007 में केन्द्र सरकार द्वारा राज्य के दक्षिणी व पूर्वी भाग के 12 जिलों में राष्ट्रीय बांस कार्यक्रम की शुरूआत की गई । इसे आदिवासियों का हरा सोना कहते है ।
5. दशमक चेती गुलाब (Decadent Cheti Rose) :- राज्य में दशमक चेती गुलाब की खेती पुष्कर तथा खमनौर में की जाती है ।
नोट :- गुलाब उत्पादन के कारण जमुवा रामगढ़ को “ढुढ़ाड़ का पुष्कर” कहा जाता है ।

6. खैर (Khair) :- राज्य के 80 सेमी. वर्षा वाले क्षेत्र में खैर वृक्ष पाया जाता है |कथौड़ी जाती के लोग हांडी प्रणाली द्वारा इससे कत्था तैयार करते है ।

7. शहतुत (Mulberry/Shahtoot) :- यह एक रेशम कीट पालन वृक्ष है । राज्य सरकार द्वारा उदयपुर, कोटा तथा बांसवाड़ा जिले में टसर विकास कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है ।

8. रोहिड़ा (Rohida) :- राज्य सरकार द्वारा इसे 31 अक्टूम्बर 1983 को राज्य पुष्प घोषित किया गया इसका वैज्ञानिक नाम टीकोमेला अन्डूलेटा (Ticomella undulata) है ।

👉 उपनाम राजस्थान का सागवान, मारवाड़ की टीक, मरूस्थल की मरूशोभा है | यह मुख्य रूप से पश्चिमी राजस्थान में पाया जाता है ।

9. डाब या दूब घास (Pressure or grass) :- यह घास सम्पूर्ण राजस्थान में पायी जाती है । इसका उपयोग धार्मिक अवसर पर ग्रहण के समय किया जाता है |

10. धमासा (Dhamasha) :- यह घास राज्य के जयपुर, दौसा जिले में पायी जाती है । यह घास मिट्टी की लवणता को कम करती है ।

11. धामण (Dhaman) :- यह घास शुष्क मरूस्थल क्षेत्र में मुख्य रूप से जैसलमेर जिले में पायी जाती है |

12. सुंघनी (Sunghani) :- यह घास जैसलमेर जिले में पायी जाती है । इस घास से सुगन्धित तेल प्राप्त होता है ।

13. बूरी (Buree) :- यह घास राज्य के बीकानेर जिले में पायी जाती है ।

14. खस (Khas) :- यह घास टोंक, भरतपुर तथा सवाईमाधोपुर जिले में पायी जाती है । इत्र तथा ठण्डाई बनाने में इस घास का प्रयोग किया जाता है ।

15. जामुन (Jamun) :- यह घास माउन्ट आबू में मुख्य रूप से पायी जाती है । इसका उपयोग मधुमेह रोग (Diabetes disease) में किया जाता है।

16. सेवण (Sevan) :- इस घास का वेज्ञानिक नाम लसियूरूस सिड़ीकुस (Lasiurus sidicus) है । यह घास जैसलमेर के लाठी सीरीज में पायी जाती है । इसका कटा हुआ रूप लीलोण कहलाता है ।

17. महुआ (Mahua) :- शराब निर्माण में प्रयोग होता है । इसे “आदिवासियों का कल्पवृक्ष” कहा जाता है |

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