राजस्थान की मीठे पानी की झीलें (Rajasthan ki meethe pani ki jheele)

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Meethe pani ki Jheele


राजस्थान की मीठे पानी की झीलें

(Rajasthan’s freshwater lakes)

पुष्कर झील (Pushkar Lake)

राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 89 पर अजमेर शहर से 11 किलोमीटर दूर पुष्कर नामक स्थान पर राज्य की प्रसिद्ध झील स्थित है ।

माना जाता है कि इस झील का निर्माण पुष्करणा ब्राह्मणों द्वारा करवाया गया था । इस कारण इस झील का नाम पुष्कर पड़ा ।
यह झील राज्य की सबसे पवित्र व प्राकृतिक झील है ।
इस झील का निर्माण ज्वालामुखी से होने के कारण इसे कॉल्डेरा झील भी कहा जाता है ।
इस झील के तट पर प्रसिद्ध ब्रह्माजी का मन्दिर स्थित है, माना जाता है कि ब्रह्मा मन्दिर में मूर्ति आद्य गुरू शंकराचार्य द्वारा स्थापित की गई थी।
ब्रह्माजी के वर्तमान मन्दिर का निर्माण गोकुल चन्द पारीक द्वारा करवाया गया ।
उपनाम :- तीर्थों का मामा, प्रयागराज का गुरू, सबसे पवित्र व प्रदूषित झील, बावनघाटा, हिन्दुओं का पाँचवा तीर्थ, कोंकण तीर्थ आदि ।
कार्तिक मास की पूर्णिमा को प्रसिद्ध मेला लगता है ।
कालिदास ने अपने ग्रन्थ अभिज्ञान शाकुन्तलम की रचना इसी झील के तट पर की थी ।
वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत/गिता की रचना भी इसी झील के तट पर हुई थी ।
कौरव-पांडव का दिव्य मिलन भी यहीं हुआ था ।
भगवान राम ने अपने पिता दशरथ का पिण्डदान यही पर किया था ।
इसी झील के तट पर गुरू विश्वामित्र की तपस्या इन्द्र की अप्सरा मेनका द्वारा भंग की गई थी ।
इसी झील के तट पर प्रसिद्ध वराह मन्दिर स्थित है, जिसका निर्माण अर्णोराज (आना जी) द्वारा कराया गया था ।
इसी झील के तट पर द्रविड़ शैली में निर्मित रंगाजी, रंगनाथजी, बैकुण्ठ मन्दिर स्थित है । इसी झील के समीप रतन गिरी पर्वत पर गायत्री मन्दिर स्थित है ।

नोट :- इस झील के समीप आमेर के मानसिंह प्रथम द्वारा निर्मित मान पेलैस स्थित है । वर्तमान में यहाँ मान पैलेस होटल संचालित किया जा रहा है ।

इस झील के आस-पास छोटे-बड़े लगभग 400 मन्दिर स्थित है । इस कारण पुष्कर को मन्दिर की नगरी भी कहते है।

इस झील को सर्वाधिक बार नुकसान मुगल बादशाह ओरंगजेब द्वारा पहुचाया गया था ।

सन् 1705 में गुरू गोविन्द सिंह इस झील के किनारे गुरू ग्रन्थ साहिब का पाठ किया था । सन् 1809 में इस झील का पुनरूद्धार मराठों द्वारा करवाया गया था ।

इस झील पर छोटे-बड़े 52 घाट स्थित है, माना जाता है कि इन 52 घाटों का निर्माण 944 ईस्वी में नाहर राव परमार द्वारा करवाया गया था ।

इस झील के तट पर सन् 1911 में ब्रिटिश महारानी मेरी कविन द्वारा महिलाओं के लिये स्नान हेतु पृथक रूप से स्नानागार का निर्माण कराया गया । इस घाट पर महात्मा गाँधी की अस्थियाँ विर्सजित की गई थी । इस कारण वर्तमान में इस घाट को गाँधी घाट भी कहा जाता है ।

प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा को विशाल मेले का आयोजन होता है । यह मेला राजस्थान का सबसे बड़ा रंगीन मेला है

जयसमन्द झील (Jaisamand Lake)

राज्य के उदयपुर जिले में स्थित जयसमन्द झील का निर्माण गौमती नदी पर बाँध बना कर 1685 से 1691 के मध्य तत्कालीन शासक जयसिंह द्वारा करवाया गया ।

यह झील एशिया की दूसरी तथा राजस्थान की प्रथम मीठे पानी की सबसे बड़ी तथा कृत्रिम झील है, इस झील पर छोटे-बड़े कुल सात टापू स्थित है, जिन पर भील तथा मीणा जाती के लोग निवास करते है |

इस झील पर स्थित सबसे बड़ा टापू बाबा का भांगड़ा है, जबकि सबसे छोटा टापू प्यारी है । इस झील के एक टापू का नाम बाबा का मंगरा है, जिस पर वर्तमान में आइसलैण्ड रिसोर्ट नामक होटल संचालित किया जा रहा है ।

इस झील से सिंचाई हेतु श्याम पुरा तथा भाट नामक दो नहरें निकाली गई है । इन दोनों नहरों की कुल लम्बाई 324 किलोमीटर है ।

इस झील के तट पर नर्बदेश्वर शिवालय, चित्रित हवामहल तथा रूठी रानी का महल स्थित है ।

राजसमन्द झील (Rajsamand Lake)

राजसमन्द झील राज्य की दूसरी सबसे बड़ी मीठे पानी की कृत्रिम झील है । यह 6.5 किलोमीटर लम्बी तथा 3 किलोमीटर चौड़ी इस झील का निर्माण 1662 से 1676 के मध्य तत्कालीन शासक राज सिंह द्वारा करवाया गया ।

राजसमन्द झील के तट पर एशिया की सबसे बड़ी प्रशस्ति राज प्रशस्ति 25 बड़े शिलालेखों पर उत्कीर्ण है।

राज प्रशस्ति की रचना राज सिंह के दरबारी कवि रणछोड़ भट्ट तैलंग द्वारा की गई । संस्कृत भाषा में उत्कीर्ण इस प्रश्स्ति पर कुल 1917 श्लोक उत्कीर्ण है ।

राजसमन्द झील के तट पर प्रसिद्ध द्वारिकाधीश मन्दिर स्थित है, यही पर वल्लभ सम्प्रदाय की पीठ स्थित है, यहां का अन्नकुट महोत्सव भी प्रसिद्ध है । राजसमन्द झील के तट पर बिना पति के सती होने वाली घेवर माता का मन्दिर स्थित है ।

इस झील को “राजसमुद्र” भी कहा जाता है ।

राज्य सरकार ने इस झील को सबसे पवित्र झील घोषित किया है । यह राज्य की एकमात्र ऐसी झील है जिसके नाम पर किसी जिले का नामकरण हुआ है ।

पिछोला झील (Pichola Lake)

पिछोला झील राज्य के उदयपुर जिले में स्थित है । पिछोला झील का निर्माण चौहदवीं सदी (1387) में राणा लाख के काल में पिच्छ / छितर नामक चिड़िमार बंजारे ने बैल की स्मृति में निर्माण था

पिछोला झील उदयपुर की सबसे प्राचीन व सबसे सुन्दर झील है । सन् 1525 में राणा सांगा ने पिछोला झील का जिर्णोद्धार करवाया था। इस झील की पाल को पक्का कराने का श्रेय उदय सिंह को जाता है ।

पिछोला झील के तट पर जग मन्दिर स्थित है, जिसका निर्माण सन् 1621 में करण सिंह द्वारा प्रारम्भ करवाया गया था, तथा इसे पूरा कराने का श्रेय सन् 1651 में जगत सिंह को जाता है ।

नोट :- 1857 की क्रान्ति के समय अंग्रेजों ने यहां शरण ली थी, तथा खुर्रम (शाहजहां) ने भी अपने विद्रोही दिनों में यहां शरण ली थी ।
इसी झील के तट पर जगनिवास स्थित है जिसका निर्माण सन् 1745 में मेवाड़ के तत्कालीन शासक जगत सिंह द्वितीय द्वारा करवाया गया था । पिछोला झील के समीप बिजारी नामक स्थान पर गलनी/नटनी का चबुतरा स्थित है । पिछोला झील के तट पर अमर चन्द बंडवा द्वारा निर्मित बागौर की हवेलियां स्थित है, जहां पर विश्व की सबसे बड़ी पगड़ी रखी हुई है ।
भारत की पहली सौर ऊर्जा चलित नाव पिछोला झील में चलाई गई।
पिछोला झील के तट पर महाराणा प्रताप ने मानसिंह प्रथम के लिये रात्रिभोज का आयोजन किया था।
पिछोला झील के तट पर उदय सिंह द्वारा निर्मित राजमहल/सिटी पैलेस स्थित है ।

नोट :- इतिहासकार फर्ग्युसन ने उदयपुर स्थित राजमहलों की तुलना लंदन में स्थित विडसर महलों से की है।

जगनिवास महलों को देखकर ही शाहजहाँ को ताजमहल बनाने की प्रेरणा मिली थी ।

नक्की झील (Nakki Lake)

यह झील राज्य के सिरोही जिले के माउन्ट आबू नामक स्थान पर स्थित है । ऐसा माना जाता है कि नक्की झील की निर्माण देवताओं ने अपने नाखूनों से खोद कर करवाया था, इस कारण इस झील को नक्की झील कहा जाता है ।

यह क्रेटर से बनी झील है ।

यह राज्य की सर्वाधिक ऊँचाई (1200 मीटर) पर स्थित झील है । यह राज्य की एकमात्र जमने वाली तथा सबसे गहरी झील है ।

राज्य का एक मात्र हिल स्टेशन इसी झील के किनारे स्थित है । इस झील पर नन्दी रॉक, (नादिया) के आकार की चट्टान व टॉड रॉक (मेढ़क के आकार के समान), तथा नन् रॉक (घुघट निकाले स्त्री के समान), की चट्टान, हाथी गुफा, चम्पा गुफा, राम झरोखा स्थित है ।

राज्य का सनसेट प्वाईंट व हनीमून प्वाईंट यही पर स्थित है तथा इसी झील के तट पर हनीमून नामक चट्टान पर प्रसिद्ध रघुनाथ जी का मन्दिर स्थित है ।

फतह सागर झील (Fatah Sagar Lake)

यह झील राज्य के उदयपुर जिले में स्थित है । सन् 1678 में ड्यूक ऑफ कनॉट द्वारा इस झील की नीव रखी गई। इस कारण इस झील को कनॉट बाँध भी कहा जाता है ।
यह झील पिछोला झील के देवाली नामक गाँव में स्थित है । सन् 1688 में इस झील का निर्माण मेवाड़ के तत्कालीन महाराणा जयसिंह द्वारा करवाया गया । इस झील का पूर्नरूद्धार सन् 1888 में महाराणा फतह सिह द्वारा करवाया गया । इस कारण इस झील को फतह सागर झील कहा जाता है ।
इस झील के समीप मोती का मंगरा नामक पहाड़ी पर महाराणा प्रताप का स्मारक बना हुआ है।
इस झील के एक टापू पर नेहरू उद्यान स्थित है ।
इस झील के तट पर उदय सिंह द्वारा उदयपुर की स्थापना से पूर्व निर्मित मोती महल स्थित है ।
इस झील के तट पर भारत की प्रथम सोर वेद्यशाला सन् 1975 में अहमदाबाद की एक संस्थान द्वारा स्थापित की गई, जिसे वर्ष 1981 में अंतरिक्ष विभाग से जोड़ गया ।
नोट :- मौसम की सटीक गतिविधियों का पता लगाने हेतु इस झील के तट पर टेलिस्कोप नामक यंत्र स्थापित किया जावेगा, जिसका निर्माण वर्तमान में बेल्जियम में किया जा रहा है ।

आनासागर झील (Anasagar Lake)

राज्य के अजमेर जिले में स्थित आनासागर झील का निर्माण सन् 1137 में आना जी द्वारा करवाया गया ।

आनासागर झील के तट पर जहांगीर द्वारा निर्मित दौलत बांग स्थित है जिसे वर्तमान में सुभाष उद्यान भी कहा जाता है।

सुभाष उद्यान नामक स्थान पर जहांगीर ने सर्वप्रथम सर टामस रो से वार्ता की थी तथा नूरजहां की माँ असमत बेगम द्वारा गुलाब से इत्र बनाने की विधि का आविष्कार किया । जहांगीर द्वारा निर्मित चश्मा ए नूर नामक झरना यही स्थित है । जिसके वर्तमान में खण्डहर उपलब्ध है । रूठी रानी का महल या जहांगीर की बेगम नूरजहाँ का महल स्थित है।

आनासागर झील के तट पर सन् 1627 को शाहजहाँ द्वारा निर्मित बारहदरी स्थित है ।

तुर्कों की सेना में नरसंहार के बाद खून से रंगी धरती को साफ करने के लिये इस झील का निर्माण 1137 में अर्णोराज द्वारा करवाया गया ।

कोलायत झील (Kolayat Lake)

राज्य के बीकानेर जिले में स्थित इस झील को मरूस्थल का शुष्क उद्यान कहा जाता है ।

इस झील के तट पर साख्य दर्शन के प्रणेता कपिल मुनि का आश्रम स्थित है ।

ऐसा माना जाता है कि कपिल मुनि ने अपनी माता की मुक्ति के लिये यहां पाताल गंगा निकाली थी, इस कारण इसमें स्नान करने का महत्व गंगा के महत्व के बराबर है। यहाँ दीपदान की अनोठी परम्परा है।

इस झील के तट पर कपिल मुनि का मन्दिर स्थित है, जहां प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा को विशाल मेला आयोजित होता है।

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