मध्यकाल व आधुनिक काल में महिलाओं का योगदान (Rajasthan Ki Mahilaon Ka yogadan) (Women’s contribution)

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 मध्यकाल व आधुनिक काल में महिलाओं का योगदान
(Contribution of women in medieval and modern times)

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लक्ष्मी कुमारी चुण्डावत
(Lakshmi Kumari Chundavat)

✔️ इन्हे रानी जी नाम से भी जाना जाता है । इनका जन्म 1916 में मेवाड़ के देवगढ़ ठिकाने में हुआ। इनका विवाह रावतसर के तेजसिंह के साथ हुआ। इनका कला, साहित्य व संस्कृति में विशेष योगदान रहा है ।
✔️ इन्होने अपने जीवनकाल में 35 पुस्तकों का प्रणयन (विमोचन) किया जिनमें प्रमुख पाबूजी री वातां, हुँकार दो सा, टाबरां री वातां, लव स्टोरी ऑफ राजस्थान, अमलोक वातां, मूमल, के रे चकवा बात आदि प्रमुख है ।
✔️ इनका राजनैतिक क्षेत्र में 11 वर्ष तक राज्य विधान सभा सदस्य तथा 1972 से 1978 तक राज्य सभा सदस्य के रूप में बनी रही ।
नोट :- लक्ष्मी कुमारी चुण्डावत ने 1978 में न्यूयॉर्क में आयोजित निःशस्त्रीकरण सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

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नारायणी देवी वर्मा
(Narayani Devi Verma)

✔️ इनका जन्म 1902 में मध्यप्रदेश में हुआ। इनका विवाह माणिक्य लाल वर्मा के साथ हुआ । माणिक्य लाल वर्मा बिजौलिया ठिकाने में नौकरी करते थे ।
✔️ सन् 1934 में खाण्डलाई आश्रम डूंगरपुर में स्थापित किया ।
✔️ सन् 1939 में इन्होने मेवाड़ प्रजामण्डल में सक्रिय रूप से भाग लिया । इनको गिरफ्तार कर लिया गया । इन्होने 6 माह से अधिक अपनी पुत्री स्नेहलता वर्मा के साथ जेल में बिताये ।

✔️ सन् 1943 में इन्होने भीलवाड़ा में एक महिला आश्रम स्थापित किया । 12 मार्च 1947 को इनका निधन हो गया ।

रत्ना शास्त्री
(Ratna Shastri)

✔️ इनका जन्म 1912 में मध्यप्रदेश में हुआ। इनका विवाह हीरा लाल शास्त्री के साथ हुआ । इनकी प्रारम्भिक शिक्षा – रतलाम में हुई ।

✔️ इन्होने जयपुर प्रजामण्डल में सक्रिय भूमिका अदा की ।

नोट :- इन्होने बिहार के प्रसिद्ध क्रान्तिकारी जगलाल चौधरी को शरण प्रदान की थी ।

✔️ स्वतन्त्रता के उपरान्त इन्हे पद्मश्री, पदम् विभूषण तथा जमना लाल बजाज पुरस्कार से सम्मानित किया गया ।

✔️ इन्होने अपनी पुत्री शान्ता बाई की मृत्यु पर शान्ता बाई जीवन कुटीर नामक संस्था की स्थापना की इसे वर्तमान में वनस्थली विद्यापीठ (टोंक) के नाम से जाना जाता है ।

झलकारी बाई
(Jhalkari Bai)

✔️ राजस्थान का कोली समाज की बालिका ने सन् 1857 की क्रान्ति के समय रानी लक्ष्मी बाई के स्थान पर उसका वेश धारण करके युद्ध किया ।

हाड़ी रानी जसवन्त दे
(Hadi Rani Jasavant De)

✔️ जोधपुर शासक जसवन्त सिंह की पत्नी हाड़ी रानी जसवन्त दे ने जब राजा जसवन्त सिंह धरमत के युद्ध में घायल होकर लौटे तो उनकी पत्नी जसवन्त दे ने दुर्ग के दरवाजे नही खोले । जसवन्त सिंह द्वारा यह कहने पर कि हम विजयी होकर लोटे है इसी के उपरान्त रानी ने दरवाजे खोले तथा जसवन्त दे ने जसवन्त सिंह को चांदी के बर्तनों के स्थान पर लकड़ी के बर्तनों में भोजन कराया। जसवन्त दे का कथन है कि “राजपूत युद्ध में या तो विजयी होकर लौटते है, या मरकर”

धीर बाई
(Dheer Bai)

✔️ जैसलमेर के भाटी राजवंश की पुत्री धीर बाई जिसे इतिहास में भटीयाणी रानी के नाम से जाना जाता है के विवाह मेवाड़ के शासक उदय सिंह के साथ हुआ था । उदय सिंह ने अपनी इसी रानी के प्रभाव में आकर महाराणा प्रताप के स्थान पर जगमाल को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया ।

हाड़ी रानी
(Hadi Rani)

✔️ इसका मूल नाम सलह कंवर था । इनका जन्म बूंदी के जागीरदार संग्रामसिंह के घर में हुआ तथा इनका विवाह सलुम्बर के ठाकुर रतन सिंह चुण्डावत से हुआ । रतन सिंह मेवाड के तत्कालीन शासक राजसिंह की सेना में थे, जब औरंगजेब की सेना द्वारा मेवाड़ पर आक्रमण का खतरा मंडरा रहा था ऐसे समय में राजसिंह ने रतन सिंह को बुलावा भेजा ।

✔️ हाड़ी रानी ने युद्ध भूमि में जाते समय रतन सिंह चुण्डावत द्वारा निशानी मांगे जाने पर अपना शीश काटकर दे दिया था ।

नोट :- मेघराज मुकूल ने हाड़ीरानी पर “सेनाणी” नामक कविता लिखी है । जिसका शीर्षक है “चुण्डावत मांगी सेनाणी, सिर काट दियो क्षत्राणी”

गुलाब राय
(Gulab Rai)

✔️ जोधपुर महाराजा विजय सिंह की पासवान रानी गुलाबराय को कविराज श्यामल दास ने अपने ग्रन्थ “वीर विनोद” में “मारवाड़ की नूरजहाँ” नाम से संबोधित किया है ।

इन्दुमति गोयनका
(Indumati goenka)

✔️ यह राजस्थान की मूल निवासी है, वर्तमान में कलकत्ता में है ।

✔️ सन् 1930 में सविनय अवज्ञा आन्दोलन के दौरान गिरफ्तार होने वाली राजस्थान की प्रथम महिला है, इन्हे बंगाल से गिरफ्तार किया गया था ।

यशोदा देवी
(Yashoda devi)

✔️ यह राजस्थान विधानसभा की प्रथम महिला सदस्य है । सन् 1953 में बांसवाड़ा विधानसभा उपचुनाव के दौरान विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुई।

कमला बेनीवाल
(Kamala Beniwal)

✔️ झुन्झुनूं जिले की मूल निवासी कमला बेनीवाल राज्य की प्रथम महिला मंत्री है ये 1954 में मंत्रीपद पर निर्वाचित हुई, यह राज्य की प्रथम उपमुख्यमंत्री भी रही है ।

✔️ यह राज्य की प्रथम ऐसी महिला है जो किसी अन्य राज्य की राज्यपाल बनी है ।

वसुन्धरा राजे सिन्धिया
(Vasundhara Raje Scindia)

✔️ राजस्थान की प्रथम महिला मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे प्रथम बार 1989 में झालावाड़ से लोकसभा सदस्य चुनी गई। 12वीं विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ तथा 8 दिसम्बर 2003 को वसुन्धरा राजे राज्य की प्रथम महिला मुख्यमंत्री बनी ।

नोट :- यह राज्य की ऐसी मुख्यमंत्री है जिसका जन्म दिवस अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के दिन अर्थात 8 मार्च को आता है ।

नोट :- टीकाराम पालीवाल ऐसे मुख्यमंत्री है जिनका जन्मदिन पंचायतीराज दिवस के दिन अर्थात 24 अप्रेल को आता है।

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शारदा भार्गव
(Sharda Bhargava)

✔️ राजस्थान की प्रथम महिला जो राज्य सभा हेतु चुनी गई ।

गायत्री देवी
(Gayatri Devi)

✔️ राजस्थान की प्रथम महिला जो लोकसभा हेतु निर्वाचित हुई । इनका जन्म बिहार में हुआ ये कुचबिहार की राजकुमारी थी । सन 1940 में इनका विवाह जयपुर के तत्कालीन महाराजा मानसिह द्वितीय के साथ हआ। इनका बचपन का नाम आयशा था । इन्होने जयपुर में महिला गायत्री देवी स्कूल स्थापित किया । ये प्रसिद्ध अभिनेत्री एवं सुन्दरी रही है।

उषा देवी मीणा
(Usha Devi Meena)

✔️ ये राजस्थान की प्रथम अनुसूचित जनजाती महिला है जो लोकसभा हेतु निर्वाचित हुई । इन्होने 1996 में सवाई माधोपुर संसदीय क्षेत्र से चुनाव जीता था ।

सुशीला बागरू
(Susheela Bagru)

✔️ ये राजस्थान की प्रथम अनुसूचित जाती की महिला है जो 2004 में जालौर संसदीय क्षेत्र से लोकसभा हेतु निर्वाचित हुई ।

प्रतिभा पाटिल
(Pratibha Patil)

✔️ इनका जन्म 9 दिसम्बर 1934 को महाराष्ट्र प्रान्त के जलगाँव में हुआ । इनका विवाह छोटी लोसल (सीकर) के देवी सिंह शेखावत के साथ हुआ । सन् 1962 ये महाराष्ट्र विधानसभा हेतु निर्वाचित हुई । ये राजस्थान की प्रथम महिला राज्यपाल तथा देश की प्रथम महिला राष्ट्रपति है ।

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महिलाओं से सम्बन्धित महत्वपूर्ण तथ्य

✔️ प्रथम महिला पत्रकार राजस्थान की कमला देवी है । अजमेर निवासी रीमा दत्ता को राजस्थान की जलपरी कहा जाता है । योगिता शर्मा तथा अस्मिता काला का सम्बन्ध भवाई नृत्य से है, ये दोनों जयपुर निवासी है। उदयपुर निवासी भक्ति शर्मा का संबंध तैराकी से है, ये राज्य की प्रथम महिला है जिन्होने इंग्लिश चैनल तैर कर पार कियाशगुन चौधरी तथा भुवनेश्वरी कुमारी का संबंध निशानेबाजी से है। ये दोनों जयपर से है ।
✔️ राजस्थान की लता के नाम से विख्यात सीमा मिश्रा का सम्बन्ध दौसा से है ।
✔️ मानवाधिकार आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा का सम्बन्ध बूंदी जिले से है ये राज्य की प्रथम महिला है जो राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की अध्यक्ष बनी
✔️ राज्य की प्रथम महिला विधानसभा उपाध्यक्ष तारा भण्डारी है । राज्य की प्रथम महिला विधानसभा अध्यक्ष सुमित्रा सिंह है । राज्य की प्रथम महिला मुख्य सचिव कुशाल सिंह है ।
✔️ वर्तमान में राज्य मानवाधिकार आयोग की अध्यक्ष लाड़ कुमारी जैन है।
✔️ जावरा (म.प्र.) में जन्मी जानकी देवी बजाज का विवाह 1902 में जमना लाल बजाज के साथ हुआ था । जानकी देवी बजाज ने 1933 में कलकत्ता में आयोजित अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन की अध्यक्षता की थी । 1956 में इन्हे भारत सरकार द्वारा पद्म विभूषण से नवाजा गया था । इस सम्मान (पद्म विभुषण) से सम्मानित होने वाली ये राज्य की प्रथम महिला व व्यक्ति थी । इन्होने अपनी आत्मकथा “मेरी जीवन यात्रा” के नाम से लिखी है ।
✔️ बूंदी के प्रसिद्ध स्वतन्त्रता सैनानी नित्यानन्द नागर की पुत्रवधु सत्यभामा को गाँधीजी का मानस पुत्री के रूप में जाना जाता है ।
✔️ स्वतन्त्रता सैनानी हरदयाल सिंह की पत्नी किशोरी देवी ने 25 अप्रेल 1934 को कटराथल (सीकर) में हुए महिला सम्मेलन की अध्यक्षता की थी। इस सम्मेलन में दस हजार से अधिक जाट महिलाओं ने भाग लिया था।
✔️ डॉ गिरिजा व्यास केन्द्रीय मंत्री मण्डल में शामिल होने वाली प्रथम महिला है इन्हे जून 1991 में पी.वी. नरसिम्हा राव मंत्रीमण्डल में उपमंत्री बनाया गया था ।
✔️ 19 जून 1947 को डूगरपुर जिले के रास्तापाल गाँव में जन्मी 12 वर्षीय भील बालिका काली बाई ने अपने गुरू को बचाने हेतु अपना बलिदान कर दिया ।
✔️ राणा सांगा (संग्राम सिंह प्रथम) की पत्नी रानी कर्मावती के समय 1534 में गुजरात के बहादुरशाह ने आक्रमण किया था । विक्रमादित्य एवं उदय सिंह इसी के पुत्र थे ।
✔️ पृथ्वीराज चौहान तृतीय की माता का नाम कपुरी देवी था ।

✔️ महाराणा प्रताप की माता जयवन्ता बाई था एवं महाराणा प्रताप की पत्नी का नाम अजबदे पंवार था । पन्नाधाय जो ना केवल मेवाड़ के इतिहास में बल्कि पुरे भारत में अपने त्याग बलिदान एंव स्वामी भक्ति कर्तव्य परायणता के लिये अमर है । उसने अपने पुत्र चन्दन की बलि देकर उदय सिंह की बनवीर से रक्षा की थी । पन्नाधाय चित्तौड़गढ़ के पाण्डोली की रहने वाली थी ।

✔️ महाराणा प्रताप की माता का नाम जयन्ता बाई था, जो कि पाली के अखैराज सोनगरा की पुत्री थी । महाराणा प्रताप की पत्नी का नाम अजबदे पँवार था ।

✔️ रसकपुर आमेर के राजा सवाई जगत सिंह का रसकपुर के प्रति विशेष अनुराग था इस कारण जगतसिंह को “जयपुर के बदनाम शासक” के रूप में जाना जाता है । जगतसिंह ने रसकपुर नाम से सिक्के चलाये थे ।

✔️ अनारा बेगम मारवाड़ शासक गजसिंह की पासवान रानी थी । इसी के प्रभाव में आकर राजसिंह ने अमर सिंह के स्थान पर जसवन्त सिंह को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया था ।

✔️ कर्पूरी देवी पृथ्वीराज तृतीय की माता थी जब पृथ्वीराज की आयु मात्र 11 वर्ष थी तो ऐसी स्थिती में कर्पूरीदेवी ने सेनापति भुवनमल्ल एवं प्रधानमंत्री कदम्बास की सहायता से एक वर्ष शासन किया था ।

✔️ प्रीमल दे डूगरपुर महाराजा आसकरण की महारानी थी जिसने डूगरपुर में नौलखा बावड़ी का निर्माण करवाया था ।

✔️ काली बाई डूगरपुर जिले के रास्तापाल गाँव की निवासी थी । कालीबाई द्वारा अपने गुरूजी को बचाने के प्रयास में 18 जून 1947 को अंग्रेजों ने कालीबाई को गोलियों से छलनी कर दिया था ।
✔️ जानकी देवी बजाज जमना लाल बजाज की पत्नी थी । भारत सरकार द्वारा इन्हे 1956 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था । इस सम्मान से सम्मानित होने वाली वह राज्य की प्रथम महिला एवं प्रथम व्यक्तित्व थी । जानकी देवी बजाज ने 1933 में कलकत्ता में हुए अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन की अध्यक्षता की थी ।
✔️ खेतु बाई वेद मेधाराम जी की बहिन थी, एवं मणीबहन पण्ड्या भोगीलाल पण्ड्या की धर्मपत्नी थी ।
✔️ श्रीमति सत्यभामा को गाँधीजी की मानस पुत्री कहा जाता है । यह बूंदी के स्वतत्रता सैनानी नित्यानन्द नागर की पुत्रवधु थी ।
✔️ नगेन्द्र बाला केसरी सिंह बारहठ की पौत्री थी । इन्हे राज्य की प्रथम महिला जिला प्रमुख होने का गौरव प्राप्त है ।
✔️ किशोरी देवी हर लाल सिंह की पत्नी थी | उसके नेतृत्व में 25 अप्रेल 1934 को कटराथल (सीकर) में हुए सम्मेलन में 10,000 से ज्यादा जाट महिलाओं ने भाग लिया था ।
✔️ मारवाड़ के राष्ट्रगीत “धुसा” में गौरा धाय का नाम शामिल है । गौरा धाय ने ओरंगजेब के नियंत्रण से अजीतसिंह को मुक्त कराने हेतु मेहतरानी का वेश धारण कर अजीतसिंह के स्थान पर अपने पुत्र को सुलाकर कालबेलिया बने मुकून्द दास खिची को सौप दिया था ।
✔️ मुम्बई हमले के आतंकवादी अजमल आमीर कसाब के खिलाफ पहली ग्वाही देने वाली बालिका सुमेरपुर (पाली) निवासी देविका है, जिसे उसके इस साहसिक कार्य हेतु “झाँसी की रानी” की उपाधि दी गई ।

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