राजस्थान की खारे पानी की झीलें (Rajasthan ki khare pani ki jheele)

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Rajasthan-Jheele

 राजस्थान की प्रमुख झीलें

(Major lakes of Rajasthan)

अरावली पर्वतमाला महान जल विभाजक रेखा होने के साथ-साथ राज्य की झीलों को भी दो भागों में विभाजित करती है । राजस्थान में खारे पानी की 9 झीलों का विस्तार है।
अरावली के पूर्वी भाग में पायी जाने वाली झीलें मीठे पानी की झीलें तथा इसके पश्चिम में पायी जाने वाली खारे पानी की झीलें है।
राज्य का पश्चिमी भाग टेथिस सागर का अवशेष है। अतः इस क्षेत्र में पायी जाने वाली झीलें खारे पानी की झीलें है
रेगिस्तानी प्रदेश में खारे पानी की झीलों को प्लाया तथा तटीय क्षेत्र में इन्हे लेगून कहा जाता है ।
दक्षिणी-पश्चिमी मानसून की अरब सागरीय शाखा राज्य में प्रवेश करते समय लवण के भारी कणों को पश्चिमी भाग में गिरा देती है, जिससे यहाँ की मिट्टी व झीलों में खारापन पाया जाता है ।
राजस्थान में समस्त खारे पानी की झीलें वायु द्वारा बनी हुई ।
नोट :- राज्य में सबसे अच्छा नमक नावा झील का है जो नावां गाँव नागौर जिले में स्थित है
नोट :- दक्षिणी एशिया में पहली बार विश्व झील सम्मेलन का आयोजन 28 अक्टूम्बर से 2 नवम्बर 2007 तक भारत में जयपुर में किया गया ।

खारे पानी की झीलें

(Saltwater lakes of Rajasthan)


सांभर झील (Sambhar Lake):-
यह झील सबसे प्राकृतिक एवं सबसे बड़ी खारे पानी की झील है ।

यह झील जयपुर-फूलेरा रेलमार्ग पर जयपुर से 65 किलोमीटर दूरी पर स्थित है । इस झील का विस्तार राज्य के तीन जिलों जयपुर, अजमेर तथा नागौर में है । इसका सर्वाधिक विस्तार जयपुर जिले में है ।

इस झील की लम्बाई 32 किलोमीटर तथा चौड़ाई 3 से 12 किलोमीटर है । इस झील पर भारत सरकार की साल्ट लिमिटेड कम्पनी द्वारा नमक उत्पादन का कार्य किया जा रहा है । इस झील में प्रति 4 मीटर की गहराई पर 350 लाख टन नमक उत्पादित होता है ।

भारत में कुल नमक उत्पादन का 8.7 प्रतिशत सांभर झील से होता है।

इस झील का आकार आयताकार है । इस झील के उत्तर की ओर मेन्था नदी, दक्षिण की ओर से रूपनगढ एवं खारी व खण्डेला नदीयाँ भी इसमें आकर मिलती है । माना जाता है कि इस झील का निर्माण बिजौलियाँ शिलालेख के अनुसार चौहान वंश के संस्थापक वासुदेव चौहान द्वारा करवाया गया था ।
पर्यटन के क्षेत्र में इस झील को रामसर साइट के नाम से जाना जाता था । इस झील पर सन् 1870 में अंग्रेजों द्वारा स्थापित सांभर साल्ट म्यूजियम स्थित है । इस झील पर नागौर जिले का प्रशासनिक अधिकार है ।
इस झील में स्वाईस रूविना नामक शैवाल पाया जाता है, जिससे 60 प्रतिशत प्रोटीन प्राप्त होता है ।
सांभर से संबंधित अन्य तथ्य
• तीर्थ स्थली देवयानी (तीर्थों की नानी)
• शाकम्भरी माता का मन्दिर

• संत हिमामुद्दीन की पुण्य भूमि

• जहांगीर का ननिहाल

• अकबर की विवाहस्थली

• नालीसर दरगाह यायाति की साम्राज्य स्थली

• चौहानों की राजधानी

पंचपदरा झील (Panchpadra Lake):-

यह झील राज्य के बाडमेर जिले में स्थित है । इस झील का निर्माण 400 ई.पू. पंचा नामक व्यक्ति द्वारा करवाया गया था । इस झील में खारवाल जाती के लोग मोरड़ी-झारड़ी विधि द्वारा नमक उत्पादन करते है। इस झील का नमक खाने के लिये उपयुक्त माना जाता है ।

इस झील में 98 प्रतिशत सोडियम क्लोराइड की मात्रा पाई जाती है ।

डीडवाना झील (Didwana Lake):-

यह झील नागौर जिले में स्थित है । इस झील का नमक खाने के अयोग्य है ।

यहाँ राजस्थान सरकार द्वारा राज. स्टेट केमिकल वर्क्स नामक दो नमक उद्योग स्थापित किये गये है । जिनमें सोडियम सल्फेट का निर्माण होता है । जो कृत्रिम रूप से कागज का उत्पादन करते है ।

राज्य की अन्य खारे पानी की झीलें

1. रेवासा झील – सीकर

2. कावोद झील – जैसलमेर

3. तालछापर झील – चुरू

4. डेगाना झील – नागौर

5. फलौदी झील – जोधपुर

6. लूणकरणसर – बीकानेर

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