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प्रजामण्डल आन्दोलन (Prajamandal Aandolan) (Conference movement) - gk website
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Home Uncategorized प्रजामण्डल आन्दोलन (Prajamandal Aandolan) (Conference movement)

प्रजामण्डल आन्दोलन (Prajamandal Aandolan) (Conference movement)

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प्रजामण्डल आन्दोलन

प्रजामण्डल आन्दोलन
प्रजामण्डल आन्दोलन

✔️ कांग्रेस ने 1938 में अपने हरीपुरा अधिवेशन में देशी रियासतों को अपना कार्यक्षेत्र घोषित किया ।
✔️ रियासतों में प्रजामण्डलों की स्थापना का प्रमुख उद्देश्य था, उत्तरदायी शासन की स्थापना करना ।
✔️ कांग्रेस ने रियासतों में प्रजमण्डलों की स्थापना हेतु “राजपूताना मध्य भारत सभा” नामक संस्था को अपनी सहयोगी संस्था बनाया । 19 जून 1947 को रास्तापाल हत्याकाण्ड की घटना घटी । रास्तापाल डूंगरपुर जिले में स्थित है, यहाँ भील बालिका कालीबाई एवं मकान मालिक नानाभाई की गवाह की मूर्तिया लगवाकर पाक बनवाया गया है जहां प्रतिवर्ष मेला लगता है।
✔️ सन् 1945 में अमृत लाल पायक एवं चुन्नी लाल प्रभाकर द्वारा प्रतापगढ़ प्रजामण्डल की स्थापना की गई ।
✔️ सन् 1942 में भंवर लाल निगम द्वारा कुशलगढ़ प्रजामण्डल स्थापित किया गया ।
✔️ बीकानेर राज्य में “नादिरशाही” नामक पुस्तक के लेखक विजयसिंह मेहता है ।
✔️ गंगारिसाला (ऊटों की पलटन) के साथ बीकानेर महाराजा गंगासिंह प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेजों की सहायता हेतु युद्ध क्षेत्र में पहुंचे थे ।
✔️ गाँधीजी की हत्या के षड़यन्त्र में संलग्नता के आधार पर अलवर नरेश तेजसिंह एवं प्रधानमंत्री बी.एन.खरे को भारत सरकार ने दिल्ली में नजरबन्द कर दिया था
✔️ सन् 1933 में डूगरपुर के राजगुरू सरयूदास जी की सहायता से हरिजनों ने भोगी लाल पाण्ड्या के नेतृत्व में राजाजी की छतरी के समीप स्थित जगदीश मन्दिर में प्रवेश किया ।
✔️ सज्जन सिह ने श्यामलदास को कविराजा एवं मेवाड़ के पॉलीटीकल ऐजेन्ट कर्नल इम्पी ने “केसर ए हिन्द” की उपाधि प्रदान की थीतसीमों काण्ड का सम्बन्ध धौलपुर प्रजामण्डल से है । 11 अप्रेल 1947 को पुलिस द्वारा तिरंगा उतारने के विरोध में छतरसिंह परमार, ठाकुर पंचम सिंह कुशवाहा शहीद हो गये । इनकी शहादत में प्रतिवर्ष यहाँ 11 अप्रेल को मेला
लगता है ।
✔️ हिन्दी साहित्य समिति की स्थापना 1912 में जगन्नाथ दास द्वारा भरतपुर में की गई । इस संस्था द्वारा 1927 में भरतपुर में विश्व हिन्दी सम्मेलन का आयोजन करवाया गया था, जिसमें रविन्द्रनाथ टेगौर, जमना लाल बजाज आदि ने भाग लिया था । इसकी अध्यक्षता पण्डित गोरीशंकर हीरानन्द ओझा ने की थी ।
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मेवाड़ प्रजामण्डल
(Mewar Prajamandal)
(Mewar Region)

✔️ मेवाड़ प्रजामण्डल की स्थापना 24 अप्रेल 1938 को माणिक्य लाल वर्मा द्वारा की गई थी । मेवाड़ प्रजामण्डल के प्रथम अध्यक्ष बलवन्त सिंह मेहता, उपाध्यक्ष भूरे लाल बया व महामंत्री माणिक्य लाल वर्मा को बनाया गया । 24 सितम्बर 1938 मेवाड़ प्रजामण्डल को अवैध घोषित कर दिया गया तथा माणिक्य लाल वर्मा को मेवाड़ से अजमेर निष्कासित दिया गया।

नोट :- माणिक्य लाल वर्मा ने अजमेर से “मेवाड़ का वर्तमान शासक” नामक पुस्तक प्रकाशित की जिसमें तत्कालीन मेवाड़ शासन की कटु आलोचना की गई ।

✔️ माणिक्य लाल वर्मा की पत्नी नारायणी देवी वर्मा, पुत्री स्नेहलता वर्मा, भगवती देवी, रामा देवी ओझा को भी निष्कासित कर दिया गया । भूरे लाल बया को उदयपुर स्थित सराड़ के किले में नजरबंद कर दिया गया ।

नोट :- सराड़ के किले को “मेवाड़ का काला पानी” कहा जाता था ।

✔️ सन 1938 में दशहरें के दिन मेवाड प्रजामण्डल ने सत्याग्रह आरम्भ किया । इसके पहले सत्याग्रही रमेश चन्द्र व्यास थे । मेवाड़ प्रजामण्डल का पहला अधिवेशन 25-26 नवम्बर 1941 माणिक्य लाल वर्मा की अध्यक्षता में उदयपुर के शाहपुरा हवेली नामक स्थान पर हुआ ।

नोट :- इस अधिवेशन में कांग्रेस के दो राष्ट्रीय नेता जे.बी. कृपलानी तथा विजयलक्ष्मी पण्डित ने भाग लिया।

✔️ अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद (AISPC) का 6वां अधिवेशन पण्डित जवाहर लाल नेहरू की अध्यक्षता में उदयपुर के सालोटिया मैदान पर आयोजित हुआ । इस अधिवेशन में “शेर ए कश्मीर” शेख अब्दुल्ला ने भाग लिया ।

✔️ 6 मई 1946 को ठाकुर गोपाल सिंह की अध्यक्षता में मेवाड़ संविधान निर्मात्री सभा का गठन किया गया । टी. राघवाचार्य के स्थान पर के.एम. मुन्शी को मेवाड़ का प्रधानमंत्री बनाया गया, तथा के.एम. मुन्शी ने ही मेवाड़ का संविधान तैयार किया था ।

✔️ 8 मई 1948 को विधानसभा निर्वाचनों के उपरान्त मेवाड़ में उत्तरदायी शासन की स्थापना हुई । मेवाड़ प्रजामण्डल में 600 से अधिक छात्रों ने भाग लिया था, इन्होने गुना (मध्यप्रदेश) तथा कोटा के मध्य एक रेलवे पूल को उड़ा दिया था । इन छात्रों में शिव चरण माथुर भी थे जो आगे चलकर राजस्थान के मुख्यमंत्री बनें ।

नोट :- मेवाड़ प्रजामण्डल का प्रमुख केन्द्र नाथद्वारा था ।

✔️ मेवाड़ रियासत देश की उन रियासतों में से एक थी जिन्होने बिना किसी हिचकीचाहट के अपने दो प्रतिनिधि भारतीय संविधान निर्मात्री सभा में भेजे । 1. के.एम.मुन्शी 2. माणिक्य लाल वर्मा

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मारवाड़ प्रजामण्डल
(Marwar Prajamandal)
(Marwar region)

✔️ मारवाड़ प्रजामण्डल की स्थापना 1934 में जय नारायण व्यास द्वारा की गई थी । मारवाड़ प्रजामण्डल के प्रथम अध्यक्ष भंवर लाल सरार्फ को बनाया गया । 1936 में पण्डित जवाहर लाल नेहरू ने मारवाड़ की यात्रा की तथा मारवाड़ में 14 नवम्बर को नेहरू दिवस मनाया गया, इसके पश्चात मारवाड प्रजामण्डल को अवैध घोषित कर दिया गया ।

नोट :- 1938 में प्रजामण्डल आन्दोलन में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने मारवाड़ की यात्रा की।

✔️ 1936 में जय नारयण व्यास ने मुम्बई से “अखण्ड भारत” नामक समाचार पत्र संपादित किया । 16 मई 1938 को मारवाड़ लोक परिषद की स्थापना की गई जिसके प्रथम अध्यक्ष रणछोड़ दास गट्टानी को बनाया गया ।

✔️ मारवाड़ लोक परिषद ने पोपा बाई की पोल तथा मारवाड की अवस्था नामक पुस्तकें प्रकाशित की, इन पुस्तकों में तत्कालीन मारवाड़ सरकार की कटु आलोचना की गई ।

✔️ मारवाड़ सरकार ने लोक परिषद के नेताओं की छवि जनता में धुमिल कराने के उद्देश्य से मदन जोशी से “नेता की तस्वीर” नामक पुस्तक की रचना करवाई गई, जिसमें लोक परिषद के नेताओं की निन्दा की गई ।

✔️ लोक परिषद की सामाजिक कार्यकर्ता महिमा देवी किंकर ने “उत्तरदायी शासन” नामक पुस्तक लिखी । लाल चन्द्र जैन ने मारवाड़ क्रान्ति संघ स्थापित किया । 19 जून 1942 को जोधपुर (पीलवा गाँव) निवासी बाल मुकुन्द बिस्सा की भूख हड़ताल से मृत्यु हो गई ।

✔️ 1945 में पण्डित जवाहर लाल नेहरू ने पूनः मारवाड़ की यात्रा की इस समय मारवाड़ का प्रधानमंत्री सर डोनाल्ड के स्थान पर सी.एस. वेकटाचारी को बनाया गया था । 1947 में मारवाड़ के शासक उम्मेद सिंह की मृत्यु हो गई तथा उनका पुत्र हनुवन्त सिंह मारवाड़ का शासक बना ।

नोट :- इस समय देशी रियासतों के एकीकरण का कार्य प्रगति पर था । हनुवन्त सिंह जोधपुर रियासत को पाकिस्तान में मिलाना चाहते थे, परन्तु सरदार वल्लभ भाई पटेल के अथक प्रयासों के चलते हनुवन्त सिंह अपनी इस योजना को साकार रूप नही दे सके । सरदार वल्लभ भाई पटेल को “भारत का बिस्माक्र” तथा “लौह पुरूष” कहा जाता है ।

✔️ 3 मार्च, 1948 को विधान सभा निर्वाचनों के उपरान्त मारवाड़ में उत्तरदायी शासन की स्थापना हुई।

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जयपुर प्रजामण्डल
(Jaipur Prajamandal)
(Jaipur region)

✔️ जयपुर प्रजामण्डल राज्य का प्रथम प्रजामण्डल था । जयपुर प्रजामण्डल की स्थापना 1931 में कर्पूर चन्द पाटनी द्वारा की गई । जयपुर प्रजामण्डल के प्रथम अध्यक्ष चिरंजी लाल मिश्र को बनाया गया । 5 अप्रेल 1931 को जयपुर में मोती लाल दिवस मनाया गया । 1938 में जयपुर प्रजामण्डल का पुनर्गठन जमना लाल बजाज तथा हीरा लाल शास्त्री द्वारा किया गया ।
नोट :- जमना लाल बजाज का सम्बन्ध काशी का बास सीकर जिले से है । इन्हे गाँधी जी का पाँचवा पुत्र तथा गुलाम नम्बर 4 कहा जाता है ।
✔️ जयपुर प्रजामण्डल का प्रथम अधिवेशन 9 मई 1938 को जमना लाल बजाज की अध्यक्षता में हुआ, इस समय कस्तुरबा गाँधी जयपुर आई थी । 1940 में हीरा लाल शास्त्री जयपुर प्रजामण्डल के अध्यक्ष बने ।
✔️ जयपुर प्रजामण्डल के कार्यकर्ताओं में आपसी मतभेद के चलते हीरा लाल शास्त्री ने प्रजामण्डल के कार्यों में रूचि लेना बन्द कर दिया । 1942 में हीरा लाल शास्त्री तथा जयपुर के तत्कालीन प्रधानमंत्री मिर्जा इस्माइल के मध्य जैन्टलमेन एग्रीमेन्ट के नाम से एक समझौता हुआ। इस समझौते के तहत जयपुर प्रजामण्डल ने गाँधीजी के “भारत छोड़ो आन्दोलन” में भाग नही लिया । हीरा लाल शास्त्री के इस समझौते से नाराज कुछ कार्यकर्ताओं ने बाबा हरीश चन्द्र के नेतृत्व में “आजाद मोर्चे” के गठन किया । इस संगठन ने गाँधीजी के भारत छोड़ो आन्दोलन को सहायता प्रदान की ।

✔️ आजाद मोर्चे के नेतृत्व में प्रजामण्डल के कई कार्यकर्ताओं ने अपनी गिरफ्तारियां दी, जिसमें प्रमुख सर्वोदय नेता सिद्ध
राज ढड्डा थे । (सर्वोदय नेता सित राज ढड्डा का सम्बन्ध जयपुर व जयपुर प्रजामण्डल से है)
✔️ 1945 में जवाहर लाल नेहरू की प्रेरणा पर आजाद मोर्चे का भारत छोडो आन्दोलन में विलय कर लिया गया तथा जयपुर का प्रधानमंत्री हीरा लाल शास्त्री को बनाया गया ।
नोट :- जयपुर रियासत देश की उन रियासतों में से एक थी जिन्होने सबसे पहले भारत संघ में शामिल होना स्वीकार किया था । यहां से तीन सदस्य भारतीय संविधान निर्मात्री सभा में भेजे गये ।
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कोटा प्रजामण्डल
(Kota Prajamandal)
(Kota region)

✔️ पण्डित नयनुराम शर्मा ने थानेदार की नौकरी से इस्तीफा देकर 1934 में हाडौती प्रजामण्डल की स्थापना की। कुछ समय बाद यह संस्था निष्क्रिय हो गई । इसके बाद नयनुराम शर्मा ने अभिन्न हरी के साथ मिलकर कोटा प्रजामण्डल गठित किया।
नोट :- कोटा प्रजामण्डल का प्रथम अधिवेशन पण्डित नयनुराम की अधयक्षता में 14 अक्टूम्बर 1939 को मांगरोल नामक स्थान पर हुआ। रियासत काल में यह स्थान कोटा रियासत के अन्तर्गत आता था । वर्तमान में मांगरोल बारां जिले में स्थित है ।
✔️ इसी समय कोटा में शारदा भार्गव की अध्यक्षता में एक महिला सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें 6 वर्ष तक के बालकों के लिये अनिवार्य शिक्षा का प्रस्ताव रखा गया ।
✔️ पण्डित नयनुराम शर्मा ने कोटा के मोडक नामक स्थान पर हाडौती शिक्षा मण्डल की स्थापना की, इसी समय नयनुराम शर्मा ने कोटा में बेगार विरोधी आन्दोलन चलाया । 14 अक्टूम्बर, 1941 को अपने गाँव निमाणा जाते समय किसी अज्ञात व्यक्ति ने पण्डित नयनुराम शर्मा की हत्या कर दी, इसके उपरान्त अभिन्न हरि कोटा प्रजामण्डल के अध्यक्ष बने ।
नोट :- 26 जनवरी, 1942 को कोटा रियासत में पहली बार स्वतन्त्रता दिवस मनाया गया ।
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करौली प्रजामण्डल
(Karoli Prajamandal)
(Karauli Region)

✔️ करौली रियासत में भी राजस्थान की अन्य रियासतों की तरह सामन्तवादी व्यवस्था व्याप्त थी ।
✔️ करौली शासक भीमपाल ने यहाँ सुआरों को मारने पर प्रतिबन्ध लगा रखा था, ये सुअर किसानों की खड़ी फसल को नुकसान पहुचाते थे। अतः यहाँ के किसानों ने सन् 1921 में कुँवर मदनपाल के नेतृत्व में सुआरों की मारने की इजाजत को लेकर आन्दोलन प्रारम्भ किया ।

नोट :- कुँवर मदन पाल ने प्रेमाश्रम तथा ब्रह्मचर्य आश्रम नामक दो संस्थाए स्थापित की । कुँवर मदन पाल को करौली का भीष्म पितामह भी कहा जाता है ।
✔️ करौली रियासत में राजनैतिक जन जागृति का श्रेय करौली राज्य सेवा संघ नामक संस्था को जाता है ।
नोट :- सन 1939 में करौली प्रजामण्डल की स्थापना त्रिलोक चन्द माथुर द्वारा की गई ।
✔️ सन 1945 में चिरंजी लाल शर्मा को करौली प्रजामण्डल का अध्यक्ष बनाया गया ।
✔️ करौली प्रजामण्डल की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि यहां की जनता का कभी भी यहाँ की सरकार से सीधा टकराव नही हुआ । अतः यहां के किसानों को भी कोई बड़ा आन्दोलन नहीं करना पड़ा ।
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जैसलमेर प्रजामण्डल
(Jaisalmer Prajamandal)
(Jaisalmer region)

✔️ जैसलमेर रियासत में महारावल जवाहर सिंह का निरंकश शासन था । यहाँ सागरमल गोपा ने इसका विरोध किया । सन् 1932 में जैसलमेर रियासत में रघुनाथ सिंह मेहता ने माहेश्वरी नवयुवक मण्डल की स्थापना की, इस संस्था ने जैसलमेर में राजनैतिक जन जाग्रति का कार्य किया ।
✔️ महारावल जवाहर सिंह का विरोध करने के कारण सागरमल गोपा को यहां से निर्वासित कर दिया गया ।
नोट :- सागरमल गोपा ने सन् 1940 में जेल में रहते हुए “जैसलमेर में गुण्डाराज” नामक पुस्तक प्रकाशित की जिसमें जवाहर सिंह के शासन की निन्दा की गई ।
✔️ जैसलमेर प्रजामण्डल की स्थापना 15 दिसम्बर, 1945 को जोधपुर में मिट्ठा लाल व्यास द्वारा की गई थी । सागरमल गोपा को जेल में थानेदार गुमान सिंह द्वारा भारी यातनाएँ दी गई जिनका विवरण उन्होंने जयनारायण व्यास तथा शेख अब्दुल्ला को किया । व्यासजी के आग्रह पर 5 अप्रेल, 1946 को पॉलिटीकल एजेन्ट को जाँच हेतु जैसलमेर आना था, लेकिन 3 अप्रैल, 1946 को जेल में सागरमल गोपा पर तेल छिड़क कर आग लगा दी गई जिससे 4 अप्रेल, 1946 को सागरमल गोपा की मृत्यु हो गई।
नोट :- सागरमल गोपा की मृत्यु के कारणों की जाँच हेतु “गोपाल स्वरूप पाठक आयोग” गठित किया गया, इस आयोग की रिपोर्ट आश्चर्य चकित कर देने वाली थी, इस आयोग की रिपोर्ट में सागरमल गोपा की मृत्य
आत्महत्या करार दिया गया ।
✔️ 1947 में गिरधारी सिंह जैसलमेर का शासक बना । यह जोधपुर के तत्कालीन शासक हनुवन्त सिंह के साथ पाकिस्तान में विलय चाहता था । परन्तु सरदार वल्लभ भाई पटेल के प्रयासों के चलते हुए यह सब सम्भव नही हो सका । 30 मार्च 1949 को जैसलमेर रियासत का वृहत्त राजस्थान में विलय कर लिया जाता है । और यहाँ निरंकुश शासन का अंत होता है।

नोट :- “आजादी के दीवाने” नामक पुस्तक के लेखक सागरमल गोपा है ।
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बीकानेर प्रजामण्डल
(Bikaner Prajamandal)
(Bikaner Region)

✔️ बीकानेर प्रजामण्डल की स्थापना 4 अक्टूम्बर 1936 को वैध मेधाराम द्वारा की गई, इस समय बीकानेर रियासत में महाराजा गंगा सिंह का शासन था । महाराजा गंगा सिह ने वैध मेधाराम को यहां से निर्वासित कर दिया । 27 जुलाई 1942 को रघुवर दयाल गोयल ने बीकानेर राज्य प्रजा परिषद का गठन किया ।
नोट :- बीकानेर राज्य प्रजामण्डल की स्थापना 1937 में कलकत्ता में हुई थी, इसका प्रथम अध्यक्ष लक्ष्मी देवी को बनाया गया ।
✔️ राय सिंह नगर हत्या कांड़ 30 जून 1946 को बीकानेर राज्य प्रजा परिषद का अधिवेशन सत्यनारायण सर्राफ की अध्यक्षता में राय सिंह नगर में आयोजित किया गया । इस सम्मेलन में शामिल होने जा रहे कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने गोली बारी की जिसके चलते नोजवान बीरबल शहीद हो गये ।
नोट :- शहीद बीरबल की स्मृति में इन्दिरा गाँधी नहर की प्रमुख वितरिका का नाम शहीद बीरबल वितरिका रखा गया
✔️ बीकानेर राज्य प्रजामण्डल ने कलकत्ता से “बीकानेर की थोथी पोपी” नामक पुस्तक प्रकाशित की, इस पुस्तक ने महाराजा गंगा सिंह की पोल खोल दी ।
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अलवर प्रजामण्डल
(Alwar Prajamandal)
(Alwar region)

✔️ अलवर प्रजामण्डल की स्थापना सन् 1938 में पण्डित हरि नारायण शर्मा तथा कुंज बिहारी शर्मा द्वारा की गई ।
✔️ अलवर प्रजामण्डल का प्रथम अध्यक्ष लक्ष्मण स्वरूप त्रिपाठी को बनाया गया तथा सचिव हरि नारायण शर्मा को बनाया गया । अलवर रियासत में सरकारी पाठशालाओं में फीस वृद्धि को लेकर प्रजामण्डल आन्दोलन प्रारम्भ हुआ । अलवर प्रजामण्डल का प्रथम अधिवेशन सन् 1944 में खैरथल धर्मशाला में आयोजित किया गया । अलवर रियासत में सन् 1937 से पूर्व कांग्रेस समिति की स्थापना हो चुकी थी, जिसका अध्यक्ष सालिग्राम तथा मंत्री इन्द्र सिंह आजाद को बनाया गया ।
नोट :- 26 जनवरी 1942 को अलवर में पहली बार स्वतन्त्रता दिवस मनाया गया |
✔️ अलवर प्रजामण्डल द्वारा आदिवासी संघ, वाल्मिकी संघ तथा अस्पृश्ता निवारण संघ की स्थापना की गई थी

भरतपुर प्रजामण्डल
(Bharatpur Prajamandal)
(Bharatpur region)

✔️ भरतपुर प्रजामण्डल की स्थापना सन् 1938 में किशन लाल जोशी द्वारा की गई । ठाकुर देशराज, गोपी लाल यादव, युगल किशोर चतुर्वेदी तथा गोकुल जी वर्मा आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा व अध्यक्ष गोपी लाल यादव को बनाया गया । भरतपुर प्रजामण्डल के दौरान पूर्वी राजस्थान की जनता का एक सम्मेलन फतेहपुर सीकरी नामक स्थान पर आयोजित किया गया, इस अधिवेशन की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध साम्यवादी नेता मानवेन्द्र नाथ रॉय द्वारा की गई थी ।
नोट :- भरतपुर की जनता युगल किशोर चतुर्वेदी को दूसरा “जवाहर लाल नेहरू” कहकर पूकारती थी ।
नोट :- गोकुल जी वर्मा को शेर ए भरतपुर, भरतपुर का बुढ़ा शेर तथा भरतपुर की राजनीति का भीष्म पितामह कहा जाता है
नोट :- राज्य के तीन प्रजामण्डल ऐसे है जिनकी स्थापना राज्य से बाहर हुई है ।
1. सिरोही प्रजामण्डल की स्थापना – मुम्बई में
2. बीकानेर प्रजामण्डल की स्थापना – कलकत्ता में
3. भरतपुर प्रजामण्डल की स्थापना – रेवाड़ी (हरियाणा में)
नोट :- राज्य के अलवर तथा जयपुर प्रजामण्डल ने प्रत्यक्ष रूप से गाँधीजी के भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग नहीं लिया।
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महत्वपूर्ण तथ्य –

👉 संयुक्त राजस्थान (18 अप्रैल 1948) के राजप्रमुख उदयपुर के महाराणा भूपाल सिंह को तथा उप राजप्रमुख कोटा महारावल भीम सिंह को बनाया गया । इसका उद्घाटन 19 अप्रेल 1948 को जवाहर लाल नेहरू द्वारा किया गया ।

👉 राममनोहर लोहिया की अध्यक्षता में राजस्थान आन्दोलन समिति का गठन कर वृहत्त राजस्थान के निर्माण की योजना बनाई गई थी । वृहत्त राजस्थान (30 मार्च 1949) का उद्घाटन जयपुर के राजमहल के दरबार हॉल में हुआ इसके महाराज प्रमुख मेवाड़ के भूपाल सिंह को तथा राजप्रमुख जयपुर के सवाई मानसिंह द्वितीय को एवं उपराज प्रमुख कोटा महारावल भीम सिंह को बनाया गया ।

👉 राज्य के एकीकरण के पाँचवे चरण में (15 मई 1949) वृहत्त राजस्थान + मत्स्य संघ + निमराणा ठिकाने को मिलाया गया था । सिरोही रियासत का विलय एकीकरण के छठे चरण में राजस्थान संघ (26 जनवरी 1950) के दौरान हुआ।

👉 1 नवम्बर 1956 को सातवें संविधान संशोधन 1956 के द्वारा राजप्रमुख पद को समाप्त कर दिया तथा इसी दिन राज्यपाल पद सृजित किया गया ।
👉 7 सितम्बर 1949 को भारत सरकार द्वारा गठित सत्यनारायण राव समिति द्वारा जयपुर सम्पूर्ण राजस्थान की राजधानी बनी ।

👉 30 मार्च को प्रतिवर्ष राजस्थान दिवस के रूप में मनाया जाता है, जबकि 1 नवम्बर को राजस्थान स्थापना दिवस मनाया जाता है ।

👉 राजस्थान के राजनैतिक एकीकरण के सात चरणों में लगभग आठ वर्ष सात माह तथा चौदह दिन का समय लगा था।
👉 राजस्थान में 19 रियासतें व 3 ठिकाने थे । (कुशलगढ़, लावा, नीमराणा)
👉 एकीकरण के समय एक केन्द्रशासित प्रदेश अजमेर मेरवाड़ा था ।
👉 राज्य की सबसे प्राचीन रियासत मेवाड थी, जबकि नवीन रियासत झालावाड थी ।
👉 क्षेत्रफल के आधार पर राज्य की सबसे बड़ी रियासत मारवाड़ थी जबकि सबसे छोटी रियासत शाहपुरा थी।
👉 एकीकरण के समय क्षेत्रफल की दृष्टि से डूंगरपुर राज्य का सबसे छोटा जिला था ।
👉 बांसवाड़ा महारावल चन्द्रवीर सिंह का कथन था कि “मैं अपने डेथ वारंट पर हस्ताक्षर कर रहा हूं”
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