मेवाड़ के दिल्ली सल्तनत के साथ सम्बन्ध (Mewar relations with Delhi Sultanate)

 दिल्ली सल्तनत के साथ मेवाड़ सम्बन्ध
(Mewar relations with Delhi Sultanate)

मेवाड़-और-दिल्ली-सल्तनत-के-सम्बन्ध
मेवाड़-और-दिल्ली-सल्तनत-के-सम्बन्ध

दिल्ली सल्तनत एक परिचय

✔️ मोहम्मद गौरी के एक दास कुतुबद्दीन ऐबक ने 1206 में दिल्ली सल्तनत की नीव रखी ।
✔️ दिल्ली सल्तनत का शासनकाल 1206 से 1526 तक है । 320 वर्ष तक दिल्ली सल्तनत ही जिसमें 5 वंशों ने शासन किया । जिसका क्रम इस प्रकार है
1. गुलाम वंश (Gulam Vansh)- 1206 से 1290 कुतुबुउद्दीन ऐबक
2. खिलजी वंश (Khilaji Vansh)- 1290 से 1320 जलालउद्दीन फिरोज खिलजी
3. तुगलक वंश (Tugalak Vansh)- 1320 से 1398/1414 ग्यासुद्दीन तुगलक
4. सैयद वंश (Saiyad vansh)– 1414 से 1452 खिज्र खाँ
5. लोदी वंश (Lodee Vansh)- 1452 से 1526 बहलोल लोदी
मुगल वंश (Mugal Vansh)- 1526 से 1707/1857

मेवाड़ के दिल्ली सल्तनत के साथ सम्बन्ध (Relations of Mewar with Delhi Sultanate)

✔️ दिल्ली सल्तनत के समय मेवाड़ के इतिहास में कई वीर शासक हुए जिसमें जैत्र सिंह, तेज सिंह, समर सिंह, रतन सिंह के नाम प्रमुख है।

जैत्र सिंह 1213 से 1253 :- (Jaitr Singh)

✔️ मेवाड़ शासक जैत्रसिंह के काल में इल्तुतमिश ने नागदा (उदयपुर) पर आक्रमण किया।
✔️ इल्तुतमिश जैत्र सिह से पराजित हुआ इस युद्ध को भुताला युद्ध के नाम से जाना जाता है
✔️ इल्तुतमिश के आक्रमण से नागदा के क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण जैत्र सिंह ने चित्तौड़ को अपनी नई राजधानी बनाया ।
✔️ सन् 1242-43 में जैत्र सिंह की गुजरात के शासक त्रिभुवनपाल के साथ लड़ाई में वीर धवल के मंत्री वास्तुपाल तथा तेजपाल ने सन्धि कराने का प्रयास किया किन्तु जैत्र सिंह ने इनकार कर दिया ।
✔️ जैत्र सिंह की महत्वपूर्ण उपलब्धि यह थी कि मेवाड़ के प्रमुख केन्द्र आहड़ को चालुक्यों से मुक्त कराया।
नोट :- डॉ. दशरथ शर्मा जैत्र सिंह के शासन काल को मध्यकालीन मेवाड़ का स्वर्ण युग काल मानते है ।
✔️ सन् 1248 में बलबन ने मेवाड पर असफल आक्रमण किया ।

तेज सिंह 1253 से 1267 :- (Tej Singh)

✔️ जैत्र सिंह की मृत्यु के बाद उसका पुत्र तेज सिंह 1253 में मेवाड़ का शासक बना ।
✔️ तेज सिंह के काल में 1260 में मेवाड़ चित्रशैली का प्रथम चित्रित ग्रन्थ “श्रावक प्रतिकर्मण सूत्र चूर्णिप्राप्त हुआ । (यह सन् 1260 में आहड से मिला)
✔️ तेज सिंह की रानी जयतल्ल देवी ने चित्तौड़ दुर्ग में श्याम पार्श्वनाथ मन्दिर का निर्माण करवाया।
✔️ तेज सिंह ने चालुक्यों के समान उभापति वरलब्ध प्रौढ़ प्रताप का विरूद्ध धारण किया व परम भट्टारक और महाराजधिराज की उपाधियां धारण की ।
✔️ तेजसिंह के काल में दिल्ली सल्तनत में नासिरुउद्धीन महमूद के विरूद्ध कुतलुगू खाँ ने विरोध कर दिया तथा यह तेजसिंह की शरण में आ गया । अतः नासिरुद्धीन महमूद के प्रधानमंत्री बलबन ने 1253-54 में मेवाड़ पर आक्रमण किया ।

समर सिंह 1267 से 1302 :- (Samar Singh)

✔️ तेज सिंह की मृत्यु के बाद 1267 में उसका पुत्र समर सिंह शासक बना ।
✔️ जिनप्रभसूरी के “तीर्थ कल्प” से ज्ञात होता है कि अल्लाउद्दीन खिलजी के सेना नायक नुसरत खाँ तथा उलगू खाँ ने जब गुजरात पर आक्रमण किया तो मेवाड़ के तत्कालीन शासक समर सिंह ने मुस्लिम सैनिकों से उचित दण्ड देकर ही उन्हें मेवाड़ की सीमा से आगे बढ़ने दिया ।
✔️ मेवाड़ शासक समर सिंह ने जैन गुरू अमित सूरी के प्रभाव में आकर समस्त राज्य में जीव हिंसा पर रोक लगा दी थी।
✔️ समर सिंह के काल में प्रमुख शिल्पी केल सिंह, कल्हण, कर्मसिंह और पदम सिंह थे ।
✔️ समर सिंह के काल में निम्न विद्धान शुभ चन्द्र, पार्श्व चन्द्र, भावशंकर, रतनप्रभ सूरी, वेद शर्मा आश्रय पाते थे ।
✔️ समर सिंह के दो पुत्र थे रतन सिह तथा कुम्भकर्ण । कुम्भकर्ण नेपाल चला गया तथा नेपाल में गुहिल वंश की स्थापना की

रतन सिंह (प्रथम) 1302 से 1303 :- (Ratan Singh)
✔️ मेवाड़ के शासक रतन सिह प्रथम को शीघ्र ही अल्लाउद्दीन खिलजी के आक्रमण का सामना करना पड़ा ।
✔️ सन् 1540 में शेरशाह सूरी के काल में मलिक मोहम्मद जायसी ने पदमावत् नामक महत्वपूर्ण ग्रन्थ लिखा इसके अनुसार अल्लाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ के शासक रत्न सिह प्रथम की रानी पद्मिनी को प्राप्त करने की लालसा से चित्तौड़ दुर्ग पर आक्रमण किया ।
✔️ 28 जनवरी 1303 को अल्लाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ दुर्ग पर आक्रमण किया, तथा अल्लाउद्दीन खिलजी ने गम्भीरी व बेड़च नदी के तट पर पास में स्थित चित्तौड़ी नामक पहाड़ी पर शिविर लगाया ।
✔️ लगभग आठ महीने के घेरे के उपरान्त 26 अगस्त 1303 को अल्लाउद्दीन खिलजी का चित्तौड़ दुर्ग पर अधिकार हो गया । दुर्ग की रक्षा करते हुए रत्न सिंह तथा उसके दो वीर सेना नायक गौरा व बादल युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए
✔️ रतन सिंह की पत्नी पद्मिनी ने 1600 रानियों के साथ जौहर किया जो कि मेवाड़ के इतिहास का प्रथम साका माना जाता है ।
✔️ अल्लाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ दुर्ग पर अधिकार हो जाने के उपरान्त यहाँ का प्रशासक अपने पुत्र ख़िज़्र खाँ को नियुक्त किया । खिज्र खाँ यहां 1313 तक रहा । इसने चित्तौड़ का नाम खिज्राबाद कर दिया था ।
✔️ खिज्र खाँ के दिल्ली लौट जाने के उपरान्त जालौर के शासक कान्हड़देव के भाई मालदेव सोनगरा को चित्तौड़ दुर्ग का प्रशासक नियुक्त किया गया।
नोट :- मालदेव सोनगरा को इतिहास में मालदेव मुछाला के नाम से भी जाना जाता है ।
✔️ अल्लाउद्दीन खिलजी के चित्तौड़ आक्रमण के समय उसका प्रसिद्ध इतिहासकार व कवि अमीर खुसरों उपस्थित था ।
✔️ सिसोदा का सामन्त लक्ष्मण सिंह रतन सिह प्रथम की ओर से अपने सात पुत्रों के साथ युद्ध में लडता हुआ वीरगति को प्राप्त हुआ ।
✔️ सिसोदा के लक्ष्मण सिंह का पौत्र तथा अरी सिंह पुत्र हम्मीर ने चित्तौड़ दुर्ग पर 1326 में अधिकार कर लिया ।
✔️ मालदेव सोनगरा ने हम्मीर से मित्रता कर ली तथा अपनी पुत्री का विवाह हम्मीर के साथ कर दिया
नोट :- हम्मीर के काल से मेवाड़ के शासक अपने नाम के पहले महाराणा शब्द का प्रयोग करने लगे ।
✔️ चित्तौड़ का शासक रतन सिंह प्रथम गुहिल (रावल) शाखा का अंतिम शासक था ।

✔️ हम्मीर के काल से यह वंश सिसोदिया वंश कहलाता है ।

हम्मीर और दिल्ली सल्तनत

✔️ मेवाड़ शासक हम्मीर के काल में मोहम्मद तुगलक ने मेवाड़ पर आक्रमण किया । हम्मीर तथा मुहम्मद तुगलक के मध्य हुए इस युद्ध को सिंगोली का युद्ध कहा जाता है ।
✔️ मेवाड़ शासक हम्मीर को कीर्ति स्तम्भ प्रशस्ति में “विषम घाटी पंचानन’ की संज्ञा दी गई है ।

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