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Jalore Fort, Mehrangarh Fort, Bhatner Fort, Kota Fort, Shahabad fort, Shergarh Fort - gk website
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Jalore Fort, Mehrangarh Fort, Bhatner Fort, Kota Fort, Shahabad fort, Shergarh Fort

 मेहरानगढ़ दुर्ग
(Mehrangarh Fort)

Mehrangard-Fort
Mehrangard-Fort

✔️ राज्य के जोधपुर जिले में स्थित इस दुर्ग का निर्माण 13 मई 1459 में जोधपुर के तत्कालीन महाराजा राव जोधा द्वारा पंचपेटिया/चिडियाटूंक पहाड़ी पर करवाया गया
✔️ अपनी विशालता के कारण इसको मेहरानगढ़ दुर्ग के नाम से जाना जाता है ।
✔️ मयुराकृति होने के कारण इस दुर्ग को मयूरध्वजगढ़ के नाम से भी जाना जाता है ।
✔️ मेहरानगढ़ दुर्ग को जौधाणा, मिरिगढ़ तथा गढ़ चिन्तामणी नाम से भी जाना जाता है ।
✔️ मेहरानगढ़ दुर्ग के निर्माण के समय रजिया नामक व्यक्ति को जिन्दा दफन किया गया था ।
✔️ राव जोधा ने इसी समय इस दुर्ग के चारों ओर एक नगर बसाया जिसे वर्तमान में जोधपुर नाम से जाना जाता है ।
✔️ रूडयार्ड किपलिंग (ब्रिटिश उपन्यासकार) कुछ समय के लिये इस दुर्ग में ठहरा तथा उसने इस दुर्ग को परियों/देवताओं/फरिश्तों द्वारा निर्मित माना है ।
दुर्ग की स्थापत्य कला :-
✔️ लाल पत्थरों से निर्मित इस दुर्ग में कीरत सिंह सौढ़ा की छतरी, अजीत सिंह द्वारा निर्मित फतह महल, सूर सिंह द्वारा निर्मित मोती महल तथा अभय सिंह द्वारा निर्मित फूल महल स्थित है ।
✔️ मेहरानगढ़ दुर्ग में राव जोधा द्वारा निर्मित चामुण्डा माता का मन्दिर स्थित है ।

✔️ मेहरानगढ़ दुर्ग में राठौड़ों की कुलदेवी नागणेची माता का मन्दिर, मुरली मनोहर मन्दिर तथा आनन्द घनजी मन्दिर स्थित है

✔️ मेहरानगढ़ दुर्ग में चौखेलाव तालाब, बिचल तालाब, राणीसर तालाब तथा पदमसागर तालाब स्थित है ।

✔️ मेहरानगढ़ दुर्ग में भूरे खाँ की मजार स्थित है ।

✔️ मेहरानगढ़ दुर्ग में महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश महल स्थित है ।

✔️ मेहरानगढ़ दुर्ग में कडक बिजली, बिच्छू बाण, गुब्बार, शम्भूबाण, किलकिला, गजनी खाँ प्रसिद्ध तोपें स्थित है

✔️ अहमदाबाद में निर्मित किलकिला तोप को तत्कालीन मारवाड़ महाराजा अजीत सिंह ने इस दुर्ग में स्थापित की। शम्भूबाण तोप को अभय सिंह ने बुलन्द खाँ को पराजित करके उससे छिनकर इस दुर्ग में स्थापित किया ।

✔️ गजनी खाँ तोप को गजसिंह ने 1607 में जालौर से लाकर यहाँ स्थापित की गई ।

✔️ वीर दुर्गादास राठौड़ तथा कीरत सिंह सौढ़ा की कथाओं का सम्बन्ध इसी दुर्ग से है । प्रसिद्ध मेहरानगढ़ म्यूजियम भी इसी दुर्ग में स्थित है ।

✔️ मेहरानगढ़ दुर्ग में श्रंगार चौकी (सिणयार चौकी) स्थित है । यहां मारवाड़ शासकों का राजतिलक हुआ करता था ।

जालौर दुर्ग
Jalore Fort

Jalor-Fort
Jalor-Fort

✔️ जालौर जिले में कनकांचल/स्वर्ण गिरी पहाड़ी पर स्थित इस दुर्ग का निर्माण नागभट्ट प्रथम द्वारा करवाया गया ।

✔️ इस दुर्ग को सोनगढ़ तथा सोनल गढ़ दुर्ग के नाम से भी जाना जाता है यह दुर्ग सुकड़ी नदी के तट पर स्थित है ।

✔️ सन् 1311-12 में इस दुर्ग पर अल्लाउद्दीन का अधिकार हो गया इस समय यहां का शासक कान्हड़देव तथा उसका पुत्र वीरम देव युद्ध में लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए तथा अल्लाउद्दीन खिलजी ने इस दुर्ग का नाम बदल कर जलालाबाद दुर्ग कर दिया । इस युद्ध का वर्णन पद्मनाभ ने अपने ग्रन्थ कान्हड़देव प्रबन्ध तथा वीरमदेव, सोनगरा री बातां में किया है

✔️ इस दुर्ग के बारे में हसन निजामी ने “ताज उल नासिर” में लिखा है कि “इस शक्तिशाली एवं अजेय दुर्ग के दरवाजे आज तक कोई नही खोल पाया । चाहे वह कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो”

✔️ इस दुर्ग में पीर मल्लिक शाह की दरगाह, जाबाली कुण्ड, जोगमाया मन्दिर तथा चामुण्डा माता मन्दिर स्थित है ।

भटनेर दुर्ग
(Bhatner Fort)

Bhatner-Fort
Bhatner-Fort

✔️ भटनेर दुर्ग मरूस्थल से घिरा होने के कारण यह धान्वन दुर्ग की श्रेणी में आता है ।

✔️ घग्घर नदी के तट पर स्थित भटनेर दुर्ग का निर्माण भूपत भाटी द्वारा करवाया गया ।

✔️ भटनेर दुर्ग को उत्तरी सीमा का प्रहरी कहा जाता है ।

✔️ बलबन के भाई शेर खाँ ने इस दुर्ग पर अधिकार कर लिया था ।

✔️ भटनेर दुर्ग में बलबन के भाई शेर खाँ की कब्र स्थित है ।

✔️ सन् 1001 में मोहम्मद गजनवी द्वारा तथा 1398 में तैमूर लंग द्वारा इस दुर्ग पर आक्रमण किया गया । तैमूर ने अपनी आत्मकथा तुजुक ए तैमूरी में लिखा है कि “इतना शक्तिशाली एवं मजबूत दुर्ग मैने कभी नही देखा”

✔️ सन् 1805 में बीकानेर के शासक सुरत सिंह ने जाब्ता भाटी से यह दुर्ग छिन लिया । विजय के इस दिन मंगलवार था, अतः इस दुर्ग का नाम हनुमानगढ़ रखा गया । सुरत सिह ने इस दुर्ग में हनुमान मन्दिर का निर्माण भी करवाया।

कोटा दुर्ग
(Kota Fort)

Kota-Fort
Kota-Fort

✔️ राज्य के कोटा जिले में इस दुर्ग का निर्माण बूंदी के शासक देवा सिंह के पुत्र जैत सिंह द्वारा करवाया गया। कोटिया भील पर विजय के उपलक्ष्य में जैत सिंह ने इस दुर्ग का निर्माण करवाया।

✔️ कोटा दुर्ग मुगल स्थापत्य कला का उदाहरण है ।

नोट :- कर्नल टॉड़ ने कोटा दुर्ग के परकोटे के बारे में लिखा है “सम्पूर्ण भारत में आगरे के किले के परकोटे को छोड़कर किसी भी किले का परकोटा इतना बड़ा नही है, जितना कि कोटा दुर्ग का”

नोट :- जैसलमेर दुर्ग का दोहरा परकोटा “कमरकोट” कहलाता है ।

शाहबाद दुर्ग
(Shahabad fort)

Shahabad-Fort
Shahabad-Fort 

✔️ इस दुर्ग को सलीमाबाद उपनाम से भी जाना जाता है । यह दुर्ग गिरी दुर्ग है, जो कि राज्य के बारां जिले के भामती पहाड़ी पर स्थित है ।

✔️ इस दुर्ग में अमीर खाँ पीडारी ने अपनी माता तथा बेगमों सहित शरण ली थी ।

✔️ इस दुर्ग में ऋषभदेव मन्दिर, लक्ष्मीनारायण मन्दिर स्थित है ।

शेरगढ़ दुर्ग (बारां)
(Shergarh Fort, Baran)

✔️ राज्य के बारां जिले में स्थित यह गिरी दुर्ग है । यह दुर्ग परवन नदी के तट पर स्थित है ।

✔️ शेरशाह सूरी के नाम पर इस दुर्ग का नाम शेरगढ़ रखा गया । शेरशाह सूरी न इस दुर्ग का जीर्णोद्वार करवाया ।

✔️ इस दुर्ग में प्रसिद्ध नवलखाँ तोप रखी हुई है ।

शेरगढ़ दुर्ग (धौलपुर)
(Shergarh Durg, Dhaulpur)

✔️ राज्य के धौलपुर जिले में स्थित यह राज्य का एकमात्र दुर्ग है जो तीनों ओर से तीन राज्यों की सीमाओं से घिरा हुआ है ।

✔️ माना जाता है कि इस दुर्ग का निर्माण मारवाड़ शासक मालदेव द्वारा करवाया गया ।

✔️ धौलपुर यहां के प्रथम शासक कीरत सिंह की राजधानी थी ।

✔️ कीरत सिंह द्वारा निर्मित प्रसिद्ध हनुहुंकार तोप इसी दुर्ग में स्थित है ।

✔️ शेरशाह सूरी का इस दुर्ग पर अधिकार रहा । तथा शेरशाह सूरी ने 1540 में इस दुर्ग का जीर्णोद्वार करवाया ।

नोट :- इस दुर्ग में शेरशाह सूरी के गुरू मीर सैयद खाँ की दरगाह स्थित है ।

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