मारवाड़ का इतिहास (Marwar ka Itihaas) (History of marwar)

 मारवाड़ का इतिहास
(History of marwar)

Marwar-Map
Marwar-Map

✔️ राजस्थान में स्थित अरावली के पश्चिम में स्थित क्षेत्र को मारवाड़ के नाम से जाना जाता है । मारवाड़ रियासत पर राठौड़ वंश ने शासन किया। राठौड़ वंश का मूल पुरूष अथवा पुरूष राव सिंहा को माना जाता है । राव सिंहा मूलतः कन्नौज निवासी (Kannoj) थे । राव सिंहा की मृत्यु के बाद वीरम देव (Veeram Dev)का पुत्र राव चुड़ा (Rao Chuda)इस वंश का सर्वाधिक प्रतापी शासक हुआ ।
✔️ राव चुड़ा ने अपने चाचा मल्लीनाथ के इन्दा परिहार के सहयोग से माण्डू के सुबेदार से मण्डोर दुर्ग (Mandor Durg) छिना तथा मण्डोर दुर्ग को अपनी राजधानी बनाया ।
✔️ राव चुड़ा ने अपने पुत्र रणमल Ranmal) के स्थान पर अपने छोटे पुत्र कान्हा को उत्तराधिकारी बनाया, जिससे उसका ज्येष्ठ पुत्र रणमल नाराज होकर मेवाड़ चला गया ।
नोट :- राव चुड़ा की सोनगरी रानी चाँद कंवर ने जोधपुर में चाँद बावड़ी का निर्माण करवाया
✔️ राज्य की प्रसिद्ध चाँद बावड़ी दौसा (Chand Bavadi Dausa) जिले की आभानेरी (Abhaneri) नामक स्थान पर स्थित है । यह अपनी कलात्मक मुर्तियों के लिये विख्यात है । कहा जाता है कि यहाँ बनी हुई सिढ़ीयों को गिना नही जा सकता ।
✔️ रणमल अपने पिता की मृत्यु के बाद मेवाड़ से आकर मारवाड़ का शासक बना । रणमल ने अपनी बहन हंसा बाई (Hansa Bai) का विवाह मेवाड़ के शासक राणा लाखा से इस शर्त पर किया था कि हंसा बाई से उत्पन्न पुत्र ही मेवाड़ का उत्तराधिकारी होगा ।
✔️ सन् 1426 में रणमल ने मेवाड़ की सेना की सहायता से मण्डोर पर अधिकार कर लिया ।
नोट :- सन् 1426 से 1438 तक राव रणमल मेवाड़ के साथ-साथ मारवाड़ का भी सर्वेसर्वा बना रहा ।
✔️ सन् 1438 में महाराणा कुम्भा ने कुछ सरदारों के प्रभाव में आकर राव रणमल का वध करवा दिया ।
नोट :- राव रणमल की हत्या उसकी प्रेयसी भारमली के सहयोग से सम्भव हो सकी ।

राव जोधा (1438 से 1489) (Rao Jodha)

✔️ मेवाड़ में राव रणमल की हत्या के समय उसका पुत्र जोधा मेवाड़ में ही था ।
नोट :- राव जोधा ने सन् 1459 में जोधपुर शहर की स्थापना की, और जोधपुर को अपनी राजधानी बनाया

✔️ महाराणा कुम्भा की दादी हंसा बाई के सद्प्रयत्नों से सन् 1456 में ‘आवल तथा बावल” (Aval Or Bhaval) की सन्धि सम्पन्न हुई । इस सन्धि के द्वारा तथा मारवाड़ की सीमा का निर्धारण कर लिया गया ।
✔️ राव जोधा को मारवाड़ रियासत में “सामन्त प्रथा’ का वास्तविक संस्थापक माना जाता है ।
✔️ राव जोधा ने चिड़िया टूक (Chidiya Took) पहाड़ी पर मेहरानगढ़ दुर्ग (Meharangarh Durg) का निर्माण करवाया । इस दुर्ग की आकृति मोर के पंख (Mor Ka Pankh)के आकार के समान है । यह राज्य का एकमात्र ऐसा दुर्ग है जिसकी नीव में जिन्दा व्यक्ति रजिया की बली दी गई थी। राव जोधा ने राठोड़ों की कुलदेवी नागणेची माता मन्दिर (Nagnechi Mata) का निर्माण करवाया । जोधा की हाड़ी रानी जसमादे ने दुर्ग के समीप तालाब का निर्माण करवाया ।
✔️ राव जोधा के बाद राव सान्तल, राव सुजा (Rao Santal, Rao suja) मारवाड़ के शासक बने ।
✔️ राव सुजा के उपरान्त उसके बड़े पुत्र राव बादाजी का पुत्र, राव गंगा
(Rao Ganga) मारवाड़ का शासक बना ।
✔️ राव गंगा ने मेवाड़ के शासक राणा सांगा की सहायता हेतु खानवा के युद्ध
(Khanwa ka Yudh) में अपनी सेनाये भेजी थी । अफीम के नशे में जोधपुर के किले से गिर जाने के कारण सन् 1531 में राव गंगा की मृत्यु हो गई । राव गंगा की मृत्यु के बाद उसका पुत्र मालदेव (Maldev) शासक बना । कुछ इतिहासकार मालदेव को पितृहन्ता करार देते है ।
✔️ सन् 1533 में मालदेव ने हीराबाड़ी के युद्ध (Heerabadi Ka Yudh) में नागौर के दौलत खाँ को पराजित किया ।
✔️ सन् 1541 में मालदेव ने बीकानेर पर आक्रमण किया । बीकानेर के शासक राव जैतसी (Rao Jetsi) युद्ध में मारे गये । सन् 1544 में मालदेव तथा शेरशाह सुरी के मध्य गिरी सुमेल का युद्ध (Giri Sumel Ka Yudh) लड़ा गया । इस युद्ध में शेरशाह सुरी हारते-हारते बचा था ।
नोट :- शेरशाह सुरी ने इस युद्ध में विजय के बाद कहा था “मैं एक मुट्ठीभर बाजरे के खातिर हिन्दुस्तान की बादशाहत खो देता”
✔️ शेरशाह सुरी ने मालदेव के दो वीर सेना नायक जैता और कूपा (Jaita Or Koopa) की वीरता से प्रसन्न हो कर कहा था कि काश जैता और कूपा जैसे दो वीर सेना नायक मेरे पास होते तो आज में एकछत्र हिन्दुस्तान का एकछत्र शासक होता। सन् 1545 में कालींजरा घेरे के दौरान शेरशाह सूरी की मृत्यु हो गई, तथा मालदेव ने पुनः मारवाड़ पर अधिकार कर लिया ।
नोट :- फारसी इतिहासकारों ने मालदेव को हसमत वाला शासक कहा है ।

राव चन्द्रसेन (1562 से 1581) (Rao Chandrasain)

✔️ मालदेव की मृत्यु के उपरान्त मारवाड़ में गृह क्लेश की स्थिती उत्पन्न हो गई । मालदेव ने अपनी चहेती रानी स्वरूपदे के प्रभाव में आकर अपने ज्येष्ठ पुत्र राम को निर्वासित कर दिया । सन् 1570 में नागौर दरबार (Nagaur Darbar) के समय राजस्थान के अधिकांश राजपुत शासकों ने अकबर की अधिनता स्वीकार कर ली तथा अपनी पुत्रियों के विवाह मुगलों के साथ सम्पन्न कर दिये । नागौर में अकबर ने 1570 में शुक्र तालाब (Sukra Talab) का निर्माण करवाया । मारवाड़ शासक राव चन्द्रसेन (Rao Chandrasain) भी इस सम्मेलन में उपस्थित हुआ था । किन्तु उसने अकबर की अधिनता स्वीकार नही की ।

नोट :- मारवाड़ शासक राव चन्द्रसेन को प्रताप का अग्रगामी, मारवाड़ का प्रताप तथा भूला-बिसरा राजा कहा जाता था।

✔️ राव चन्द्रसेन की छतरी वर्तमान पाली जिले में स्थित सारण की पहाड़ियों (Saran Ki Pahadi) में है । इसी स्थान पर चन्द्रसेन की मृत्यु हुई थी । सन् 1583 से 1595 तक मोटा राजा उदय सिह (Mota raja uday singh) ने शासन कार्य किया । सन् 1587 में इन्होने अपनी पुत्री मानी बाई का विवाह अकबर के पुत्र सलीम जहांगीर से सम्पन्न कर दिया । मानी बाई को इतिहास में मानमती, जगत गोसाई, जोधाबाई (Manmati, Jagat Gosae, Jodhabai)के नाम से भी जाना जाता है ।

✔️ मोटा राजा उदय सिंह मारवाड़ के प्रथम शासक थे जिन्होने मुगलों की अधीनता स्वीकार की तथा मुगलों से वेवाहिक सम्बन्ध स्थापित किये ।

✔️ सन् 1595 से 1619 तक महाराजा सुरसिंह (Maharaja Surajsingh)ने शासन किया । इन्होने मेवाड़ अभियान में खुर्रम का साथ दिया था । खुर्रम शाहजहां के बचपन का नाम था ।

✔️ सन् 1619 से 1638 तक मारवाड़ के इतिहास में महाराजा गज सिंह (Maharaj Gajsingh) ने शासन कार्य किया । इनका राज्याभिषेक बुरहानपुर (Burahanpur) में हुआ था । जहांगीर ने इन्हे इनकी वीरता से प्रसन्न होकर “दल मंथन” (Dal Manthan)की उपाधी प्रदान की थी।

✔️ सन् 1638 से 1978 तक मारवाड़ के इतिहास में महाराणा जसवन्त सिंह ने शासन किया ।

✔️ गज सिंह ने अपनी प्रीति पात्रीरानी अनारा बेगम के प्रभाव में आकर जसवन्त सिंह को अपना उत्तराधिकारी बनाया ।

नोट :- जसवन्त सिंह का जन्म बुरहानपुर में हुआ था तथा इनका राज्याभिषेक आगरा में हुआ ।

✔️ उत्तराधिकार के युद्ध में जसवन्त सिंह ने शाहजहां के ज्येष्ठ पुत्र दाराशिको (Darashiko) का साथ दिया । किन्तु उत्तराधिकार के युद्ध में औरंगजेब की विजय हुई ।

नोट :- “नैणसी री ख्यात और मारवाड़ रा परगना री विगत’ (Nainasi Ri Khyat and Marwar Ra Pargana Ri Vigat) के लेखक जसवन्त सिंह के मंत्री मुहणोत नेणसी थे ।

✔️ मुन्शी देवी प्रसाद ने मुहणोत नैणसी को राजपुताने का अबुल फजल (Abul Fajal) कहा है ।

✔️ जसवन्त सिंह की रानी अतिरंगदे ने जान सागर (Jan sagar) बनवाया जिसे शेखावत जी का तालाब भी कहते है जबकि इसकी दुसरी रानी जसवन्त दे ने सन् 1663 में रायका बाग (Rayaka baag) बनवाया । जोधपुर के बागों को समृद्ध करने के लिये जसवन्त सिह ने काबुल से अनार के पेड़ों को लाकर कागा के बाग में लगवाया ।

नोट :- जसवन्त सिंह की पत्नी जसवन्तदे का कथन है “राजपुत या तो युद्ध में विजय होकर लोटते है या मरकर लोटते है” |

✔️ जसवन्त सिंह की मृत्यु के बाद ओरंगजेब मारवाड़ को हड़पना चाहता था। दुर्गा दास राठौड़ के सद्प्रयत्नों के चलते अजीत सिंह (Ajit Singh) मारवाड़ का शासक बना । अजित सिंह ने मुगल बादशाह फर्रुखसियर (Farrukhasiyar) से समझौता कर लिया तथा अपनी पुत्री इन्द्र कंवरी (Indr Kanvari) का विवाह उससे कर दिया ।

✔️ सन् 1724 में अजित सिंह के बेटे अभय सिंह (Abhay Singh) ने अपने छोटे भाई बक्ष सिंह के द्वारा अजित सिंह की हत्या करवा दी ।

✔️ अभय सिंह के काल में सन् 1730 में जोधपुर में खेजड़ली ग्राम ( Khejadli Gram) की घटना घटी ।

नोट :- दुर्गादास राठौड़ की छतरी क्षिप्रा नदी के तट पर उज्जैन में स्थित है।

✔️ सन 1803 से 1843 तक महाराजा मान सिंह ने शासन किया इनके गुरू का नाम आयस देवनाथ था । इन्होने जोधपुर के नाथ सम्प्रदाय के महामन्दिर का निर्माण करवाया था । ये जोधपुर रियासत के अंतिम शासक थे । इन्होने 1818 में ब्रिटीश इस्ट इण्डिया कम्पनी के साथ सन्धि कर ली ।

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