महाराणा सांगा (Maharana Sanga / Sangram Singh first)

 मुगल-राजपूत सम्बन्ध

(Mughal-Rajput relations)

महाराणा-सांगा
महाराणा-सांगा

महाराणा सांगा (1509 से 1528) :-
(Maharana Sanga)

✔️ डॉ. ओझा के अनुसार 24 मई 1509 को मेवाड़ के इतिहास में राणा सांगा का अभिषेक हुआ ।
✔️ इन्हे संग्राम सिंह प्रथम के नाम से भी जाना जाता है । राणा सांगा को वन आई साइड़ मेन, अंतिम हिन्दू शासक, सैनिकों का भग्नावशेष कहा जाता है ।
✔️ सन् 1517 के खातोली के युद्ध में महाराणा सांगा ने इब्राहीम लोदी को पराजित किया, यह एक निर्णायक युद्ध था ।
नोट :- वर्तमान में खातोली/घाटोली नामक स्थान राज्य के कोटा जिले में स्थित है । रियासतकाल में यह स्थान बूंदी जिले में था ।
✔️ राणा सांगा ने 1518-19 के बाड़ी के युद्ध में इब्राहिम लोदी की सेनाओं का नेतृत्व मिया मक्खन व मिया हुसैन ने किया ।
✔️ सन् 1519 में राणा सांगा व मालवा के महमूद द्वितीय के मध्य गागरोन का युद्ध लड़ा गया । इस युद्ध में विजयश्री राणा सांगा के हाथ लगी ।
✔️ जनवरी 1527 में राणा सांगा तथा बाबर की सेनाओं के मध्य भरतपुर का युद्ध लड़ा गया । इस युद्ध में राणा सांगा की विजय हुई । (बयाना का युद्ध)
✔️ राणा सांगा ने इस युद्ध के बाद का समय व्यर्थ गंवाया जिसका परिणाम उसे खानवा के युद्ध की पराजय के रूप में भुगतना पड़ा ।
✔️ संग्राम सिंह प्रथम राजपूत थे जिन्होंने हिन्दू बादशाह की उपाधि धारण की थी।
✔️ 1526 ईश्वी में बाबर ने पानीपत के प्रथम युद्ध में दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी को पराजित करके भारत में मुग़ल वंश की नींव रखी।
✔️

खानवा का युद्ध :-
(Khanva ka Yudh)

✔️ रियासत काल में खानवा नामक स्थान जयपुर में स्थित था । वर्तमान में यह स्थान गम्भीर नदी के तट पर भरतपुर जिले की रूपवास तहसील में स्थित है ।
✔️ काबुल से आये एक ज्योतिष मोहम्मद शरीफ ने इस युद्ध में बाबर के पराजय की घोषणा की ।
✔️ 17 मार्च 1527 को राणा सांगा व बाबर की सेनाओं के मध्य खानवा का युद्ध लड़ा गया । इस युद्ध को पेती पारवान की प्रथा के तहत आमेर का पृथ्वीराज कछवाहा, बीकानेर का राव कल्याणमल बागड़िया, डूंगरपुर का उदय सिंह, मारवाड़ के राव गांगा का पुत्र राव मालदेव, सादड़ी का झाला अज्जा, गोगुन्दा का झाला सज्जा, मेड़ता का रायमल राठौर, हसन खाँ मेवाती अलवर, राजा भारमल ईडर आदि ने राणा सांगा की ओर से भाग लिया था ।
✔️ युद्ध स्थल में घायल राणा सांगा को आमेर का शासक पृथ्वीराज युद्धस्थल से बाहर ले आया । इस समय झाला अज्जा ने राणा सांगा का छत्र धारण करके युद्ध का संचालन किया ।
✔️ राणा सांगा को दौसा के बसवा नामक स्थान पर लाया गया । यहां आज भी राणा सांगा स्मारक है । राणा सांगा का अंतिम दाह संस्कार माण्डलगढ़ (भीलवाड़ा) में किया गया । यहां राणा सांगा का समाधि स्थल बना हुआ है। ✔️ बाबर ने खानवा के युद्ध को जेहाद घोषित किया तथा खानवा युद्ध की विजय के बाद गाजी की उपाधि धारण की ।
✔️ खानवा युद्ध में रायसीना के राजा सिलह्दी तंवर ने राणा सांगा के साथ विश्वास घात किया था।
✔️ खानवा युद्ध में बाबर ने पहली बार राजपूताने में तुलगमा पध्दति व तोपखाने का प्रयोग किया।
✔️ खानवा युद्ध में जितने के पश्चात बाबर ने गाजी की उपाधि धारण की थी।
✔️ राणा सांग की मृत्यु के पश्चात् समस्त राजपूतो ने 1528 ईश्वी में चंदेरी के राजा मेदिनीराय के नेतृत्व में बाबर के विरुद्ध चंदेरी का युद्ध लड़ा इस युद्ध में राजपूत पराजित हुए।
✔️ बाबर ने इस युद्ध में विजय के पश्चात् राजपूतो के सिरों की मीनार बनवायी थी।
✔️ राणा सांगा के पुत्र भोजराज के साथ मीरा बाई का विवाह हुआ था।
✔️ भोजराज की मृत्यु 1523 ईश्वी में हुई थी।
✔️ मीरा बाई ने राणा विक्रमादित्य के अत्याचारों से तंग होकर अपना अंतिम समय रणछोड़ जी मंदिर (द्वारिका गुजरात ) में व्यतीत किया।
नोट :- कर्नल टॉड़ के अनुसार इस युद्ध में राणा सांगा के साथ 7 उच्च कोटी के राजा 9 राव तथा 104 सरदार थे ।

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