Government legitimacy meaning

राज्य में वैधता एवं सामाजिक-आर्थिक रूपांतरण

Government legitimacy meaning
Government-legitimacy


(LEGITIMACY IN STATE AND SOCIO-ECONOMIC TRANSFORMATION)

परिचय (Conclusion):-
Government legitimacy meaning in Hindi?

विश्व के प्रजातात्रिक व्यवस्थाओं के अस्तित्व में आने के बाद से अब तक काफी विकास हुआ है।

भारत इस क्लब में देर से शामिल हुआ है, हालांकि यह दुनिया की सबसे जीवंत लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, ताकतों और कमजोरियों के साथ देश के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन को भारत की सबसे प्रमुख आकांक्षा माना जा सकता है।

समान अनुगूंज हमें स्वतंत्रता संग्राम की संपूर्ण अवधि में, संविधान सभा और भारत के संविधान की बहस में भी सुनाई देती है।

इस दिशा में सरकार द्वारा कई प्रयास किए गए हैं, हालांकि प्रदर्शन वांछित स्तरीय नहीं रहे हैं।

इसके लिए कई छोटे-मोटे कारण जिम्मेदार हैं, लेकिन इसके आगे न बढ़ पाने का सबसे प्रमुख कारण वित्तीय संसाधनों की कमी है।

सरकारों को करों के जरिए प्राप्त होने वाला राजस्व केवल आय का ही एक रूप नहीं है, बल्कि यह देश की राजकोषीय संभावनाओं व क्षमताओं के संवर्द्धन का एक उपाय भी है।

भारत अब तक अपनी वास्तविक राजकोषीय संभावनाओं को छू पाने में सक्षम नहीं हो सका है।

हालांकि कर संग्रह की इसकी संभावना जीडीपी के 53 प्रतिशत होने का अनुमान है, लेकिन यह अभी केवल 17 प्रतिशत ही संगृहीत करता है।

इसका अर्थ है कि एक विशाल राजकोषीय क्षमता अभी भी अनुपलब्ध है।

देश के सम्मुख संसाधन संकट को देखते हुए, यह अर्थव्यवस्था की वित्तीय क्षमता को बढ़ाने की दिशा में देश द्वारा बढाए गए कदमों की दृष्टि से महत्वपूर्ण घड़ी है।

भारत के मामले में, ‘आय पुनर्वितरण’ (2016-17 के आर्थिक सर्वेक्षण द्वारा यूबीआई का हालिया प्रस्ताव) के बारे में कहा जाता है-

कि यह सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन को बढ़ावा देने का एकमात्र सबसे महत्वपूर्ण तरीका है, बशर्ते कि सरकार पुनर्वितरण की प्रक्रिया के लिए पर्याप्त मात्रा में निधि की व्यवस्था कर पाए।

अर्थव्यवस्था के राजकोषीय क्षमता का दोहन करने के लिए एक बहुत ही कमजोर कड़ी राज्य’ में कम वैधता रही है।

विश्व अनुभव
(Global Experience):-

राज्य में उच्च वैधता सामान्य रूप से लोकतंत्र को मजबूत करती है।

अर्थव्यवस्था की वित्तीय क्षमता के दोहन के मामले में राज्य में वैधता को सबसे महत्वपूर्ण चरों के रूप में पाया गया है।

इस संबंध में, विकसित देशों का इतिहास दो महत्वपूर्ण चीजों का सुझाव देता है:-

  1. राज्य के सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य ‘आवश्यक सेवाओं’ जैसे कि भौतिक सुरक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, बुनियादी ढांचा आदि की आपूर्ति करना है। 
  2. राज्य की पुनर्वितरक की भूमिका बाद में आती है।

ऊपर वर्णित अनुक्रमण (Sequencing) आकस्मिक नहीं है।

जब तक समाज में मध्यम वर्ग को यह महसूस नहीं होता कि इसे सरकार राज्य से कुछ फायदे की प्राप्ति होगी, वह आय पुनर्वितरण के लिए चलाए जा रहे सरकार के किसी भी मुहिम का समर्थन (यानी वित्त) करने के लिए तैयार नहीं होगा।

दूसरे शब्दों में, हम यह कह सकते हैं कि सरकार को अपनी सार्वजनिक सेवा वितरण की प्रभावशीलता से आय को पुनर्वितरित करने के लिए वैधता कमाने की जरूरत है।

अगर सरकार सार्वजनिक सेवाओं के प्रभावी वितरण की गारंटी के बिना आय का पुनर्वितरण करने की कोशिश करती है, तो मध्यम वर्ग ‘राज्य से बाहर निकलना’ (अल्बर्ट हर्शमैन, 1978 का प्रसिद्ध विचार) आरंभ कर देगा।

आखिरकार मध्यम वर्ग आय पुनर्वितरण की योजनाओं के वित्त पोषण से दूर हो जाएगा।

करदाताओं की कम संख्या, बर्हिगमन का एक महत्वपूर्ण संकेत है। भारत के मामले में यह बहुत ही अधिक स्पष्ट है।

राज्य पर दबाव कम करने से, मध्यम वर्ग के बाहर निकलने से इसकी कड़वाहट कम हो जाएगी और इसकी वैधता आगे की दिशा में बढ़ेगी, जिससे भविष्य में और अधिक निकास हो जाएगा।

एक राज्य जिसे अक्षम पुनर्वितरण के लिए मजबूर किया जाता है, उसके अपर्याप्त पुनर्वितरण, कम वैधता, कम संसाधन, गरीब मानव पूंजी निवेश, कमजोर क्षमता और आगे भी ऐसे ही बहुत सारे दुष्चक्रों में फंसने का जोखिम बढ़ जाता है।

केंद्रीय बजट 2017-18 में आय और खपत की विसंगति विशेष रूप से उजागर की गई है जहां विभिन्न आय समूहों के अनुपात में करदाता छोटे हैं।

आज के लिए सुझाव
(Suggestions for Today):-

यह सुझाव दिया जाता है कि राज्य में वैधता को बढ़ावा देने के लिए देश की सरकारों को अपने कार्यों का निष्पादन अधिकतम प्रतिबद्धताओं के साथ करना चाहिए।

कुछ प्रमुख कदम जो राज्य द्वारा उठाए जा सकते हैं, निम्नलिखित हैं:

  1. आम नागरिकों से जिस किसी भी अनिवार्य नागरिक सेवाओं को उपलब्ध कराने का वादा किया गया हो वह उन तक स्थायी आधार पर एक प्रभावी, पारदर्शी और अत्यधिक भेदभावरहित तरीके से अवश्य पहुंचाया जाना चाहिए।
  2. क्रोनी (Crony) पूंजीवाद के दृश्यमान उदाहरणों की अनिवार्यतः जांच होनी चाहिए, जिसके तहत कई बार सरकारी संपत्तियां कॉर्पोरेट घरानों के एक चुनिंदा समूहों को औने-पौने दामों पर सौंप दी जाती हैं।
  3. सुशासन का मुद्दा केवल कागज पर नहीं रहना चाहिए बल्कि नागरिकों को यह दिखाना चाहिए कि सरकार अच्छे प्रशासन को बढ़ावा देने के लिए कितनी प्रतिबद्ध है। 
  4. भ्रष्टाचार के खतरे को पारदर्शिता की मदद से, शक्ति के अधिक से अधिक वितरण के द्वारा और हितधारकों के बड़े समूह को शामिल कर, निश्चित तौर पर जड़-मूल से समाप्त किया जाना चाहिए। 
  5. सरकार के द्वारा लोगों की भागीदारी को तेजी से बढ़ाया जाना चाहिए

निष्कर्ष (Conclusion):-

पिछले कुछेक सालों में, हमने उपर्युक्त क्षेत्रों पर भारत सरकार का जोर पहले से कहीं ज्यादा होते देखा है।

‘न्यूनतम सरकार और अधिकतम सुशासन’ के विचार को बढ़ावा देने के लिए सरकार न सिर्फ सुशासन के कारक को बढ़ावा दे रही है बल्कि आम जनता को भी सशक्त बना रही है।

राज्यों को ‘नीति आयोग’ को (राज्य स्तर पर सुशासन कहीं ज्यादा नाकाम रही है) ‘सुशासन के पहिए’ के तौर पर देखा जा रहा है।

सरकार पारदर्शिता को बढ़ावा देने, व्यवस्था से भ्रष्टाचार को दूर करने एवं शासन-प्रशासन में गति लाने के लिए सूचना-प्रौद्योगिकी के विभिन्न उपकरणों का उपयोग हर संभव क्षेत्र में कर रही है।

ठीक इसी तरह, टैक्स अनुपालन बढ़ाने के लिए एवं ‘कैशलेस अर्थव्यवस्था’ को बढ़ावा देने के लिए ध्यान अब गैर-दंडात्मक उपायों पर पहले से कहीं ज्यादा केंद्रित किया गया है।

सार्वजनिक संपत्तियों की नीलामी पूरी तरह से ऑनलाइन प्रक्रिया बन गई है, जिसका उद्देश्य क्रोनी पूंजीवाद की समस्या पर लगाम लगाना है।

इसके अलावा, सरकार नागरिकों के जीवन में खुशी के स्तर को बढ़ावा देने के लिए नागरिकों के बीच एवं सरकार और जनता के बीच ‘सामाजिक विश्वास’ और ‘सहयोग’ को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

देश में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन के वांछित उद्देश्यों को हासिल करने के लिए लोगों के व्यवहार को संशोधित करने के पक्ष में एक घोषित बदलाव देखने को मिल रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में हाल की नीतिगत क्रियाओं से राज्य में निश्चित रूप से वैधता के स्तर में सुधार होगा।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,376FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles