उर्जा परिदृश्य (Energy Landscape)

 उर्जा परिदृश्य

➡️ मानव इनका उपयोग भोजन पकाने, प्रकाश करने, कृषि कार्य करने तथा परिवहन आदि के लिए करता है।

➡️ सामान्यतः इन्हे दो भागो में विभाजित किया जाता है- नव्यकरणीय तथा अनव्यकरणीय

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➡️ सभी प्रकार के नव्यकरणीय उर्जा संसाधन प्राकृतिक गतिविधियों के परिणाम स्वरूप होते है जिससे उनका असीमित उपयोग किया जा सकता है तथा से पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत कम हानिकारक होते है।

➡️ पेट्रोलियम उत्पाद, कोयला, प्राकृतिक गैंस आदि अनव्यकरणीय उर्जा संसाधन है, जो पर्यावरण प्रदुषण के लिए भी जिम्मेवार होते है।

➡️ विश्व का जीवाश्म ईंधन तथा यूरेनियम का भंडार सीमित है और धीरे धीरे यह अपनी समाप्ति की ओर अग्रसर है।

पारम्परिक उर्जा के स्त्रोत :-

कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैंस आदि को पारम्परिक उर्जा के स्त्रोत कहा जाता है। इन स्त्रोतो का निर्माण वनस्पतियो और जीवो के भूमि में दबने से हुआ है, इसलिए इन्हे जीवाश्म उर्जा स्त्रोत भी कहा जाता है। ये ईंधन भूगर्भ मे करोड़ो वर्षों में बनते है। चूंकि ये उर्जा के स्त्रोत अनव्यकरणीय है अतः इनका अंधाधुन दोहन निकट भविष्य में हमें इन संसाधनो से विहीन कर देगा।

गैर पारम्परिक/वैकल्पिक/अपारम्परिक उर्जा के स्त्रोत :-

इन उर्जा स्त्रोतो का उपयोग परम्परागत उर्जा के स्त्रोतो के स्थान पर किया जाता है इसलिए इन्हे वैकल्पिक उर्जा स्त्रोत भी कहा जाता है। ये स्त्रोत नव्यकरणीय है अर्थात सतत व अक्षय है और इनका बार बार प्रयोग किया जा सकता है। ये पर्यावरण के लिए भी कम हानिकारक है। परन्तु वर्तमान तकनीकी परिवेश में यें अधिक खर्चीले है जिसके कारण इनके अपनाए जाने में बाधा आ रही है।

महत्वपूर्ण वैकल्पिक उर्जा के स्त्रोत –

सौर उर्जा

उर्जा-परिदृश्य
उर्जा-परिदृश्य

➡️ सूर्य उर्जा का मूल केन्द्र तथा अक्षय भण्डार है। इसलिए सौर उर्जा को सबसे महत्वपूर्ण वैकल्पिक उर्जा का स्त्रोत माना जाता है।

➡️ सूर्य से सीधे प्राप्त होने वाली उर्जा विकिरण उर्जा कहलाती है।

➡️ इस उर्जा को ताप व विद्युत उर्जा में परिवर्तित किया जाता है। जिसे क्रमशः उर्जा का उष्मीय रूपान्तरण तथ विद्युतीय रूपान्तरण कहा जाता है।

➡️ सौर उर्जा का उष्मीय रूपान्तरण करने के लिए सोलर वाटर हीटर, सोलर कुकर, सालर ड्रायर, सोलर सिस्टम व काष्ठ शुष्कन नामक यंत्रो का प्रयोग किया जाता है।

➡️ सौर प्रकाश का विद्युत में रूपान्तरण करने के लिए सोलर पम्प, सोलर लाइटिंग, सोलर डी.सी. आदि यंत्रो का प्रयोग किया जाता है।

गोवर्धन योजना –

पेयजल व स्वच्छता मंत्रालय ने गोबर (गैल्वनाइजिंग आर्गेनिक बायो एग्रो रिसोर्सेज) -धन योजना शुरू की है।

इस योजना को स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के हिस्से के रूप में कार्यान्वित किया जा रहा है। इसमे गांवो को स्वच्छ रखने के उद्देश्य से मवेशियो के कचरे से उर्जा उत्पादन पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए कार्य किया गया है।

इस योजना का उद्देश्य नए ग्रामीण आजीविका के अवसर पैदा करना व किसानो तथा अन्य ग्रामीणो की आय को बढाना है।

बायोगैस

➡️ वनस्पति व वनस्पति अवशेष, नगरीय कुड़ा करकट, पशु एवं मानव मल, जलीय वनस्पतियों एवं प्राणीयों की जैविक क्रियाओ से उत्पन्न सभी ज्वलनशील पदार्थ जैवभार कहलाते है।

➡️ हमारे देश में ईंधन की आवश्यकता की पूर्ति के लिए लगभग 800 लाख मेट्रिक टन से भी अधिक गोबर जला दिया जाता है।

➡️ इसके साथ ही 500 लाख टन घास फूस व अन्य कृषि अवशेषो को जला दिया जाता है जिससे लगभग 2 लाख टन नाइट्रोजन उर्वरक की हानि होती है।

➡️ इस बायोमास को तकनीकी ढंग से प्रयुक्त करके बायोगैस उत्पन्न की जा सकती है जिससे ताप एवं यांत्रिक उर्जा प्राप्त की जा सकती है।

➡️ इस तकनीक में बायोमास को सड़ाकर उससे मीथेन गैस उत्पन्न की जाती है जो नीली लौ के साथ जलती है।

➡️ इस गैस का उपयोग भोजन बनाने, बल्ब जलाने, पम्पिंग सेट चलाने आदि के लिए किया जाता है और गैस निकलने के बाद बचा हुआ पदार्थ कृषि कार्यो में उर्वरक के रूप में प्रयुक्त किया जाता है।

➡️ यदि इस तकनीक का वैज्ञानिक ढंग से उचित उपयोग किया जाए तो अनुमानतः देश से 70 घनमीटर मीथेन गैस प्राप्त होगी जो लगभग 16 करोड़ टन लकड़ी के बराबर उष्मा पैदा करेगी।

➡️ बायोमास का समुचित उपयोग करने के लिए गोबर गैस व बायो गैस नामक दो संयत्रो का प्रयोग किया जाता है।

ज्वारीय उर्जा :-

➡️ ज्वारीय उर्जा समुद्र से प्राप्त एक अन्य प्रकार की उर्जा है जो जल स्तर के उतार व चढाव के अन्तर से प्राप्त की जाती है।

➡️ ज्वार चालित स्टेशनो की निर्माण लागत ताप विद्युत स्टेशन की तुलना में दोगुनी होती है।

➡️ इसकी सबसे बड़ी कमी यह है कि इससे ज्वार आने पर ही विद्युत उत्पादन किया जा सकता है, जबकि भारत की तटीय सीमा जो 6100 किमी लम्बी है पर बहुत कम ऐसे स्थान है जहां पर इतना ज्वार आता हो जिससे विद्युत उत्पादन किया जा सके।

हाइड्रोजन

➡️ वनस्पतियों में प्रकाश संशलेषण के समय पौधे उर्जा को ग्रहण करते है और अपने अन्दर विद्यमान जल को आण्विक ऑक्सीजन, हाइड्रोजन आयन तथा मुक्त इलेक्ट्रोनों में विखण्डीत कर देते है।

➡️ हाइड्रोजन आयन और मुक्त इलेक्ट्रोनों के संयोग से हाइड्रोजन अणु बनते है। इनके निर्माण में हाइड्रोजिनेट नामक एन्जाइम की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

➡️ आणविक हाइड्रोजन जीवीत पौधो से प्राप्त की जा सकती है।

➡️ वर्तमान में हाइड्रोजन प्राप्ति का सबसे प्रमुख स्त्रोत मीथेन गैंस है।

➡️ हाइड्रोजन की प्राप्ति रद्दी कागज तथा लकड़ी से भी की जा सकती है।

भूतापीय उर्जा

➡️ गर्म जलकुण्ड या भाप अथवा गर्म झरनो के उपर की तरफ प्रवाहित होने वाले तत्प भूगर्भ के जल का उपयोग टर्बाइन चलाने एवं भू तापीय शक्ति संयंत्र में विद्युत उत्पादन के लिए किया जा सकता है।

➡️ लद्दाख में प्यूगा नामक स्थान पर एक प्रायोगिक परीक्षण वृत की स्थापना भू तापीय अंतराल को गर्म करने की जांच करने के लिए की गई है।

एल्कोहल

➡️ द्रव ईंधन के रूप में प्राप्त अल्कोहल का उपयोग वैकल्पिक उर्जा स्त्रोत के रूप में किया जा सकता है।

➡️ स्टार्च से किण्वन प्रक्रिया द्वारा एल्कोहल तैयार किया जाता है।

➡️ औद्योगिक स्तर पर एल्कोहल उत्पादन के लिए गन्ना, चुकंदर व कसावा नामक फसले उपयोगी है।

➡️ कसावा एक ऐसी वनस्पति है जो कम उर्वर भूमि में भी उग सकती है। इसे सुखाकर लम्बे समय तक प्रयोग किया जा सकता है।

➡️ एक टन कसावा से लगभग 150 लीटर एल्कोहल तैयार किया जा सकता है।

➡️ एल्कोहल का प्रयोग पेट्रोल के साथ मिलाकर किया जाता है। पेट्रोल में इसका मिश्रण इथेनाल कहलाता है। इसके प्रयोग से प्रदुषण पर भी नियंत्रण किया जा सकता है।

➡️ इथेनाल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम (EBP) जनवरी 2003 में शुरू किया गया। इसके बाद भारत के 9 राज्यो व 4 केन्द्र शासित प्रदेशो में इथेनाल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम शुरू किया गया।

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