Dungarpur (डुंगरपुर) District Jila Darshan

डुंगरपुर

Dungarpur (डुंगरपुर) District Jila Darshan
dungarpur-district-map

उपनाम :- बागड़ का पुष्कर, डुंगरिया भील की ढाणी व भीलो की पाल व पत्थरो तथा पहाड़ो की नगरी।

आदिवासीयो का का कुम्भ – वेणेश्वर धाम।

परिचय
डुंगरपुर मे रावल वीर सिंह द्वारा डुंगरिया नामक भील सरदार की हत्या करके इस क्षेत्र पर अधिकार किया गया।
इसे मेवल क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है।
डुंगरपुर हरे व काले रंग की मुर्तियो के लिए जाना जाता है।
डुंगरपुर का प्रमुख नृत्य पेंजण है।
डुंगरपुर राज्य प्रजामण्डल की स्थापना भोगीलाल पाण्ड्या द्वारा की गई।
र्कक रेखा इसकी सीमा को छुकर निकलती है।
यहीं मुरला गणेश मेला आयोजित होता है।
1356 मे रावल वीरसिंह के पोते डुंगरसिंह ने डुंगरपुर जिले की तथा 1458 मे डुंगरसिंह द्वारा डूंगरपुर कस्बे की स्थापना की गई।
देश का पहला जनजाति क्षेत्र का महिला बैंक डुंगरपुर के बरबूदनिया गांव मे स्थापित किया गया है।
सोम, माही व जाखम नदीयों के किनारे संगम पर वेणेश्वर तीर्थ स्थल है जिसे बेणेश्वर धाम कहा जाता है।
यहां की प्रमुख सिंचाई परियोजना सोम–कमला-अम्बा सिंचाई परियोजना है।

स्थान विशेष

जूना महल – 1500 फीट की उंचाई पर स्थित 13 वीं सदी का महल। इसे रावल वीरसिंह ने बनवाया
गंवरी बाई का मन्दिर – इसे बागड़ की मीरा भी कहा जाता है। इसे महारावल सिंह ने बनवाया।
नवल खां बावड़ी – प्रीमल देवी द्वारा निर्मित
चतुर्भुज जी का मन्दिर – आसकरण द्वारा निर्मित
श्रीनाथ जी का मन्दिर – महारावल पुंजा द्वारा निर्मित
एडवर्ड समुद्र – विजयसिंह द्वारा निर्मित
एक थम्बिया महल – यह एक शिवज्ञानेश्वर शिवालय है जिसे इस नाम से जाना जाता है। इसे राजमाता ज्ञान कुंवर की स्मृती मे शिवसिंह ने बनवाया
नाना भाई व कालीबाई उद्यानत्याग, तपस्या और बलिदान की गौरव गाथा से युक्त नानाभाई खांट व कालीबाई के नाम पर निर्मित उद्यान
राड रमण – होलिका दहन के दुसरे दिन यहां राड का आयोजन होता है।
गवरी नृत्य – यहां का प्रमुख नृत्य है जो मुख्यतः वर्षा ऋतु मे किया जाता है।
गलियाकोटदाउदी बोहरा सम्प्रदाय के सैयद फर्खरूद्दीन की मस्जिद व प्रमुख तीर्थ स्थल
बेरेश्वर का मेला राजस्थान के आदिवासी अंचल वागड़ प्रदेश की जीवनदायिनी नदी माही के तट पर प्रतिवर्ष वैशाख पूर्णिमा के दिन यह मेला आयोजित किया जाता है।
देव सोमनाथ – स्थापत्य कला का बेजोड़ नमुना सफेद पत्थरो से बना यह प्राचीन शिव मन्दिर है जो सोम नदी किनारे बसा है। इसका निर्माण 12 वीं सदी मे किया गया है। मन्दिर मे किसी भी प्रकार के चुने या सीमेंट का प्रयोग नही किया गया है।
साबला – यहां संत मावजी की पीठ स्थित है।

खनिज

घीया स्टोन/सॉफटस्टोन/मुलायम पत्थरदेवल, बजवाड़ा, थाना, पिपलोद, पंचपुर एंव बोड़ावली क्षेत्र

एस्बेस्टोस – देवल, खेपारू, पीपरदा, मलवा, जकोल व डुंगरपुरसारभ

मेटनेसाइट– खेल, पीठ व डुंगरशरण में

जिला विशेष

➺ राज्य मे सबसे ज्यादा ग्रामीण जनसंख्या प्रतिशत वाला जिला

राज्य मे सबसे ज्यादा फलोराइट डुंगरपुर के माडों की पाल की खानो मे पाया जाता है।

राज्य मे सर्वाधिक अनुसुचित जाति जनसंख्या वाला जिला –3.8%

सर्वाधिक अनुसुचित जनसंख्या लिंगानुपात वाला जिला –1000

2011 मे सर्वाधिक लिंगानुपात वाला जिला –994

2001 मे सर्वाधिक लिंगानुपात वाला जिला –1022

0-6 वर्ष आयु वर्ग मे सबसे कम नगरीय लिंगानुपात, सबसे कम पुरूष व महिला लिंगानुपात वाला जिला

लिंगानुपात मे सर्वाधिक कमी वाले जिले डुंगरपुर व उदयपुर है।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,432FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles