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राजस्थान का अपवाह तन्त्र (Drainage system of rajasthan) - gk website
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राजस्थान का अपवाह तन्त्र (Drainage system of rajasthan)

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Rajasthan-ki-nadiya

 राजस्थान का अपवाह तन्त्र

1. अरब सागर में गिरने वाली नदीया

2. बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदीयां

3. आन्तरिक जलप्रवाह वाली नदीयां

➡️ धरातल पर किसी एक ही दिशा में जल का बहाव “अपवाह तन्त्र’ कहलाता है। महान जलवि भाजक रेखा अरावली पर्वतमाला राज्य की नदीयों का स्पष्ट रूप से दो भागों में विभाजित करती है। अरावली के पूर्व में बहने वाली नदीयां अपना जल बंगाल की खाड़ी में तथा अरावली के पश्चिम में बहने वाली नदीयां अपना जल अरब सागर में लेकर जाती है।

➡️ राज्य के अपवाह तन्त्र को तीन भागों में विभाजित किया गया है।

नोट :- आन्तरिक जल प्रवाह प्रणाली वाली नदीयों से तात्पर्य है कि वे नदीयां जो कुछ दूरी तक बहने के पश्चात समाप्त हो जाती है अर्थात जिनका जल किसी समुद्र तक नदी पहुँच पाता है आन्तरिक प्रवाह प्रणाली वाली नदीयां कहलाती है।

➡️ राज्य के 60.02% भाग पर आन्तरिक प्रवाह प्रणाली का विस्तार है ।

जीवनरेखा : एक नजर

➡️ राजस्थान की जीवनरेखा इन्दिरा गाँधी नहर परियोजना को कहते है ।

➡️ रेगिस्तान की जीवनरेखा इन्दिरा गाँधी नहर परियोजना को कहते है ।

➡️ पश्चिमी राजस्थान की जीवनरेखा इन्दिरा गाँधी नहर परियोजना को कहते है |

➡️ मारवाड की जीवनरेखा लूनी नदी को कहते है ।

➡️ बीकानेर की जीवनरेखा कंवरसेन लिफ्ट परियोजना को कहते है।

➡️ राजसमन्द की जीवनरेखा नन्द समन्द झील है ।

➡️ भरतपुर की जीवनरेखा मोती झील है ।

➡️ गुजरात की जीवनरेखा नर्मदा परियोजना है ।

➡️ जमशेदपुर की जीवनरेखा स्वर्ण रेखा नदी को कहा जाता है। (हुडरू जलप्रपात)

➡️ आदिवासियों की या दक्षिणी राजस्थान की जीवनरेखा माही नदी को कहते है।

 

अरब सागर में गिरने वाली नदीयां

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Nadi-besin-rajasthan

लूनी नदी

➡️ यह अरावली के पश्चिम में बहने वाली लूनी नदी सबसे बड़ी नदी है ।

➡️ लूनी नदी मरूस्थल की सबसे लम्बी नदी है ।

➡️ उपनाम :- मारवाड़ की जीवनरेखा, मरूस्थल की गंगा, आधी खारी आधी मीठी, अन्तःसलीला (कालिदास ने), रेल या नेड़ा (जालौर में)

➡️ लूनी नदी का उद्गम नाग पहाड़ अजमेर से होता है । पुष्कर से गोविन्दगढ़ (अजमेर) तक इसे साक्री कहा जाता है।

➡️ अजमेर में इसे साबरमती, सागरमती या सरस्वती कहा जाता है । आगे चलकर इसे लूनी नदी का नाम प्राप्त होता है।

➡️ लूनी नदी की कुल लम्बाई 350 किलोमीटर है, जिसमें राजस्थान में इसकी लम्बाई 330 किलोमीटर है।

नोट :- लूनी नदी का अपवाह तन्त्र राज्य के कुल अपवाह तन्त्र के 10.41% भाग है ।

नोट :- लूनी, चम्बल व बनास राज्य के ऐसी नदीयाँ है जो राज्य के छ:-छ: जिलो में प्रवाहित होती है।

➡️ लूनी नदी का अपवाह तन्त्र राज्य के अजमेर, नागौर, पाली, जोधपुर, बाडमेर एवं जालौर जिले में है ।

नोट :- बालोतरा (बाडमेर) से लूनी नदी का जल खारा हो जाता है । इस कारण इसे आधी खारी आधी मीठी नदी कहते है।

➡️ जालौर जिले में लूनी नदी के तेज प्रवाह के कारण इसे रेल या नेड़ा कहा जाता है ।

➡️ हल्दीघाटी के युद्व की योजना अकबर ने इसी नदी के तट पर बनाई थी। ➡️ लूनी नदी की प्रमुख सहायक नदीयां इस प्रकार है- (जोजड़ी, सागी, सुकड़ी, वाड़ी, लीलड़ी, सगाई, जवाई, गुहिया, मीठड़ी आदि)

➡️ लूनी एवं बनास राज्य की ऐसी नदीयां है जो अरावली पर्वतमाला को मध्य में से विभाजित करती है।

माही नदी

➡️ माही नदी का उद्गम विन्ध्याचल पर्वत माला के मध्यप्रदेश के धार जिले के सरदारपुरा गाँव अमरोरू की पहाड़ियों में स्थित मेहद झील से होता है।

➡️ माही नदी की कुल लम्बाई मध्यप्रदेश, राजस्थान एवं गुजरात में 576 किलोमीटर है। राजस्थान में इस नदी की कुल लम्बाई 171 किलोमीटर है । ➡️ उपनाम – दक्षिण की गंगा, कांठल की गंगा, बागड़ की गंगा,आदिवासियों की गंगा, दक्षिणी राजस्थान की जीवनरेखा या स्वर्णरेखा, आदिवासियों की जीवनरेखा या स्वर्णरेखा ।

➡️ माही नदी राज्य की एकमात्र ऐसी नदी है जिसका उद्गम दक्षिण से होता है तथा उत्तर में बहने के बाद वापस दक्षिण की ओर चली जाती है । अर्थात यह नदी उल्टे “यू’ आकार में प्रवाहित होती है।

➡️ माही नदी कक्र रेखा को दो बार काटती है ।

➡️ माही नदी राजस्थान में सर्वप्रथम बांसवाड़ा जिले के खान्दू ग्राम में प्रवेश करती है ।

नोट :- राज्य के भूतपूर्व मुख्यमंत्री श्री हरिदेव जोशी का जन्म इसी गाँव में हुआ था ।

➡️ माही नदी के बांसवाड़ा जिले के बोरखेड़ा नामक स्थान पर माही-बजाज सागर बाँध का निर्माण किया गया है ।

नोट :- राज्य का सबसे बड़ा नगर जयपुर है एवं सबसे छोटा नगर बोरखेड़ा है ।

➡️ बांसवाड़ा जिले में बहने के बाद यह नदी डूंगरपुर जिले में प्रवेश करती है। ➡️ माही नदी डूंगरपुर एवं बांसवाड़ा जिले की सीमा निर्धारित करती है ।

➡️ माही नदी के तट पर डूंगरपुर जिले के गलियाकोट नामक स्थान पर बोहरा सम्प्रदाय की पीठ एवं सैय्यद् फकरुद्दीन की दरगाह स्थित है । ➡️डूंगरपुर जिले के नेवटपुरा नामक स्थान पर सोम, माही, जाखम नदी का त्रिवेणी संगम स्थित है ।

➡️ डूंगरपुर जिले के बेणेश्वर नामक स्थान पर प्रतिवर्ष माघ शुक्ल की पूर्णिमा को पन्द्रह दिन तक चलने वाले इस मेले को आदिवासियों का कुम्भ या वागड़ का कुम्भ कहा जाता है। इसी स्थान पर संत मावजी द्वारा स्थापित किया गया शिव लिंग स्थित है । यहां विश्व का एकमात्र खण्डित शिवलिंग है जिसकी पूजा की जाती है । यहां औदिच्य ब्राहमणों की पीठ भी स्थित है ।

➡️ डूंगरपुर जिले में बहने के पश्चात यह नदी गुजरात राज्य के पंचमहल जिले में प्रवेश करती है ।

➡️ गुजरात राज्य के पंचमहल जिले के रामपुर गाँव में माही नदी पर कडाना बाँध स्थित है ।

नोट :- कडाना बाँध का समस्त खर्च गुजरात सरकार द्वारा वहन किया गया है जबकि इसका समस्त लाभ राजस्थान राज्य को हो रहा है ।

➡️ अन्त में यह नदी खम्भात की खाड़ी में स्थित केम्बे की खाड़ी में जाकर विलीन हो जाती है ।

नोट :- सुजलाम सुफलाम का सम्बन्ध माही नदी से है ।

नोट :- माही नदी पर राजस्थान एवं गुजरात राज्य की संयुक्त परियोजना माही बजाज सागर परियोजना स्थित है जिसमें राजस्थान का हिस्सा 45% तथा गुजरात राज्य का हिस्सा 55% है ।

नोट :- माही नदी के तट पर डूंगरपुर जिले में औदिच्य ब्राह्मणों की पीठ स्थित है ।

➡️ माही नदी की सहायक नदीयाँ :- ऐरावती, अनास, मोरन, सोम, जाखम, चाप हरण ।

साबरमती नदी

➡️ उद्गम :- उदयपुर जिले में स्थित गोगुन्दा की पहाड़ियों (ढेबर झील) पदारला गाँव से

➡️ साबरमती की कुल लम्बाई 416 किलोमीटर है । यह नदी राजस्थान में 45 किलोमीटर व गुजरात में 371 किलोमीटर बहती है ।

➡️ यह राज्य की एकमात्र ऐसी नदी है जिसका उद्गम राजस्थान से होता है तथा यह आगे चलकर गुजरात राज्य की प्रमुख नदी बन जाती है ।

➡️ गुजरात राज्य में स्थित गांधीनगर शहर एवं साबरमती आश्रम इसी नदी के किनारे स्थित है ।

नोट :- साबरमती नदी का जल उदयपुर की झीलों में डालने के लिये देवास जल सुरंग का निर्माण किया गया है । इस लम्बी सुरंग का निर्माण कार्य हाल ही में अगस्त 2011 में पूरा हो गया है । इस जल सुरंग की कुल लम्बाई 11.5 किलोमीटर है ।

वाकल नदी

➡️ इस नदी का उद्गम उदयपुर जिले के गोगुन्दा की पहाड़ियों के गोरा गाँव की पहाड़ियों से होता है।

➡️ इस नदी में वाकल की सहायक नदी- मानसी आकर मिलती है तथा मानसी-वाकल बेसिन का निर्माण होता है ।

नोट :- उदयपुर शहर को मानसी-वाकल परियोजना के तहत यहां बाँध बना कर जलापूर्ति की जा रही है ।

नोट :- मानसी-वाकल बाँध एवं देवास सुरंग का जल उदयपुर जिले में स्थित कोटड़ा तालाब में डाला जा रहा है यहां से नन्देश्वर चैनल के जरिये यह जल उदयपुर की पिछोला झील में पहुचाया जा रहा है।

सेई नदी

➡️ इस नदी का उद्गम उदयपुर जिले के गोगुन्दा क्षेत्र के पदारला गाँव से होता है ।

➡️ इस नदी पर सेई परियोजना के तहत सुरंग का निर्माण किया गया है । इसके द्वारा इस नदी का जल पाली जिले में स्थित जवाई बाँध में पहुचाया जा रहा है ।

नोट :- पाली जिले में स्थित जवाई बाँध को मारवाड़ का अमृत सरोवर कहा जाता है । यह बाँध पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ बाँध हे जो कि जवाई नदी पर निर्मित है । यह बाँध पाली जिले के सुमेरपुर कस्बे में स्थित है ।

सोम नदी

➡️ इस नदी का उद्गम उदयपुर जिले के बावलपाड़ा के जंगलों में स्थित बीछामेड़ा की पहाड़ियों से (ऋषभदेव) से होता है ।

➡️ यह नदी उदयपुर जिले की कोटड़ा तहसील में बहती हुई डूंगरपुर जिले में स्थित बेणेश्वर नामक स्थान के नेवटपूरा में माही व जाखम नदी के साथ मिलकर त्रिवेणी संगम बनाती है ।

नोट :- सोम नदी पर उदयपुर जिले में सोम–कागदर बाँध तथा डूंगरपुर जिले में सोम–कमला-अम्बा बाँध बनाया गया है ।

जाखम नदी
➡️ इस नदी का उद्गम प्रतापगढ़ जिले की छोटीसादड़ी के भंवरमाता की पहाड़ियों से होता है ।
नोट :- इस नदी पर राज्य का सबसे ऊँचा बाँध जाखम बाँध स्थित है। इस बाँध की उंचाई 81 मीटर है । यह बाँध प्रतापगढ़ जिले के जाखमीया गाँव में स्थित है ।
➡️ अन्त में यह नदी डूंगरपुर जिले में स्थित बेणेश्वर नामक स्थान के नेवटपुरा में माही व सोम नदी के साथ मिलकर त्रिवेणी संगम बनाती है ।

पश्चिमी बनास

➡️ इस नदी का उद्गम सिरोही जिले से अरावली पर्वत से नया सनावरा गाँव की पहाड़ियों से होता है।

➡️ राज्य का सर्वाधिक आर्दता एवं शीतलता के लिये विख्यात माउन्ट आबू शहर इसी नदी के तट पर स्थित है।

➡️ इसी नदी के तट पर गुजरात राज्य का दीसा शहर स्थित है ।

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