Churu (चूरू) District Jila Darshan

 चूरू 

churu district tehsil list-total tahsil-7
churu district village list-total village-108
churu district area-13,852km²
churu district population-3,10,562
 churu district pin code-331001

Churu (चूरू) District Jila Darshan
Churu-district-map-rajasthan

परिचय
चूरू की स्थापना 1620 में चुहड़ा जाट द्वारा करवाया गया।
➥ यह सबसे कम वनक्षेत्र वाला जिला है।
चुरू किले को दुश्मनो पर चांदी के गोले दागने के कारण जाना जाता है।
➥ स जिले में कोई नदी नही है।
यहां की कोठारी हवेली में 6 मन्जिले है व 1100 दरवाजे तथा खिड़कियां है।
➥ यहां के दुधवाखारा मे प्रसिद्ध किसान आन्दोलन हुआ था।
➥ यहां एक धर्मस्तूप है जिसे सभी सर्वधर्म स्वभाव का प्रतीक मानते है।
➥ इसकी योजना स्वामी गोपालदास ने बनायी थी।
➥ चूरू मे जसनाथ जी सम्प्रदाय का अग्नि नृत्य बहुत प्रसिद्ध है।
➥ सुजानगढ का बंधेज कार्य उन्नत अवस्था में है।
➥ लाडनूं का साका व चूनरी प्रसिद्ध है।

स्थान विशेष

साहवा- यह एक पवित्र गुरूद्वारा है जिसमे कार्तिक मास की पूर्णिमा को मेला लगता है। यह स्थान गुरूनानक देव जी व गुरू गोविन्द देव जी के आने एवं रहने से सम्बंध रखता है।

सालासर- मोहनदास जी द्वारा निर्मित इस सालासर बालाजी मंदिर को पुरे राज्य मे सबसे बड़ा आस्था का स्थल माना जाता है। यहां पर राज्य का प्रथम सहकारी क्षेत्र का महिला मिनी बैंक खोला गया है।

ददरेवा- यह गोगाजी महाराज का जन्म स्थल है। यहां पर शीर्ष मेड़ी है।

स्यानण का मंदिर- यहां पर 300 मीटर उंची एक पहाड़ी जिसे स्यानण की डूंगरी कहा जाता है पर काली माता का विशाल मंदिर है जिसका निर्माण 10वीं सदी में हर्षनाथ के साथ ही हुआ है।

वैंकटेश्वर मंदिर, सुजानगढ- भारत के तिरूपति बालाजी मंदिर की अनुमति से बनाए गए इस मंदिर मे भिति चित्रो के माध्यम से भगवान विष्णु के दसो अवतारो को भीतरी भागो में दर्शाया गया है। यहां पर पंच धातुओ से बनी मुर्तियां प्रतिष्ठित की गई है।

तारानगर- यहां पर भभूता सिद्ध जी का मेला लगता है।

गोपालपुरा- इसे द्रोणपुर के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि इस गांव को द्रोणाचार्य ने बसाया था।

तालछापर- तालछापर वन्य जीव अभ्यारण्य व झील है जो काले हरिणो व कुरंजा पक्षी की शरण स्थली है। यह क्षेत्र काले हरिणो की घटती संख्या व पानी की कमी के कारण चर्चित स्थल है। तालछापर झील एक खारे पानी की झील है।

आपणी योजना कार्यक्रम- जर्मनी के के सहयोग से आपणी योजना शुरू की गई है जिसके प्रथम चरण मे हनुमानगढ व चुरू तथा झुंझुनूं को जल पहुचाया गया है।

आर.टी.डी.सी. होटल- चिरमी

मुख्य हवेली- सुराणो की हवेली

सर्वाधिक क्षेत्रफल वाली फसले- चना व कुल दलहन

उद्योग- उन उद्योग की एक बड़ी इकाई वर्टेड स्पिनिंग मिल्स है।

खनिज- जिप्सम

उर्जा- सरदार शहर व चुरू में सौर उर्जा से विद्युत उत्पादन किया जाता है।

व्यक्ति विशेष

श्री सुन्दर प्रसाद तथा श्री गौरीशंकर को कथक नृत्य में विशेष कार्य करने पर पदमश्री से सम्मानित किया जा चुका है।
कृष्णा पूनिया जो महिला डिस्कस थ्रो मे देश को अनेक मेडल दिला चुकी है इसी जिले की है।
सुजानगढ में जन्मे प्रसिद्ध रचनाकार कन्हैयालाल सेठीया को 2004 में पद्मश्री प्राप्त हुआ है।
विश्व के सबसे धनी व्यक्तियो मे से एक लक्ष्मीनिवास मितल भी यही के है जिन्हे 2008 में पद्म विभुषण से सम्मानित किया गया।

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