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Chittorgarh (चितौड़गढ़) District Jila Darshan - gk website
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Chittorgarh (चितौड़गढ़) District Jila Darshan

चितौड़गढ़

Chittorgarh (चितौड़गढ़) District Jila Darshan (Rajasthan)
Chittargarh-district-map

 उपनाम राजस्थान का गौरव, चित्रकुट, मझमिका व खिज्राबाद 
👉 अन्य स्थानो के
उपनाम –
 
भारतीय मुर्तियों का शब्दकोष/विश्वकोष – विजय स्तम्भ 
हिन्दु देवी
देवताओ का अजायबघर –
विजय स्तम्भ 
 राजस्थान की अणुनगरी – रावतभाटा 
राजस्थान का
वैल्लोर –
भेंसरोड़गढ़ 
 राजस्थान का हरिद्वार- मातृकुण्डिया राश्मी

परिचय

➤ चितौड़ बेड़च नदी के किनारे पर स्थित है।
➤ इसकी स्थापना चित्रांगद मौर्य ने की थी।
➤ कुमारपालवधम के अनुसार चितौड़ की स्थापना चित्रांग मौर्य ने की थी। परन्तु कुछ इतिहासकार यह मानते है कि इसकी स्थापना चित्रांगद मौर्य ने की इसलिए चितौड़ को चित्रकुट के नाम से जाना जाता है।
➤ चितौड़ चित्रकुट का ही अपभ्रंश रूप है।
➤ मेवाड़ के प्राचीन सिक्को पर भी यह नाम अंकित है।
➤ अल्लाउदीन खिलजी ने 1303 मे इसे जीतकर इसका नाम खिज्राबाद रखा।
➤ चितौड़ लम्बे समय तक सिसोदियो की राजधानी रहा है।
➤ परमारो की राजधानी माध्यमिका या नगरी जो नागरी के नाम से भी जानी जाती है चितौड़ में स्थित है।
➤ कर्नल टॉड के अनुसार 728 ई. मे बापा रावल ने इस दुर्ग को मौर्य वंश के अंतिम राजा मान मौर्य से छीनकर गुहिलवंशीय राज की स्थापना की।

स्थान विशेष

जैन कीर्ति स्तम्भइसका निर्माण 12 वीं सदी मे दिगंबर सम्प्रदाय के बघेरवाला महाजन सानाय के पुत्र जीजा ने करवाया। यह आदिनाथ का स्मारक है।
फतेह प्रकाश महल कुम्भा महल के मुख्य द्वार बड़ी पोल से बाहर निकलते ही फतेहसिंह द्वारा निर्मित इस महल को इस नाम से जाना जाता है। यहां पर राज्य सरकार द्वारा एक संग्रहालय स्थापित किया गया है जिसमे पाषाणकालीन सामग्री, अस्त्र शस्त्र, वस्त्र व मूर्तिकला जैसे अनेक
संग्रह पड़े है।
★ कुम्भ श्याम यहां पर विष्णु के वराह अवतार का मंदिर है जिसका निर्माण कम्भा ने 1449 में करवाया। वराह मंदिर के सामने गरूड़ की एक मूर्ति भी है। यह मंदिर इण्डो आर्यन कला का एक सुंदर नमुना है।
मातृ कुण्डिया मेला हरनाथपुरा मे प्रतिवर्ष वैशाख पूर्णिमा के दिन यहां मेला भरता है।
★ सोनाड़ीचितौड़गढ मे इस प्रकार की नस्ल की भेड़ो हेतु प्रजनन केंद्र है।
कंवरपुरा इस स्थान पर आकाश से लौहे व निकल से बना उल्कापिण्ड गिरा है।
राशमी यहां मेवाड़ के प्रयाग के रूप मे प्रसिद्ध स्थल मातृकुण्डिया है जो चन्द्रभागा नदी के तट पर है।
बस्सी यह क्षेत्र काष्ठ कला, वन्य जीव अभ्यारण्य, ओरई व ब्राह्मणी नदियों का उद्गम स्थल होने के कारण प्रसिद्ध है।
★ बेंगु किसान आन्दोलन के कारण जाना जाता है जिसका नेतृत्व रामनारायण जी व शहीद कृपाजी ने किया।
★ आकोला – यह रंगाई छपाई का प्रधान केन्द्र है। हाल ही मे यहां तांबे की खोज की गई है। यहां का आकोला प्रिंट, तुर्रा कलंगी खेल व बांस पर भवाई नृत्य प्रसिद्ध है।
भोपालसागर यहां दी मेवाड़ शुगर मिल्स है जो राज्य की प्रथम निजी क्षेत्र की चीनी मील है।
मांगरोल यह कपड़ो की मदो की बुनवाई हेतु प्रसिद्ध है तथा यहीं पर सफेद सीमेंट का तीसरा कारखाना है।
कपासन – यहां हिन्दुस्तान जिंक लि. का दुसरा जिंक स्मेलटर प्लांट है, राजस्थान राज्य खान एंव खनिज लि. व राष्ट्रीय केमिकल फर्टिलाइजर्स ने एक राजस्थान राष्ट्रीय केमिकल फेक्ट्री बनाई है जो उर्वरक का उत्पादन करती है।
निम्बाहेड़ा जे.के. सीमेंट का सबसे बड़ा सीमेंट उत्पादक कारखाना है तथा यहीं पर 12 वीं सदी के शिव मंदिर की भी खोज हुई है।
चन्देरिया सीसा जस्ता प्रद्रावक केन्द्र, एशिया का सबसे बड़ा जिंक स्मेलटर संयंत्र है।
राणाप्रताप सागर बांध भराव क्षमता मे राज्य का सबसे बड़ा बांध जिस पर राणाप्रताप सागर जल विद्युत परियोजना है।
★ रावतभाटा राजस्थान परमाणु शक्ति परियोजना 1973 मे कनाडा के सहयोग से प्रारम्भ किया गया। यहां तारापुर के बाद देश का दुसरा सबसे बड़ा परमाणु संयत्र है। इसमे पानी की आपुर्ति राणा प्रताप सागर बांध द्वारा की जाती है। यहां स्वदेशी तकनीक से बना पहला भारी जल संयत्र
है।
भैंसरोडगढ यहां चम्बल नदी पर चुलिया जलप्रपात है। बाड़ोली में जैम्स टॉड द्वारा खोजे गए शिव मंदिर व उतर गुप्तकालीन मंदिर है। भैंसरोडगढ दुर्ग एक जलीय दुर्ग है जो ब्राह्मणी व चम्बल नदी के संगम पर है। इस दुर्ग का निर्माण भैंसाशाह नामक व्यापारी व रोड़ा नामक व्यक्ति ने करवाया था।

👉 चितौड़ के साके
★ 1303 में अलाउद्दीन खिलजी के कारण
★ 1534 में बहादुरशाह के कारण
★ 1568 में अकबर के कारण

👉 झीले – मातृकुण्डिया व भोपालसागर झील

👉 पर्यटन विशेष- पर्यटन विभाग द्वारा यहां मीरा महोत्सव का आयोजन होता है।

👉 होटल-

आर.टी.डी.सी. होटल – पन्ना

👉 ऐतिहासिक निर्माण–

छतरीयां – रैदास जी की छतरी

बावड़ी बिनोता बावड़ी

हवेलियां – भामाशाह व जयमल फत्ता की हवेली

👉 वन विशेष–

अभ्यारण्य – बस्सी व भैंसरोड़गढ अभ्यारण्य

आखेट निषिद्ध क्षेत्र – मैनाल

👉 कृषि विशेष–
अजवाइन मण्डी – कपासन
कृषि क्षेत्र में सर्वाधिक क्षेत्रफल – अजवाइन,अफीम
कृषि क्षेत्र में सर्वाधिक उत्पादन – अजवाइन,अफीम, गन्ना, आम व केला
यहां की प्रमुख सिंचाई परियोजना ओराई सिंचाई परियोजना है।
यहां पर ही वनस्पति घी का कारखाना भी है तथा शुष्क अमोनिया सल्फेट उर्वरक कारखाना है।
👉 खनिज
★ चुना पत्थर सीमेंट ग्रेड, सुलेमानी पत्थर, चीनी मृतिका, अग्नि अवरोधक मिट्टी/फायर क्ले/बॉल क्ले
गेरू पत्थर –कांच निर्माण मे उपयोगी
जिला विशेष

चितौड़ का प्रमुख नृत्य तुर्रा कलंगी है।
यहां के रावतभाटा मे भारी जल संयत्र है।
गंभीरी व बेड़च नदियां चितौड़गढ शहर के मध्य से गुजरती है।
यहीं पर राणा कुम्भा द्वारा निर्मित विजयस्तम्भ स्थापत्य कला का बेजोड़ नमुना है।
सर्वाधिक अफीम यहीं पर ही होती है।
चितौड़ का किला मेसा पठार पर है।
➤ यह सीमेंट उत्पादन मे राज्य मे प्रथम स्थान पर है।
केसरपुरा राज्य का एकमात्र हीरा खनन क्षेत्र है।
यहां का भेंसरोडगढ अभ्यारण्य घड़ियालो के लिए प्रसिद्ध है।
यहां कैली नामक औषधी मिलती है जो गर्भनिरोधक के रूप में प्रयोग की जाती है।
चितौड़ में भव्य कुम्भ श्याम का मंदिर है जो महामारू शैली से बना है।
राजस्थान मे सबसे ज्यादा चुना पत्थर यहीं मिलता है।
चितौड़गढ़ दुर्ग की आकृती व्हेल मछली के समान
दुर्ग में प्रवेश के लिए सात प्रवेश द्वारो से होकर जाना पड़ता है।
इस दुर्ग के ठीक पीछे नौलखा भण्डार है।

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