Bundi (बुंदी) District Jila darshan (Rajasthan)

Bundi (बुंदी)

Bundi (बुंदी) District Jila darshan (Rajasthan)
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 उपनाम :- बावडीयो का शहर, सिटी ऑफ़ स्टेपवेल्स, द्वितीय काशी, अजात वैभव नगरी, वृंदावती, फरुर्खाबाद व बुन्दू का नाला 
 केशोरायपाटन को जम्बूअरण्य व रतिदेव पाटन भी कहा जाता है। 
परिचय 
✪ बुंदी की स्थापना 1242 में राव देवा के द्वारा की गई।
 राव देवा ने बुंदू की घाटी में बूंदी की स्थापना की।
 पुराणी मान्यता  के अनुसार बूंदा मीणा के नाम पर बूंदी शहर का नाम बंदी रखा गया।
✪ सूर्यमल मिश्रण व वंश भास्कर का सम्बंध बूंदी से है।
  हाडा देवा ने बूंदा मीणा के पोते जैता मीणा को हराकर चौहान शासक की स्थापना की। 
स्थान विशेष  
 तारागढ़ का किला / राजमहल / गढ़ पैलेस :- यहाँ पर गर्भ गुंजन टोप,फूलमहल, सुखनिवास ,धाबाई जी का कुंड ,नवल खां झील ,रानी जी की बावड़ी ,मोती महल ,शिकार बुर्ज ,म्यूजियम व बाणगंगा चर्चित स्थल है। इसे बादल महल / अनिरुद्ध महल / रतनदौलत दरीखाना आदि नाम से भी जाना जाता है। 
 बांसी दुगारी :- श्री तेजाजी का पवित्र तीर्थ यहाँ पर है। 
 हिण्डोली :- हुंडेश्वर महादेव के मंदिर के लिए जाना जाता है। 
 सथूर :- संतूर माता सिंचाई परियोजना के लिए जाना जाता है। 
 जैत सागर झील :- जैता मीणा द्वारा निर्मित।  
 भीनमाल :- मांगली नदी पर स्थित जल प्रपात। 
 लाखेरी :- राज्य का पहला सीमेंट कारखाना। 
 केशोरायपाटन :- राज्य में सहकारी क्षेत्र की पहली चीनी मील यहाँ है। तथा केशवराय जी के मंदिर और हजरत शेख अब्दुल अजीज मक्की की दरगाह भी यहीं  पर है। 
 रामगढ विषधारी अभ्यारण्य :- मेज नदी के आस पास रामगढ महल व विषधारी शिवमंदिर होने के कारण ये नामकरण हुआ। रणथम्भौर अभ्यारण्य का  यहाँ तक है। 
नदियों के किनारे बेस नगर:- 
 केशोरायपाटन – चम्बल नदी 
 दबलान – मेज नदी 
 प्रमुख बांध परियोजनाए :- वरधा , गुढ़ा ,जिगजैक ,जैतसागर ,गरडदा सिचाई परियोजना ,पबैलपुर सिंचाई परियोजना। 
 झीले :- नवलखां ,कनकसागर / दुग्गारी ,नवलसागर , जैतसागर ,फुलरानी की झील व किशोरसागर झील। 
 बावड़ी :- रानी बावड़ी व गुलाब बावड़ी। 
 अभ्यारण्य :- रामगढ विषधारी व कनक सागर अभ्यारण्य। 
 आखेट निषिद्ध क्षेत्र :– कनकसागर। 
कृषि:- 
 सर्वाधिक क्षेत्र वाली फसल :- हल्दी। 
 सर्वाधिक उत्पादन वाली फसल :- हल्दी , मसूर व पपीता। 
 जिला विशेष 
 यहाँ पर राव राजा उम्मेद सिंह द्वारा निर्मित चित्रकला है। 
 बूंदी चित्रशैली की पहचान पशु पंक्षियों के चित्र होते है। 
 बूंदी प्रजामण्डल के संस्थापक पंडित नयनूराम थे। 
 यहाँ पर प्रसिद्ध कजली तीज का मेला लगता है। 
राव अनिरूद्ध द्वारा निर्मित 84 खम्भों की छतरी भी प्रमुख आकृषण केंद्र है।

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