Barmer (बाड़मेर) District Jila Darshan

बाड़मेर

Barmer (बाड़मेर) District Jila Darshan
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➤ प्राचीन नाम = बाहड़मेर, बाढाणा, सिवाणची, श्रीमाल 
➤  स्थापना = 11 वी सदी मे

➤  संस्थापक = परमार नरेश धरणीधर र्क पुत्र यादव राजा बाघभट्ट अथवा बाहड़ राव द्वारा की गई ।

वर्तमान बाडमेर की स्थापना भीमा जो रतनायत ने वि.स.1642 में बापडाउ के ठिकाने पर की।

➤  प्रमुख नृत्य = कानुडा व गैर

परिचय

➤ ऐतिहासिक रूप से बाडमेर का नामकरण बाहड शासक राव (पंवार) अथवा बाहड राव परमार से हुआ।

 ऐसा माना जाता है कि प्रसिद्ध शासक बाहड राव परमार ने 13वीं सदी में इस बाडमेर शहर की स्थापना की थी। थार के मरूस्थल का एक भाग बाडमेर राजस्थान के परिचम में स्थित है।
➤  इसके उतर में जैसलमेर, दक्षिण में जालौर, पूर्व में थाली व जोधपुर तथा परिचम में पाकिस्तान है।
➤  मार्च माह में यहां बाडमेर महोत्सव का आयोजन होता है ।

स्थान विशेष

✪ सिवाना दुर्ग = पंवार सजा भोज के पुत्र वी. रनारायण द्वारा निर्मित यहां का प्रमुख दुर्ग। 

✪  कोटडा किला = किराडू के परमार शासको द्वारा कोटडा के किले का निर्माण करवाया गया

✪  मालाणी घोडे = देश मे सर्वश्रेष्ठ नस्ल के कारण प्रसिद्ध है ।

✪  बाड़मेरी प्रिंट = ढोला मारू प्रेम गाथाएं, नुत्य मुद्रा मे स्त्री-पुरूष, हाथ जोडकर स्वागत करती राजस्थानी महिला की छपाई के साथ अजरक प्रिंट। 

✪  आकली = यहां संत रामदास की छतरी है । यह क्षेत्र बेंटोनाइट व लिग्नाइट के भण्डारो के लिए भी प्रसिद्ध है ।

✪ वीरातरा माता = चोहटन से 10 किमी. दुर 400 वर्ष पुराना वीरातरा माता का मन्दिर है ।

 घोडो का तीर्थ = आलम जी का धोरा इस नाम से जाना जाता है ।

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✪ गिरल = राज्य का पहला लिग्नाइट आधारित बिजलीघर यहां है ।

✪  जुना बाहड़मेर = प्राचीन नगर के अवशेष 12 वी व 13 वी सदी के शिलालेख प्राप्त हुए

✪  बाटाडू कुआ = रेगिस्तान का जलमहल नाम से विख्यात संगमरमर का बेजोड नमुना। 

✪  पीपलूद के हल्देश्वर महादेव = इसे मारवाड़ का लघु माउंट आबु कहते है ।

✪  बालोतरा = यहां से लूणी नदी का जल खारा हो जाता है ।

✪  शिव = यहां डिफेन्स आँर्डीनेस फ़ैक्ट्री है तथा तेल की खोज भी हुई है ।

✪  गडरारोड़ = इन्दिरा गान्धी नहर का अन्तिम गंतव्य स्थल। 

✪  पंचपद्रा = खारे पानी की झील, भारतीय रेल अनुसंधान द्वारा तेज गति की रेलो का परीक्षण किया जाता है तथा यहां नागणेची माता का मन्दिर है जहां लकडी की मुर्ति स्थापित है।

✪  जायडु  जाटो के बास में मात्र 10 फीट की गहराई में ही पीने योग्य मीठा जल निकलता है जिसे स्थानीय लोग माँ करणी का चमत्कार मानते है ।

✪  जसोल = यहां पर माता रानी भटियाणी का चमत्कारिक मंदिर है । रावल मल्लीनाथ के नाम पर इस क्षेत्र को मालानी कहा जाने लगा ।

✪  हरसाणी = यहां पर माल्हण बाई का एक चमत्कारिक मंदिर है ।

✪  जानसिंह की बेरी = यहां पर संचियाय माता का मंदिर है ।

✪  खेड़ = राठोड वंश के संस्थापक राव सिहा व उनके पुत्र ने खेड को गुहिल शासको से जीता और इसे राठोडो का गढ बनाया । रणछोड़ जी का विष्णु मंदिर यहां पर प्रमुख आर्कषण का केन्द्र है । गुहिल राजपूतो ने यहां 1247 तक शासन किया इसके बाद वे भावनगर चले गए।

✪  किराडू = एक समय में यह स्थान परमार राजाओं कि राजधानी था । खुदाई के दौरान यहां से पांच विशाल मंदिरो के अवशेष मिले है जिनमें से एक भगवान विष्णु तथा अन्य चार महादेव को समर्पित है । इनमें सोमेश्वर मंदिर सबसे बडा है ।

✪  मेवानगर = 12वीं सदी तक यह बिरानीपुर के नाम से जाना जाता था । राव सलखा के पुत्र मल्लीनाथ के नाम पर इसका नाम महेवानगर पडा जो कालान्तर में मेवानगर कं नाम से प्रसिद्ध हुआ ।

✪  अकलेश्वर महादेव, अरटा = यहां पर शिव का एक विशाल मंदिर है ।

✪  बायतु = यह लोक देवता खेमा बाबा का जन्म स्थान है । भादौ, माघ व चैत्र नवमी को यहां पर मेले का आयोजन होता है ।

प्रमुख मेले

 ✿ मल्लीनाथ/तिलवाडा पशु मेला = यह राज्य के सबसे बडे पशु मेलो में से एक है । तिलबाडा गांव में चैत्र एकादशी से चैत्र एकादशी तक इसका आयोजन होता है ।

✿  सिणधरी पशु मेला = लूणी नदी के तट पर सिणधरी गांव में नवंबर-दिसंबर माह में इस मेले का आयोजन होता है।

✿  सिद्धेश्वर महादेव मेला = माहबार कस्बे में प्रतिवर्ष श्रावण माह के प्रत्येक सोमवार को मेले का आयोजन होता है।

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✿  सूईयां मेला = चौहटन कस्बे में सूईंयां महादेव का मेला महाशिवरात्रि को आयोजित होता है ।

✿  नाकोडा पार्श्वनाथ मेला = पंचपद्रा तहसील के मेवानगर में इस मेले का आयोजन होता है । यह जैन धर्म के लोगो के बीच विशेष आस्था का केन्द है । प्रतिवर्ष दिसम्बर-जनवरी में पार्श्वनाथ का जन्मदिवस मनाने के लिए इस मेले का आयोजन किया जाता है ।

✿  विरात्रा माता का मेला = चोहटन कस्बे में विरात्रा माता के धाम पर साल में तीन बार चैत्र, भाद्रपद व माघ माह में वांकल देवी की पुजा के साथ इस मेले का आयोजन होता है । विरात्रा माता की मुर्ति विक्रमादित्य ने स्थापित की थी। 

✿  खेड मेला = पंचपद्रा तहसील के खेड गांव में प्रतिवर्ष राधाअष्टमी को एक विशाल मेले का आयोजन होता है ।

✿  कल्याण सिंह का मेला = यह मेला सिवाना दुर्ग में अल्लाउद्दीन खिलजी की सेना के विजय के अवसर पर श्रावण प्रतिपदा को लगता है ।

✿  हरलाल जाट का मेला = बलदेव नगर में इस मेले का आयोजन होता है। हरलाल जाट को फोजियो का देवता कहा जाता है।

पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित महोत्सव-

बैलुन महोत्सव 
थार महोत्सव = मार्च माह में

आर.टी.डी.सी. होटल = खड़ताल 

फसल बिशेष

सर्वाधिक क्षेत्रफल = बाजरा, इसबगोल, जीरा व मोठ 
सर्वाधिक उत्पादन = इसबगोल व मोठ

खनिज तेल

✱ गुढामलानी तहसील व मोमीयो की ढाणी मे ब्रिटेन तेल कम्पनी केयर्न इंडिया एनर्जी को तेल का भण्डार मिला

✱ झुण्ड गांव के निकट रागेश्वरी कुंए की खोज। 

✱  बाडमेर सांचोर के बेसिन के बोचिया गांव मे भी तेल के भण्डार मिले है ।

✱  बायतु क्षेत्र मे नगाणा के जोगसरिया मे तेल के कुंए मिले है ।

✱  गुढामलानी मे विश्व के सबसे कम गहरे स्थान पर तेल मिला है-मात्र 900-950 मी.

खनिज = जिप्सम, बेन्टोनाइट, चीनी मृतिका व मुल्तानी मिट्टी

सौर उर्जा से बिजली का उत्पादन = पंचपद्रा मे 2 सयंत्र से कुल 6 मेगावाट उत्पादन होता है। 

जिला विशेष

➺ सर्वाधिक लम्बी सड़को वाला जिला 
  सर्वाधिक कृषि वाला जिला  
  सर्वाधिक वार्षिक जनसंख्या वृद्धि दर वाला जिला
  2०11 मे सर्वाधिक जनसंख्या वृद्धों दर
  रेल अनुसंधान एंव प्रशिक्षण केन्द्र
  भारत मे सर्वाधिक गधे राजस्थान मे है तथा राज्य मे बाडमेर मे  सर्वाधिक गधे है। 

➺  बाजरा अनुसंधान केंद्र भी बाडमेर मे है। 
  मरू त्रिकोण मे बाडमेर को भी शामिल किया गया है। 

➺  लूणी के किनारे तिलवाडा सभ्यता है।  
  राज्य मे प्रथम महिला संचालित सहकारिता सुपर मार्केट बालोतरा मे है।
  राज्य की पहली तेल रिफायनरी बाडमेर मे है। यहां भारत पाक युद्ध मे  शहीद रेल कर्मचारियो का स्मारक है। 
➺  यह सर्वाधिक पशुधन बाला जिला है। 

➺  मंगला, भाग्यम, शक्ति तथा एश्वर्या यहां के प्रमुख तेल क्षेत्र है  यहां का अजरक प्रिंट जिसमे कपडे के दोनो तरफ छपाई होती है व मलीर प्रिंट प्रसिद्ध है। 

➺  बाडमेर की सबसे उंची पहाडी छप्पन की पहाडी है। 

➺  बाडमेर की 228 किमी. सीमा पाक से लगती है । यहां सबसे ज्यादा बकरीयां मिलती है। 

➺   इसकी सीमा गुजरात व पाकिस्तान से लगती है।
 यहां लिग्नाईट आधारित 100 एम.डबल्यु. शक्ति परियोजना प्रस्तावित है। 

 चौहटन बाडमेर मे काकरेज गोवंश अनुसंधान केन्द्र है।

  मंगला तेल क्षेत्र 

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