Banswara (बांसवाड़ा) District Jila Darshan

बांसवाड़ा

उपनाम :- सौ द्वीपो का शहर, आदिवासीयो का शहर, राजस्थान की लोढी काशी, मानसुन का प्रवेश द्वार

Banswara (बांसवाड़ा) District Jila Darshan
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परिचय :-

इस क्षेत्र को बांसीया भील की ढाणी के नाम से जाना जाता था।

बांसवाड़ा की स्थापना बांसीया भील के द्वारा की गई।

बांसवाड़ा का प्रथम शासक जगमाल था।

मेजर अर्सिकन के अनुसार यहां के प्रतापी शासक बांसीया भील को जगमाल के द्वारा मार दिए जाने के कारण इस क्षेत्र का नाम बांसवाड़ा हुआ।

डुंगरपुर व बांसवाड़ा का क्षेत्र बागड़ प्रदेश कहलाता है।

बागड़ का धाड़ नृत्य प्रसिद्ध है।

यहां की प्रमुख बोली बागड़ी है।

यहां का घोटीया अम्बा का मेला व त्रिपुरा सुन्दरी का मेला प्रसिद्ध है।

आदिवासीयो में जनजागृती फैलाने के लिए गोविन्द गुरू ने अनेक प्रयास किए।

कर्क रेखा यहां से गुजरती है।

यह राज्य का सबसे कम साक्षर जिला है।

स्थान विशेष :-

🔎 अथूना – परमार शासको की राजधानी अथूना थी जो शिल्पकला युक्त मंदिरो के लिए प्रसिद्ध है।

🔎 छप्पन का मैदान – बांसवाड़ा व प्रतापगढ मे माही का बहाव क्षेत्र इस नाम से जाना जाता है।

🔎 पाराहेड़ा – यहां पर मण्डलिक ने गंगेला तालाब के तट पर महामण्डलेश्वर शिव मंदिर का निर्माण करवाया

🔎 कांठल – बांसवाड़ा व प्रतापगढ मे माही नदी के किनारे का क्षेत्र इस नाम से जाना जाता है।

🔎 तलवाड़ा – यहां के सुर्य मंदिर व लक्ष्मीनारायण मंदिर प्रसिद्ध है। यहां से कुछ दूरी पर स्थित त्रिपुरा सुन्दरी जिसे तुरई माता या तुरतई माता के नाम से जाना जाता है मे कनिष्क के समय का एक शिवलिंग स्थित है।

🔎 छप्पनियां का अकाल – 1899 या विक्रमी संवत 1956 मे पड़ा इसलिए इसे इस नाम से जाना जाता है।

🔎 छींच – यहां स्थित ब्रह्मा मंदिर अपनी चार मुखी मुर्ति के लिए प्रसिद्ध है। इसे महारावल जगमाल ने बनवाया।

🔎 आनंदपुर व भुकिया – यह क्षेत्र सोने के उत्खनन हेतु चर्चित है।

🔎 बोरखेड़ा – यहां पर माही बजाज सागर बांध स्थित है।

🔎 कलिंजरा – यहां के जैन मंदिर जो ऋषभदेव को समर्पित है हिरन नदी के तट पर स्थित है।

🔎 कुशलगढ़ – यहां पर 21 जुन को सुर्य की किरणे सीधी गिरती है।

🔎 भवानपुरा – यहां संत अब्दुला पीर की दरगाह है।

🔎 घोटीया अम्बा – इस क्षेत्र का सम्बंध महाभारत काल से है। ऐसा माना जाता है कि यहीं पर पाण्डवो ने कृष्ण की सहायता से 88000 ऋषियों को भोजन करवाया था। यहां चेत्र अमावस्या से दुज तक मेला लगता है।

🔎 कल्लाजी का मेला – नवरात्रा के पहले रविवार को गोपीनाथ का गढा गांव मे यह मेला लगता है।

नदी विशेष :-

माही नदी – बांसवाड़ा के खाटु गांव से राज्य मे प्रवेश करती है तथा बांसवाड़ा व प्रतापगढ की सीमा पर बहती हुई गुजरात की खम्बात की खाड़ी मे अपना जल गिराती है। यह दक्षिण राजस्थान की स्वर्ण रेखा कहलाती है। अनास नदी – इसका उद्गम मध्य प्रदेश से होता है तथा राज्य मे प्रवेश बांसवाड़ा जिले से होता है। इसकी सहायक नदी हरन है।

ऐराव नदी – इसका उद्गम प्रतापगढ से होता है तथा बांसवाड़ा मे यह माही नदी मे मिल जाती है।

बांध परियोजना :- माही बजाज सागर बांध व कागदी पिक अप बांध जिले की प्रमुख बांध परियोजनाएं है।

कृषि विशेष :- माही महोत्सव – इसका आयोजन पर्यटन विभाग द्वारा 2008 से करवाया जा रहा है।

सर्वाधिक क्षेत्रफल – अरहर, चावल, धान व सन

सर्वाधिक उत्पादन – अरहर, केला, शहतुत व बांस

बांस को हरा सोना कहा जाता है।

उद्योग :-

सुती वस्त्र उद्योग मिल्स

बांसवाड़ा सिंथेटिक्स

बांसवाड़ा फेब्रिक्स

मिनी सिमेन्ट कारखाना

खनिज क्षेत्र

मैगनीज के सर्वाधिक भण्डार यहां मिलते है।

इंडो गोल्ड लिमिटेड नामक आस्ट्रेलियाई फर्म ने यहां स्वर्ण भण्डारो की खोज की है।

जिले के आनन्दपुर भुकिया, संजेला, मानपुर व डबोचा मे सोने के नए क्षेत्र खोजे गए है।

संगमरमर, घीया पत्थर, रॉक फास्फेट, डोलोमाईट व युरेनियम भरपुर मात्रा मे मिलते है।

नापला गांव मे माही के किनारे परमाणु विद्युत ग्रह है।

जिला विशेष

☀ यह सर्वाधिक इसाई जनसंख्या वाला जिला है।

यहां 0-6 आयु वर्ग में सर्वाधिक लिंगानुपात 934 है।

यह 2011 में सबसे कम पुरूष साक्षरता वाला जिला है।

राज्य मे सोने के भण्डार भी यही से प्राप्त हुए है।

राज्य मे सर्वाधिक देशी मुर्गीयां भी यही पाई जाती है।

यहां सर्वाधिक वन पाए जाते है। जिनमे सागवान के वन भी शामिल है।

यहां 70% आदिवासी भील निवास करते है।

यहां मक्का, चावल व सोयाबीन अनुसंधान केन्द्र स्थापित है

यह राज्य मे न्युनतम दुग्ध उत्पादक जिला है।

मत्सय बीज फॉर्म भीमपुरा मे है।

बांसवाड़ा मे बतख व चुजा केंद्र है।

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