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भारत में कृषि (Agriculture in India) - gk website
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भारत में कृषि (Agriculture in India)

 भारत में कृषि

भारत के सम्पूर्ण भू भाग में से केवल 51 प्रतिशत भू भाग पर भारत की कुल श्रम शक्ति का 54 प्रतिशत भाग कृषि पर निर्भर करता है।

भारत में कृषि गणना प्रत्येक 5 वर्ष में कृषि व सहकारिता विभाग के द्वारा की जाती है।

भारत में कृषि
भारत में कृषि

भारत में प्रथम कृषि गणना 1970-71 में हुई थी।

अंतिम बार देश में कृषि गणना 2015-16 में हुई, जो 10वीं गणना थी।

देश के कुल सकल घरेलु उत्पाद में कृषि क्षेत्र का योगदान केवल 17.4% है।

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कृषि भारतीय संविधान की 7वीं सूची का विषय है, जो पहले राज्य सूची का विषय था परन्तु 2006 में इसे बदल कर समवर्ती सूची में डाल दिया।

भारत में कुल 15 कृषि जलवायुविक क्षेत्र है जिनमे से 9 अकेले उतर प्रदेश में है।

प्रत्येक फसल किसी निश्चित जलवायु क्षेत्र में ही विकसित होती है। जैसे- गैंहु शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में तथा धान उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में विकसित होने वाली फसल है।

स्वतंत्र भारत में प्रथम कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना 17 नवंबर 1960 को की गई। इस विश्वविद्यालय का नाम उतर प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय था जिसे बदल कर गोविन्द वल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कर दिया गया। यह विश्वविद्यालय भारत में हरित क्रांति का अग्रदूत रहा था। इसका नामकरण उतर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत के नाम पर किया गया।

इंपिरियल कांउसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च की स्थापना बिहार के पुसा नामक स्थान पर लार्ड कर्जन के काल मे 1905 में की गई। इसे 16 जुलाई 1929 में दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के नाम से स्थानान्तरित कर दिया गया।

राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण संस्थान ने भारत को 20 कृषि पारिस्थितकी क्षेत्रो व 60 उपक्षेत्रो मे बांटा है।

भारतीय कृषि का इतिहास नामक पुस्तक की रचना मोहिन्दर सिंह रंधावा ने की थी।

भारत में जहां 51 प्रतिशत भू भाग पर कृषि होती है। जबकि चीन में 11 प्रतिशत व अमेरिका में 20 प्रतिशत भाग पर कृषि होती है। स्वतंत्र भारत के पहले कृषि मंत्री डा. पंजाब राव देशमुख थे। भारत के अंतरिम मण्डल में डा. राजेन्द्र प्रसाद कृषि व खाद्य मंत्री थे।

पौधे से उत्पाद निर्माण तक की क्रियाओं को तीन प्रकार की आर्थिक क्रियाओं में शामिल किया जाता है-

प्राथमिक क्रियाएं :- इसमें फसल उत्पादन अथवा प्राकृतिक संसाधनो का उत्पादन शामिल किया जाता है। जैसे- कृषि, पशुपालन, मत्सयपालन, वानिकी आदि।

द्वितीयक क्रियाएं :- इसमें विनिर्माण को शामिल किया जाता है जिसमें कच्चे माल को तैयार किया जाता है। जैसे- बुनकर उद्योग, डबल रोटी उद्योग, ईंट निर्माण उद्योग आदि।

तृतीयक क्रियाएं :- इसमें प्राथमिक व द्वितीयक क्षेत्र को सेवाएं देना शामिल है। जैसे- यातायात, बैकिंग, बीमा, विज्ञापन व व्यापार आदि ।

फसल ऋतुएं

भारत में तीन प्रकार की फसल ऋतुएं पाई जाती है

(1) खरीफ
(2) रबी
(3) जायद

(1) खरीफ/सयालू/सावणी :-

यह मानसून काल की फसल है, जो जून-जुलाई में बोई जाती है व अक्टूबर-नवंबर में इसे काटा जाता है।

इसमें होने वाली फसलो का वर्गीकरण कुछ इस प्रकार है-

खाद्यान्न – चावल, ज्वार, बाजरा व मक्का

दलहन – मूंग, उड़द व सोयाबीन

तिलहन – सोयाबीन, मुंगफली, अरण्डी, तिल व सुरजमुखी

व्यापारिक/नकदी फसल – कपास व तम्बाकु

(2) रबी/उनालू /हाड़ी :-

यह शीत ऋतु की फसल है, जो नवंबर में बोई जाती है व इसे मार्च-अप्रेल मे काटा जाता है।

इसमें होने वाली फसलो का वर्गीकरण कुछ इस प्रकार है-

खाद्यान्न – गैंहू व जौ

दलहन – मटर व चना

तिलहन – सरसो व राई

व्यापारिक/नकदी फसल – गन्ना व बरसीम

(3) जायद :-

यह गर्मी के मौसम में पानी को अवशोषित कर लेने वाली फसलो का समुह है। इनके प्रयोग से पानी मानव शरीर में पानी की कमी को दूर किया जा सकता है। जैसे – तरबुज, खरबुजा, ककड़ी, खीरा आदि।

नोट- मूंग व उड़द खरीफ तथा जायद दोनो ऋतु चक्र में होने वाली फसले है।

फसलो के प्रकार

खाद्यान्न फसले :- वे फसले जिनका उत्पादन केवल मात्र खाने के उद्देश्य से किया जाता है। उदा. – गेंहू, धान, बाजरा, ज्वार

नकदी/व्यापारिक फसले :- वे फसले जिनका उत्पादन फसलो को बाजार में बेचने के उद्देश्य से किया जाता है। उदा.- कपास, जूट, तम्बाकु

ट्रेप फसले :- फसलो को कीट पतंगो व खरपतवार से बचाने के लिए खेत की मेड़ पर या फसल के आस पास अन्य फसलो का उगाया जाना ट्रेप फसल कहलाता है। उदा. – कपास को बचाने के लिए भिण्डी उत्पादन

उर्जा/एनर्जी फसले :- वे फसले जिनका उपयोग बायोडिजल बनाने या गेसोहॉल बनाने के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त इन फसलो से विभिन्न प्रकार से उर्जा प्राप्त की जाती है। उदा.- गन्ना, जेट्रोफा, चुकन्दर, मक्का व आलु

कृषि जोते

भारत में प्रति व्यक्ति जोतो का आकार 1.32 हेक्टेयर प्रति व्यक्ति है।

देश में सर्वाधिक जोतो का आकार नागालैण्ड में तथा न्यूनतम जोतो का आकार केरल में है।

1 हेक्टेयर में 10,000 वर्ग मीटर होते है तथा 1 बीघा में 2530 वर्ग मीटर होते है। इस प्रकार 1 हेक्टेयर मे 3.95 बीघा होते है।

कृषि के प्रकार

कंटूर कृषि/समोच्च कृषि – इसके अन्तर्गत पहाड़ी ढालो को काट-काट कर सीढीनुमा बनाया जाता है। जिससे वे कृषि योग्य हो जाते है।

निर्वाह कृषि – कृषक परिवार की आवश्यकता को पूरा करने के लिए की जाने वाली कृषि निर्वाह कृषि कहलाती है।

गहन निर्वाह कृषि – एक ही खेत मे एक ही समय में एक से अधिक फसलो का उत्पादन करना निर्वाह कृषि के अन्तर्गत आता है।

आदिम निर्वाह कृषि – स्थानान्तरित कृषि व चलवासी पशुचारण इसमें शामिल है। यह कर्तन व दहन/काटो व जलाओ अथवा बुश फेलो के नाम से जानी जाती है। अमेजन के बेसिन में यह कृषि सबसे ज्यादा की जाती है।

विभिन्न देशो में इसे विभिन्न नामो से जाना जाता है-

देश ⟶ उपनाम

भारत झुमिंग

मेक्सिको मिल्पा

ब्राजील रोका

मलेशिया लदांग

श्रीलंका चेन्ना

कांगो मसोले

वियतनाम रे

म्यांमार दुग्थां

देश में इसे विभिन्न नामो से जाना जाता है-

क्षेत्र उपनाम

बुंदेलखण्ड बेवार या डहियार

छतीसगढ दीपा

राजस्थान वत्रा

आंध्र प्रदेश पोडू

केरल कुमारी

ओडिशा कमान, विगा, धाबी

वाणिज्यिक कृषि – इसमें फसल उत्पादन व पशुपालन बाजार में विक्रय के उद्देश्य से किया जाता है।

वाणिज्यिक अनाज कृषि – इसमें विक्रय के उद्देश्य से अनाज उत्पादित किया जाता है।

मिश्रित कृषि – अनाज व चारे के लिए फसलो को एक साथ उगाना इसमें शामिल है।

रोपण कृषि – ऐसी फसलो में बड़े पैमाने पर श्रम व पुंजी की आवश्यकता होती है। जैसे – चाय, कहवा, कपास, केला, रबड़, काजु आदि ।

भारत में सिंचाई व्यवस्था

कूएं व नलकूपो द्वारा – 55.9%

नहरो द्वारा – 31.4%

तालाबो द्वारा – 6.1%

अन्य साधनो से – 6.6%

विभिन्न प्रकार की कृषि विधियां

सेरीकल्चर रेशमकीट पालन

एपिकल्चर मधुमक्खी पालन

पिसीकल्चर मत्सय पालन

फ्लोरीकल्चर फलो का उत्पादन

विटीकल्चर अंगूर उत्पादन

वर्मीकल्चर केंचुआ पालन

पोमोकल्चर फल उत्पादन

ओलेरीकल्चर सब्जी उत्पादन

हॉर्टीकल्चर बागबानी

एरोपोर्टिक हवा में पौधो को उगाना

हाइड्रोपोनिक्स जल में पौधो को उगाना

मैरी कल्चर समुद्री जीवो का उत्पा.

ओलिवरी कल्चर दन जैतून उत्पादन

विभिन्न कृषि क्रांतियाँ

1. हरित क्रांति- खाद्यान्न उत्पादन

विश्व में हरित क्रांति की स्थापना 1943 मे मैक्सिको निवासी डॉ. नॉरमन ई. बोरलोग ने की थी।

हरित क्रांति शब्द का जनक विलियम गेडे हैं।

भारत में हरित क्रांति की शुरूआत 1966-67 में एम. एस. स्वामीनाथन ने की, जिन्हें भारत में हरित क्रांति का संस्थापक माना जाता है।

हरित क्रांति के लिए कुल छ: फसलों को चुना गया था-गेंहू, चावल, ज्वार, बाजरा, मक्का व राई। लेकिन सर्वाधिक वृद्धि गेहूँ की फसल में हुई तथा चने व बाजरे के उत्पादन में कमी हुई।

भारत में सर्वाधिक वृद्धि पंजाब, हरियाणा, उतरप्रदेश में हुई तथा राजस्थान में सर्वाधिक वृद्धि गंगानगर व हनुमानगढ़ में हुई।

इसका दूसरा चरण 1987 में शुरू किया गया जिसमें चावल की फसल को लाभ मिला।

2. श्वेत क्रांति- दुग्ध उत्पादन

इसका संस्थापक डॉ. वर्गीज कुरियन को माना जाता है, जिन्होंने 1970 में ‘ऑप्रेशन फ्लड’ कार्यक्रम की शुरूआत की।

3. नीली क्रांति – मत्स्य उत्पादन

4. भूरी क्रांति उर्वरक उत्पादन

5. रजत क्रांति – अंडा उत्पादन

6. पीली क्रांति – तिलहन उत्पादन

7. कृष्ण क्रांति – पेट्रोलियम उत्पादन

8. लाल क्रांति – टमाटर/मांस उत्पादन

9. गुलाबी क्रांति – झींगा मछली उत्पादन

10. बादामी क्रांति – मसाला उत्पादन

11. सुनहरी क्रांति – फल उत्पादन

12. अमृत क्रांति – नदी जोड़ो परियोजना

13. गोल क्रांति – आलु

14. सनराइज क्रांति – इलेक्ट्रोनिक्स

15. हरित सोना क्रांति – बांस उत्पादन

16. धूसर क्रांति सीमेन्ट उत्पादन

17. सिल्वर क्रांति – कपास उत्पादन

18. मूक क्रांति – मोटे अनाज उत्पादन

19. परामनी क्रांति – भिण्डी उत्पादन

20. ग्रीन गोल्ड क्रांति – चाय उत्पादन

21. सैफरॉन क्रांति – केसर उत्पादन (जम्मू-कश्मीर)

22. सदाबहार क्रांति – जैव तकनीकी से कृषि उत्पादन

23. इन्द्रधनुष क्रांति – सभी क्रांतियों को बढ़ावा देने से संबंधित

➡️ नाबार्ड (NABARD) National Bank for Agrcultue and Rural Development

➡️ IARI इण्डियन एग्रीकल्चर रिसर्च इन्स्टीटयूट

➡️ कृभको (Kribhco)(Krishak Bharti Co operatives Ltd.)–17-4-1980

➡️ इफको (IEFCO)(Indian Farmers Fertilizers Co-operatives Ltd.) 3-11-1967

कृषि संबंधी महत्वपूर्ण अंतराष्ट्रीय संस्थान

➡️ खाद्य एंव कृषि संगठन – रोम (इटली)

➡️ विश्व मौसम विज्ञान संगठन – जेनेवा स्विट्जरलैंड

➡️ खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान – वाशिंगटन डी. सी (संयुक्त राज्य अमेरिका)

➡️ अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान – मनीला (फिलीपींस)


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