AFTEREFFECTS OF DEMONETISATION

विमौद्रीकरण के उत्तरप्रभाव
(AFTEREFFECTS OF DEMONETISATION)

AFTEREFFECTS OF DEMONETISATION
Meaning-of-DEMONETISATION

विमुद्रीकरण परिचय
(Demonetisation Introduction):-

➥ नवंबर 2016 के प्रारंभ में सरकार ने अर्थव्यवस्था के गंभीर निहितार्थ एक ऐतिहासिक उपाय की घोषणा की।
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➥ इसके तहत् 500 और 1000 रुपये की उच्च मूल्य वाली मुद्राओं के चलन पर रोक लगा दी गई।
➥ इस प्रकार, बाजार में संचारित नकदी के 86 प्रतिशत हिस्से को अमान्य करार दे दिया गया।
➥ सरकार के मुताबिक, इससे चार मुख्य उद्देश्यों की पूर्ति होगीः-

  1. भ्रष्टाचार पर लगाम लगायी जा सकेगी।
  2. नकली मुद्राओं के चलन पर रोक लगाई जा सकेगी;
  3. आतंकवाद पर नकेल कसी जा सकेगी (क्योंकि आतंकवादी ऊंची कीमत की नकदी का इस्तेमाल करते हैं), तथा; 
  4. काला धन के संचय पर रोक लगाई जा सकेगी।

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➥ इस कार्रवाई के पूर्व अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए प्रयासों की एक वृहत शृंखला शुरू की जा चकी थी।

➥ वर्ष 2014 में विशेष जांच दल (एसआईटी) का निर्माण किया गया था।

➥ काला धन एवं कर इम्पोजिशन अधिनियम 2015, बेनामी लेन-देन अधिनियम 2016, स्विट्जरलैंड के साथ सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए समझौता, मॉरीशस, साइप्रस और सिंगापुर के साथ कर संधि में परिवर्तन और आय घोषणा योजना, इत्यादि।

➥ यह कोई अभूतपूर्व प्रयास था, ऐसी बात नहीं थी, क्योंकि इसके पहले वर्ष 1946 एवं 1978 में ऐसे

ही प्रयास किए जा चुके थे।

➥ बाद वाले प्रयास का नकदी पर – कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ा था।

नौकरियों के चले जाने की खबरें हैं। खेती से होने वाली आमदनी में गिरावट की बातें कही जा रही हैं और साथ ही सामाजिक मुश्किलों की भी बातें सामने आईं,

➥ विशेष रूप से अनौपचारिक क्षेत्र (जो नकदी पर ज्यादा निर्भर करते है) में, जो कि अर्थव्यवस्थाओं का गहन हिस्सा है।

➥ बहरहाल आंकड़ों के अभाव में एक व्यवस्थित अध्ययन अभी भी संभव प्रतीत नहीं हो रहा है।

➥ विमौद्रीकरण या नोटबंदी से होना वाले फायदों को केवल आने वाले वर्षों में ही महसूस किया जा सकेगा।

➥ यह महिम वास्तव में तात्कालिक लाभों की बजाय दीर्घकालिक लक्ष्यों के प्रति लक्षित था।

➥ हम अर्थव्यवस्था पर विमौद्रीकरण के प्रभावों एवं इसके व्यावहारिक पहलुओं का संक्षिप्त विश्लेषण इस प्रकार कर सकते हैं:-

दीर्घकालिक लाभः

➥ आने वाले लंबे समयकाल के संदर्भ में बदलाव की दिशा और परिमाण की पैमाईश अभी जल्दबाजी होगी।

➥ काला धन के मामले में नकदी के अवैध लेन-देन एवं वित्तीय बचत पर विमौद्रीकरण या नोटबंदी के प्रभावों को देख पाने में अभी कई साल लगेंगे।

➥ लेकिन कुछ संकेत हैं, जो बदलाव की ओर इशारा कर रहे हैं:-

(i) डिजिटल प्रौद्योगिकियों से क्या तात्पर्य है ?
What is meant by digital technologies ?

  1. विमौद्रीकरण का एक प्राथमिक उद्देश्य कम नकदी या ‘कैश-लाइट’ (Cashlite) अर्थव्यवस्था सृजित करना भी है।
  2. इससे न केवल वित्तीय व्यवस्था में ज्यादा बचत के प्रति रुझान बढ़ेगा बल्कि कर अनुपालन में भी सुधार आएगा।
  3. फिलहाल इन उद्देश्यों से भारत अभी कोसों दूर है।
  4. वतल समिति ने हाल ही में यह अनुमान लगाया था कि सभी उपभोक्ताओं के भुगतान के लिए अभी करीब 78 प्रतिशत नकदी उपयोग में लायी जा रही है।
  5. प्राइस वॉटर हाउस कूपर्स (2015) के मुताबिक, दूसरे देशों की तुलना में भारत में उपभोक्ताओं में नकद लेन-देन की प्रबलता कहीं ज्यादा देखने को मिलती है (मूल्यों की दृष्टि से कुल लेन-देन का 68 प्रतिशत एवं मात्रा के हिसाब से 98 प्रतिशत)।
  6. लोग कई कारणों से नकद लेन-देन करना ही पसंद करते हैं क्योंकि यह सुविधाजनक है, इसे हर जगह स्वीकार किया जाता है और जन-साधारण के लिए इसका उपयोग लगभग लागत-रहित है (निश्चित तौर पर व्यापक रूप से पूरे समाज के लिए कतई नहीं)।
  7. नकदी उपयोगकर्ता की गोपनीयता को अक्षुण्ण रखती है, जो तब तक बुरा नहीं है जब तक कि कर की चोरी (कर वंचना) के लिए इसका अवैध रूप से किसी तिकड़म के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाता।
  8. डिजिटलीकरण व्यापक तौर पर समाज के तीन वर्गों पर प्रभाव डाल सकता है-
  9. गरीब तबका, जो डिजिटल अर्थव्यवस्था के दायरे से पूरी तरह बाहर है;
  10. कम अमीर, जो कि अपने अर्जित जन-धन खाता और RuPay (रुपे) कार्ड के इस्तेमाल से डिजिटल अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन रहा है और
  11. संपन्न, जो कि क्रेडिट कार्ड के व्यापक इस्तेमाल से डिजिटल अर्थव्यस्था के साथ पूरी तरह एकीकृत हो चुके हैं।

(ii) एक असली विलासिता संपत्ति क्या है ?

What is a real luxury estate ?

  1. इस क्षेत्र में व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। अतीत में, जमा किए गए काले धन का बहुत बड़ा हिस्सा अंततः संपत्ति बिक्री पर करों को छिपाने के लिए इस्तेमाल में लाया गया था।
  2. अचल संपत्तियों की कीमत में कमी वांछनीय है क्योंकि इससे मध्य वर्ग के लिए सस्ते मकान का सपना पूरा हो पाएगा और इससे पूरे भारत में श्रम गतिशीलता संभव हो पाएगी,
  3. जो फिलहाल मकान किराये की अत्यधिक ऊंची दर के कारण बाधित है।

अल्पकालिक प्रभावः

विमौद्रीकरण अर्थव्यवस्था पर अल्पकालिक लागत आरोपित करेगा, जिसकी पैमाइश उचित आंकड़ों के पर्याप्त न होने के कारण अब भी मुश्किल है क्योंकि इस प्रक्रिया ने वृहत् संरचानात्मक झटका दिया है।

➥ अतीत के अंतर्निहित व्यवहार के मानदंड भविष्य के व्यवहार के लिए अपूर्ण संकेतक होंगे और इस प्रकार परिणाम भी।

➥ हालांकि अल्पावधि के प्रभाव की रूपरेखा रेखांकित की जा सकती है:-

(i) भारतीय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) पर प्रभावः-
What is gross domestic product?

  1. आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इस प्रकार राष्ट्रीय आय भी प्रभावित हुआ है।
  2. लेकिन यह केवल तात्कालिक है। संभव है कि सकल घरेलू उत्पाद 0.25 से 0.5 प्रतिशत कम होकर 7 प्रतिशत के आस-पास रहे।
  3. विमौद्रीकरण के तत्काल बाद जीएसटी एवं अन्य संरचनात्मक सुधार भारत की वृद्धि दर को 8 से 10 प्रतिशत सीमा विस्तार के बीच की गति प्रदान कर सकता है। यही भारत की जरूरत भी है।

(ii) आय का पुनर्वितरणः-

  1. संसाधनों के पुनर्वितरण का सरकार के राजकोषीय खाते पर भी निम्नलिखित प्रभाव पड़ेगा:- 
  • रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया/सरकार अप्रत्याशित संपत्ति प्राप्ति से कुछ लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
  • बैंकों में काला धन के जमा होने से आय कर ऊपर की ओर जा सकता है। 

विमौद्रीकरण के तीन नकारात्मक प्रभाव हैं- 

  1. पहला, नई करेंसी की छपाई की लागत 
  2. दूसरा, बैंकिंग व्यवस्था में ‘ (बाजार स्थिरीकरण के योजना बॉण्ड्स में असंतुलन) में वृद्धि की अपरिहार्यता को निष्फल करने की लागत पर रोक, और 
  3. तीसरे, अगर सकल घरेलू उत्पाद में गिरावट आती है, तो केंद्र के कॉर्पोरेट और अप्रत्यक्ष कर राजस्व में भी गिरावट आ सकती है, लेकिन अब तक इसका कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है।

संभावनाओं का दोहन:-
(Tapping the Prospects)

  1. सरकार को विमौद्रीकरण के दीर्घावधि लाभ को अधिकतम करने की और छोटी अवधि के खर्च को कम करने की जरूरत है।
  2. इस प्रयोजन के लिए, निम्न उपाय उपयोगी दिखाई देते हैं:-
  3. A.पुनर्मौद्रीकरण (Remonetisation) की प्रक्रिया तेजी से होनी चाहिए।
  4. B. ‘अप्रसारित नकदी’ (Non-cash) से उत्पन्न होने वाला कोई भी अप्रत्याशित लाभ का इस्तेमाल पूंजीगत प्रकार के खर्च के तौर पर होना चाहिए न कि राजस्व प्राप्ति से होने वाले खर्च की तरह।
  5. चूंकि यह आय ‘एक बार’ (One-off) होगी, इसका इस्तेमाल भी एक बार होना चाहिए.
  6. C. डिजिटलीकरण अवश्य ही मध्यम अवधि में जारी रहेगा-
  7. हालांकि न तो यह कोई रामबाण है और न ही नकद अर्थव्यवस्था खराब है।
  8. भुगतान के दोनों ही प्रारूपों का संतुलन और लागत समझदारी भरा कदम होगा।
  9. डिजिटलीकरण की ओर हमारे कदम अवश्य ही धीरे-धीरे बढ़ने चाहिए और समावेशी होने चाहिए।
  10. डिजिटलीकरण को प्रोत्साहित करना चाहिए और प्रोत्साहन-समर्थित नकदियों को निष्प्रभावी करना चाहिए।
  11. प्रोत्साहन की लागत अनिवार्यरूपेण सार्वजनिक क्षेत्र (सरकार/आरबीआई) को वहन करनी चाहिए (उपभोक्ताओं या वित्तीय बिचौलियों द्वारा नहीं)।
  12. D. नए घोषित (और अघोषित या अज्ञात) धन पर कर उगाही की कोशिश पदसोपान के किसी भी क्रम के अधिकारियों द्वारा कर उत्पीड़नोन्मुखी नहीं होना चाहिए।
  13. आंकड़ों के बेहतर इस्तेमाल, पुख्ता साक्ष्य आधारित जांच व लेखा परीक्षण, करदाताओं एवं कर-अधिकारियों के बीच कम अंतर्व्यवहार के साथ ऑनलाइन मूल्यांकन पर अधिक निर्भरता की ओर क्रमिक बदलाव आज की आवश्यकता है।
  14. कर अनुपालन में अभिवृद्धि के लिए गैर-दंडात्मक साधन विकसित किए जाने चाहिए।
  15. E. इस तरह से, विमौद्रीकरण वास्तव में व्यवहार में लंबे समय तक चलने वाले परिवर्तनों के लिए उत्प्रेरक साबित हुआ है,
  16. इसके लिए विमौद्रीकरण के साथ-साथ अन्य गैर-दंडात्मक, प्रोत्साहन-अनुपूरक उपायों की जरूरत होगी जो कर वंचना (करों की चोरी) वृत्ति के लिए प्रोत्साहन को कम करते हों।
  17. विमौद्रीकरण एक कड़ा कदम था अब पूरक तौर पर इसे थोड़े राहतपूर्ण उपायों का भी साथ मिलना चाहिए।
  18. एक पांच आयामी रणनीति अपनाई जा सकती:-

  • (a) जीएसटी में उन गतिविधियों को भी शामिल किया जाना चाहिए जो काले धन का स्रोत मानी जाती हैं, जैसे-भूमि और अन्य अचल संपत्तियां।
  • (b) व्यक्तिगत आयकर दरों और रियल एस्टेट स्टाम्प शुल्क घटाए जा सकते हैं; आयकर का आधार धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है और संवैधानिक व्यवस्था के साथ संगत किया जा सकता है और उत्तरोत्तर सभी उच्च-आय को इसमें शामिल किया जा सकता है;
  • (c) कॉरपोरेट टैक्स की दर को कम करने के लिए समय सारिणी को त्वरित किया जा सकता है, तथा;
  • (d) विवेकाधिकार को कम करने और जवाबदेही को बेहतर करने के लिए, कर प्रशासन में सुधार की आवश्यकता है।

निष्कर्ष (Conclusion):-

➥ विमौद्रीकरण की वास्तविक लागत क्या रही, इस बारे में वर्ष 2016-17 के वित्तीय वर्ष के अंत तक ही जाना जा सकेगा, जबकि इसके अल्पकालिक लाभ की प्रकृति भी सीमित होगी।
➥ इस कदम की सफलता मुख्य रूप से इसके दीर्घकालिक प्रभावों से ही जानी जाएगी।
➥ हालांकि, इसके लाभ को अधिकतम करने के लिए सरकार को बतौर पूरक इसके लिए कई अन्य समयानुकूल और तर्कसंगत कदम उठाने की जरूरत है।
➥ इस प्रकार, आर्थिक सुधारों की दिशा में जो कदम बढ़ाया जा चुका है उसकी गति धीमी नहीं होनी चाहिए ताकि अर्थव्यवस्था विमौद्रीकरण से होने वाले फायदे को महसूस कर सके।

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