वन एवं वन्य जीव संरक्षण भाग-2 (Van or Vany Jeev Sanrakshan Part-2)

 वन एवं वन्य जीव संरक्षण भाग-2
(Forest and Wildlife Conservation)

https://haabujigk.in/2020/09/rashtreey-park-or-vany-jeev-abhyarany.html
Van-or-Vany-Jeev-Rajasthan 

✔️ वन अनुसंधान सर्वेक्षण संस्थान देहरादून में है । भारत की प्रथम वन नीति 1952 के अनुसार 33 प्रतिशत भूमि पर वन होने चाहिये। 2007 के अनुसार भारत में 22.5 % भूमि पर वन है।

✔️ भारत में सर्वाधिक मानसूनी वन और उष्ण कटिबन्ध पतझड़ वनों का विस्तार है।
✔️ भारत में सबसे अधिक वन आच्छादित राज्य मिजोरम (Mizoram) है । (89 प्रतिशत) सबसे कम वन हरियाणा (Haryana) में है (2/3 प्रतिशत) भारत में सर्वाधिक ज्वारीय वनों (Tidal forest) का विस्तार प.बंगाल मे है । (सुन्दरी वन)

✔️ भारत सरकार ने वन्य जीव संरक्षण सुरक्षा अधिनियम 1972 में पारित किया था ।

✔️ बाघ परियोजना (Tiger project) की शुरूआत 1973 में हुई ।

✔️ मरमच्छ परियोजना (Scavenging project) की शुरूआत 1975 में हुई।

✔️ गेंडा परियोजना (Unicorn Project) की शुरूआत 1987 में हुई ।

✔️ हाथी परियोजना (Elephant project) की शुरूआत 1988 में हुई ।

✔️ वृक्षारोपण एवं परती भूमी विकास के लिये इंदिरा गाँधी के जन्म दिवस पर 19 नवम्बर को इंदिरा प्रियदर्शी वृक्षमित्र पुरस्कार भारत सरकार द्वारा दिया जाता है ।

✔️ वन्य जीव संरक्षण से सम्बन्धित देश का पहला लिखित कानून सम्राट अशोक द्वारा बनाया गया था । भारत में वन्य जीव संरक्षण का प्रथम प्रयास सम्राट अशोक द्वारा ही किया गया था ।
✔️ संविधान लागु होने के अवसर पर वन्य जीव को राज्य सूची का विषय घोषित किया गया था । 42वें संशोधन 1976 के द्वारा वन्य जीव को समवर्ती सूची का विषय बना दिया गया है ।
✔️ 5 जून से 21 जून तक यू.एन.ओ. (UNO) द्वारा विश्व में पर्यावरण के प्रति जागृती व जनचेतना लाने के उद्देश्य से स्टॉक होम सम्मेलन आयोजित किया गया । इस सम्मेलन में दो महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये-
1. प्रतिवर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का ।
2. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरणीय कार्यक्रम (UNPC) का निर्णय लिया
इसका मुख्यालय केन्या की राजधानी नेरोबी (Nerobee) में रखा गया ।
✔️ सन् 1972 में भारत सरकार द्वारा भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act of India) लागू किया गया । यह अधिनियम 1 सितम्बर 1973 को सम्पूर्ण राजस्थान में लागू हुआ । इस कानुन के द्वारा इसी दिन से राज्य में शिकार को पुरी तरह से प्रतिबन्धित कर दिया गया ।
✔️ भारत सरकार ने अप्रेल 1973 में टाईगर प्रोजेक्ट कार्यक्रम की शुरूआत की । राजस्थान के तीन अभ्यारण टाईगर प्रोजेक्ट योजना में शामील है । 1. रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान (Ranthambore National Park) को 1973 में टाईगर प्रोजेक्ट में शामिल किया गया ।
2. सरिस्का अभ्यारण (Sariska Reserve) को 1978-79 में एवं
3. वर्ष 2012 में दर्रा अभ्यारण (Pass Reserve) को टाईगर प्रोजेक्ट में शामील कर लिया गया है ।
✔️ केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (Keoladeo National Park) सुनहरें त्रिकोण पर अवस्थित है सन् 1955 में इसकी स्थापना हुई, 1981 में इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला एवं वर्ष 1985 में इसे यूनेस्कों की “विश्व धरोहर” (World heritage) सूची में शामिल किया गया ।
✔️ केवलादेव अभयारणय में कदम्ब (Kadamb) के वृक्ष बहुतायत मात्रा में पाये जाते है। इस अभ्यारण्य का क्षेत्रफल 28.73 वर्ग किलोमीटर है । इस अभ्यारण्य को अजान बाँध (Ajan dam) से जलापूर्ति की जाती है ।
✔️ सन् 1981 में स्थापित राष्ट्रीय मरू उद्यान (National Desert Park) क्षेत्रफल की दृष्टी से राज्य का सबसे बड़ा अभ्यारण्य है । यह जैसलमेर एवं बाड़मेर में फैला हुआ है । इसमें राज्य पक्षी गोडावण (Godavan) मुख्य रूप से पाया जाता है । यहाँ “आकल वुड़ फॉसिल पार्क” (Aqal Wood Fossil Park)भी स्थित है |
✔️ दर्रा अभ्यारण्य धोकडा (Dhokada)वनों के लिये प्रसिद्ध है, यहा गागरोनी तोता (हीरामन तोता) Gagroni Parrot (Hiraman Parrot) पाया जाता है, जिसे स्थानिय भाषा में “टुईयाँ’ (Tueya) कहते है। इस अभ्यारण्य में अबली मीणी का महल, रावठा महल, गागरोन किला, दरा मन्दिर एवं गप्तकालीन शिव मन्दिर (Abli Meeni’s Palace, Rawatha Palace, Gagaron Fort, Dara Temple and Guptakalin Shiv Temple) स्थित है ।
✔️ कुरंजा पक्षी, काले हिरण एवं साइप्रस रोन्टडस घास (Kuranja Bird, Blackbuck and Cyprus Rontadus Grass) के लिये तालछापर अभ्यारण्य (Sculpture Reserve) प्रसिद्ध है । यह राज्य का दुसरा सबसे छोटा अभ्यारण्य है, इसका क्षेत्रफल 7.19 वर्ग किलोमीटर है ।
✔️ लव-कुश (झरना) नामक दो जलस्त्रोत सीता माता अभ्यारण्य (Sita Mata Sanctuary) प्रतापगढ़ जिले में स्थित है । त्रेतायुग में अपने बनवास का समय सीताजी ने यही बिताया था । इस अभ्यारण्य में जाखम बाँध (Jakham Dam) स्थित है ।
✔️ यह अभ्यारण्य करमोई (कर्ममोचनी) नदी का उद्गम स्थल भी है । यह अभ्यारण्य उड़न गिलहरी व चौसिंगा हिरण (Flying squirrel and Four deer) हेतु प्रसिद्ध है । सागवान (Teak / Sagawan) के सर्वाधिक वन यहीं पाये जाते है । यह राज्य का सर्वाधिक जैव विविधता वाला अभ्यारण्य है ।
✔️ सीतामाता अभ्यारण्य में रात्रिचर प्राणी पेंगोलिनन (Pangolinan) पाया जाता है, जिसे स्थानीय भाषा में “आड़ाहुला’ (Adhula) कहा जाता है, जबकि चौसिंगा हिरण को स्थानीय भाषा में भेड़ल (Bhedal) कहते है ।
✔️ सीतामाता अभ्यारण्य को चीतल की जन्मभुमि कहा जाता है । लोरीकीट पक्षी (Lorikeet bird) केवल और केवल इसी अभ्यारण्य में पाया जाता है ।
✔️ जेठा-मुठ्ठा पीर की दरगाह गजेनर अभ्यारण्य (Gajner Reserve) में स्थित है । रियासत काल गंगासिंह ने इस अभ्यारण्य में शिकारगाह का निर्माण करवाया था।

✔️ उदयपुर, राजसमन्द व पाली जिले में विस्तृत कुम्भलगढ़ अभ्यारण्य (Kumbhalgarh Sanctuary) जंगली भेड़ियें व जंगली मुर्गे (Wild wolves and wild fowl) हेतु प्रसिद्ध है ।

✔️ इस अभ्यारण्य में रणकपुर जैन मन्दिर, परशुराम महादेव, मुछाला महावीर एवं कुम्भलगढ़ दुर्ग (Ranakpur Jain Temple, Parashuram Mahadev, Muchhala Mahaveer and Kumbhalgarh Fort) स्थित है।
✔️ राज्य का प्रथम जैविक उद्यान नाहरगढ़ अभ्यारण्य (Nahargarh Sanctuary) जयपुर में विकसीत किया गया है । इसी अभ्यारण्य में राज्य का प्रथम “बीयर रेस्क्यू सेन्टर” (Beer Rescue Center) स्थापित किया गया है ।
✔️ फुलवारी की नाल अभ्यारण्य (Phulwari ki nal sanctuary) उदयपुर मानसी, वाकल एवं सोम नदी का उद्गम स्थल है ।
✔️ वन विहार, केसर बाग, रामसागर अभ्यारण्य (Ramsagar Sanctuary) धौलपुर जिले में स्थित है।
✔️ शेरगढ़ अभ्यारण्य (Shergarh Sanctuary) बारां में सीताफल व साँपों के लिये प्रसिद्ध है । पुष्कर गैप परियोजना कार्यक्रम 1997-98 में इण्डिया-कनाड़ा एनवायरमेन्ट सोसायटी के सहयोग से चलाया गया था ।
✔️ जनता वन योजना कार्यक्रम 1996-97 में चलाया गया जिसके तहत वृक्षारोपण व उनके प्रबन्धन का कार्य पंजीकृत स्वंयसेवी संस्थाओं को सौपा गया ।
✔️ राज्य में पंचवटी वृक्षारोपण (बेल, बरगद, आँवला, पीपल, अशोक वृक्ष) को जीवित रखने का श्रेय बी.एम. अग्रवाल को जाता है ।
✔️ आस्ट्रेलिया व यूनेस्को के सहयोग से 1959 में जोधपुर में काजरी (Kajari) की स्थापना की गई । वर्तमान में देश में काजरी के पाँच उपकेन्द्र है –
1. जैसलमेर (Jaisalmer)
2. पाली (Pali)
3. बीकानेर (Bikaner)
4. भुज (गुजरात) (Bhuj, Gujarat)
5. लद्दाख (Ladakh)
✔️ मरूस्थलीय वनों के विकास के लिये शुष्क वन अनुसंधान केन्द्र (आफरी) (Afari) की स्थापना 1985 में जोधपुर में की गई ।
✔️ विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को मनाया जाता है, जबकि विश्व वानिकी दिवस 21 मार्च को मनाया जाता है ।
✔️ वन एव वन्य जीव संरक्षणों हेतु दिया जाने वाला अमृतादेवी पुरस्कार की शुरूआत 1994 में हुई ।
✔️ किसी धार्मिक स्थान के साथ संरक्षित वन क्षेत्र “ओरण’ (Oran) कहलाता है । उत्तरी अरावली में इसे “रखत” (Rakhat) कहा जाता है।

✔️ रियासत काल में रियासतों द्वारा आम जनता से वनों के उपयोग की एवज में लिया जाने वाला कर बाब (Kar Bab) कहलाता है ।

✔️ सन् 1986 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के द्वारा रूख भायला (वृक्षमित्र) कार्यक्रम की शुरूआत डूगरपुर जिलें के बगतरी गाँव (Bagatari Village) से की गई ।
✔️ राज्य वृक्ष खेजड़ी (Khejadi) को बचाने हेतु वर्ष 1991 में ऑपरेशन खेजड़ी कार्यक्रम चलाया गया था ।
✔️ वर्ष 1992 में जापान की ओ.ई.सी.एफ. (OECF) के सहयोग से अरावली वृक्षारोपण कार्यक्रम चलाया गया । जिसका उद्देश्य पारिस्तिथिकी सन्तुलन को बनाये रखना था ।
✔️ राज्य में दशमक चेती गुलाब की खेती नाथद्वारा से खमनोर तक के क्षेत्र में की जाती है ।
✔️ राज्य में सात मृगवन, 33 शिकार निषेध क्षेत्र एवं चार जन्तुआलय स्थित है ।
नोट :- प्रारम्भ में राज्य में पाँच जन्तुआलय स्थापित किये गये थे किन्तु 1922 में न्यायालय के आदेश के बाद बीकानेर जन्तुआलय को बन्द कर दिया गया है ।
✔️ राज्य का प्रथम जन्तुआलय जयपुर जन्तुआलय (Jaipur Jantuaalay) है । इसकी स्थापना 1876 में रामसिंह द्धितीय द्वारा की गई ।
✔️ उदयपुर जन्तुआलय (Udaipur District) की स्थापना 1878 में एवं जोधपुर जन्तुआलय (jodhapur Jantualay)की स्थापना 1936 में तथा राज्य के नवीनतम जन्तुआलय कोटा जन्तुआलय (kota jantuaalay) की स्थापना 1954 में की गई है ।
✔️ राज्य का प्रथम व देश का तीसरा गिद्ध संरक्षण केन्द्र (Vulture conservation center) बीकानेर के जोहड़बीड़ (Johadbeer) स्थान पर स्थापित किया गया है।
✔️ पर्यावरण नीति बनाने वाले देश का प्रथम राज्य राजस्थान है राजस्थान सरकार ने 22 अप्रेल 2010 को पर्यावरण नीति घोषित की ।
✔️ राज्य के प्रथम व एकमात्र तीतली पार्क (Titli Park) का निर्माण जयपुर में कपुर चन्द्र कुलिश स्मृति वन में किया जा रहा है। रणथम्भोर उद्यान की प्रसिद्ध बाघिन “मछली (T-16) की बेटी T-17 को अशोक गहलोत ने डिस्क थ्रो कृष्णा पुनिया के नाम पर कृष्णा नाम दिया है ।
राष्ट्रीय उद्यान ➡️ राज्य
राजीव गाँधी ➡️ रणथम्भौर (राजस्थान)
घना पक्षी विहार ➡️ भरतपुर (राजस्थान)

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